कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

गीतिका छंद पर सृजन -देवता

हिंदी कविता

गीतिका छंद 🌹
गीतिका छन्द एक मात्रिक छन्द है। इसके चार चरण होते है। प्रत्येक चरण में 14 और 12 यति से 26 मात्राएँ होती है। अन्त में क्रमशः लघु-गुरु होता है।
मापनी–
2122 2122 , 2122 212=26

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चिंता से चिता तक

हिंदी कविता

चिंता से चिता तक मां बाप को बच्चों के भविष्य की चिन्ता,महंगे से स्कूल में एडमिशन की चिन्ता।स्कूल के साथ कोचिंग, ट्यूशन की चिन्ता,शहर से बाहर हाॅस्टल में भर्ती की चिन्ता।। जेईई, नीट, रीट कम्पीटीशन की चिन्ता,सरकारी, विदेशी कं. में नौकरी की चिन्ता।राजशाही स्तर का विवाह करने की चिंता,विवाह पश्चात विदेश में बस जाने की

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शिव महिमा

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता शिव की महिमा भगवान शिव पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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हिंदी संग्रह कविता-न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है

नारी जीवन और संवेदना

न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है। जिसे सुनकर दहलती थी कभी छाती सिकंदर की,जिसे सुनकर कि कर से छूटती थी तेग बाबर की,जिसे सुन शत्रु की फौजें बिखरती थीं, सिहरती थीं,विसर्जन की शरण ले डूबती नावें उभरती थीं।हुई नीली कि जिसकी चोट से

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हिंदी संग्रह कविता-खून दिया है मगर नहीं दी कभी देश की माटी है

हिंदी कविता

खून दिया है मगर नहीं दी कभी देश की माटी है युगों-युगों से यही हमारी बनी हुई परिपाटी है,खून दिया है, मगर नहीं दी कभी देश की माटी है। इस धरती पर जन्म लिया है, यही पुनीता माता है,एक प्राण, दो देह सरीखा, इससे अपना नाता है।यह धरती है पार्वती माँ, यही राष्ट्र शिव शंकर

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हिंदी संग्रह कविता-दुश्मन के लोहू की प्यासी भारत की तलवार है

हिंदी कविता

दुश्मन के लोहू की प्यासी भारत की तलवार है अरे! तुम्हारे दरवाजे पर दुश्मन की ललकार हैभारत की रणमत्त जवानी, चल क्या सोच विचार है।राणा के वंशजो, शिवा के पूतो, माँ के लाड़लो।समर-भूमि में बढ़ो, शत्रु को रोको और पछाड़ लो,तुम्हें कसम है अपनी मां के पावन गाढ़े दूध की,चलो चीन से अपनी चौकी, चाँदी

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हिंदी संग्रह कविता-खड़ा हिमालय बता रहा है

हिंदी कविता

खड़ा हिमालय बता रहा है खड़ा हिमालय बता रहा है, डरो न आँधी पानी में।खड़े रहो अपने ही पथ पर, कठिनाई – तूफानों में।डिगो न अपने पथ से तो फिर, सब कुछ पा सकते प्यारे।तुम भी ऊँचे हो सकते हो, छू सकते नभ के तारे।अचल रहा जो अपने पथ पर, लाख मुसीबत आने में।मिली सफलता

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डगमग इंसान चले

हिंदी कविता

सारस छंद विधान – इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं , 12,12 मात्रा पर यति होती है ; आदि में विषम कल होता है और 3,4,9,10,15,16,21,22 वीं मात्राएँ अनिवार्यतः लघु 1 होती हैं ।
मापनी:–2112 2112 , 2112 2112

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हिंदी संग्रह कविता-हम अर्चना करेंगे

हिंदी कविता

हम अर्चना करेंगे हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्मभूमि भारत,हे वन्दनीय भारत, अभिनन्दनीय भारत,जीवन सुमन चढ़ाकर, आराधना करेंगे,तेरी जनम-जनम भर, हम वन्दना करेंगे। हम अर्चना करेंगे…. महिमा महान् तू है, गौरव निधान तू है,तू प्राण है, हमारी जननी समान तू है,तेरे लिए जिएँगे, तेरे लिए मरेंगे,तेरे लिए जनम भर, हम साधना करेंगे। हम अर्चना करेंगे… जिसका

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हिंदी संग्रह कविता-वह जीवन भी क्या जीवन है

समाज और यथार्थ

वह जीवन भी क्या जीवन है वह जीवन भी क्या जीवन है, जो काम देश के आ न सका।वह चन्दन भी क्या चन्दन है, जो अपना वन महका न सका। जिसकी धरती पर जन्म लिया, जिसके समीर से श्वास चलीजिसके अमृत से प्यास बुझी, जिसकी माटी से देह पली। वह क्या सपूत जो जन्मभूमि के,

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