यदि सब चला जाए, तो क्या बचेगा?
हिंदी कवितायदि सब चला जाए, तो क्या बचेगा? तुम अपने बारे मेंजो सोचते हो—क्या वहीवास्तव मेंतुम हो? हम अहंकार कोअकड़ समझ लेते हैं।किसी का सीना तना देखकह देते हैं—इसे अहंकार है। पर अहंकारइतना सतही नहीं। अहंकार है—“मैं हूँ।” औरजिसके साथतुम इस “मैं हूँ” कोजोड़ देते हो,वहीअहंकार बन जाता है। “मैं महान हूँ”—अहंकार।“मैं कमजोर हूँ”—अहंकार। “मैं पीड़ित
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