कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

हिंदी संग्रह कविता-हमारे प्यारे हिन्दुस्तान

हिंदी कविता

हमारे प्यारे हिन्दुस्तान हमारे प्यारे हिन्दुस्थान, हमारे भारतवर्ष महान ॥जननी तू जन्मभूमि है, तू जीवन तू प्राण ।तू सर्वस्व शूरवीरों का, जगती का अभिमान ॥ हमारे प्यारे उष्ण रक्त अगणित अरियों का, बार-बार कर पान।चमकी है कितने युद्धों में, तेरी तीक्ष्ण कृपाण ॥ हमारे प्यारे जौहर की ज्वाला में जिनकी, थी अक्षय मुस्कान।धन्य वीर बालाएँ […]

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हिंदी संग्रह कविता-हम सब भारतवासी हैं

हिंदी कविता

हम सब भारतवासी हैं हम पंजाबी, हम गुजराती, बंगाली, मद्रासी हैं,लेकिन हम इन सबसे पहले केवल भारतवासी हैं।हम सब भारतवासी हैं। हमें प्यार आपस में करना पुरखों ने सिखलाया है,हमें देश-हित, जीना-मरना, पुरखों ने सिखलाया है!हम उनके बतलाये पथ पर, चलने के अभ्यासी हैं!हम सब भारतवासी हैं! हम बच्चे अपने हाथों से, अपना भाग्य बनाते

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हिंदी संग्रह कविता-हम करें राष्ट्र-आराधन

हिंदी कविता

हम करें राष्ट्र-आराधन हम करें राष्ट्र-आराधन, तन से, मन से, धन से।तन, मन, धन, जीवन से, हम करें राष्ट्र-आराधन॥ अंतर से, मुख से, कृति से, निश्चल हो निर्मल मति से।श्रद्धा से, मस्तक -नत से, हम करें राष्ट्र-अभिवादन ।। अपने हँसते शैशव से, अपने खिलते यौवन से।प्रौढ़तापूर्ण जीवन से, हम करें राष्ट्र का अर्चन ।। अपने

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हिंदी संग्रह कविता- सुना रहा हूँ तुम्हें भैरवी

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सुना रहा हूँ तुम्हें भैरवी सुना रहा हूँ तुम्हें भैरवी जागो मेरे सोने वाले!जब सारी दुनिया सोती थी तब तुमने ही उसे जगायादिव्य गान के दीप जलाकर तुमने ही तम दूर भगाया,तुम्हीं सो रहे, दुनिया जगती यह कैसा मद है मतवाले। गंगा-यमुना के कूलों पर, सप्त सौध थे खड़े तुम्हारे,सिंहासन था, स्वर्ण छत्र था, कौन

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हिंदी संग्रह कविता- वही देश है मेरा

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वही देश है मेरा वही देश है मेरा,वही देश है मेरा। द-ऋचाओं में गूंजा है,जिसका अम्बर नीला।जहाँ राम घनश्याम कर गए,युग-युग अद्भुत लीला।जहाँ बांसुरी बजी ज्ञान की, जागा स्वर्ण सवेरा।वही देश है मेरा.. जहां बुद्ध ने सत्य-अहिंसाका था अलख जगाया।गुरु नानक ने विश्वप्रेम काराग जहाँ सरसाया।मेरे-तेरे भेद-भाव का मन से मिटा अँधेरा।वही देश है मेरा..

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हिंदी संग्रह कविता- राष्ट्र की जय

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राष्ट्र की जय राष्ट्र की जय चेतना का, गान वन्दे मातरम्राष्ट्र भक्ति प्रेरणा का, गान वन्दे मातरम् । बंसी के बजते स्वरों का, प्राण वन्दे मातरम्झल्लरी झंकार झनके, नाद वन्दे मातरम् ।शंख के संघोष का, संदेश वन्दे मातरम्। राष्ट्र भक्ति. सृष्टि बीज मंत्र का है, मर्म वन्दे मातरम्राम के वनवास का है, काव्य वन्दे मातरम्दिव्य

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हिंदी संग्रह कविता- जय जय भारत

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जय जय भारत जय जय भारत, जन-मन अभिमतजन-गण-तन्त्र विधाता। गौरव-भाल-हिमाचल उज्ज्वलहृदय-हार गंगा-जल,कटि विन्ध्याचल, सिन्धु चरण-तलमहिमा शाश्वत गाता। हरे खेत, लहरें नद-निर्झरजीवन-शोभा उर्वर,विश्व कर्मरत कोटि बाहु-करअगणित पद ध्रुव पथ पर। प्रथम सभ्यता-ज्ञाता, साम-ध्वनित गुण-गाथा,जय नव-मानवता-निर्मातासत्य-अहिंसा-दाता।जय हे! जय हे ! जय हे! शांति-अधिष्ठाता। जन-गण-तन्त्र विधाता।प्रयाण तूर्य बज उठे,पटह तुमुल गरज उठे,विशाल सत्य-सैन्य, लौह-भुज उठे। शक्ति-स्वरूपिणि, बहुबलधारिणि, वंदित

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हिंदी संग्रह कविता- जन्मभूमि पर कविता

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जन्मभूमि पर कविता जहाँ जन्म देता हमें है विधाताउसी ठौर में चित्त है मोद पाता। जहाँ हैं हमारे पिता-बंधु-माता,उसी भूमि से है हमें सत्य नाता। जहाँ की मिली वायु है जन्मदानी,जहाँ का बिंधा देह में अन्न-पानी। भरी जीभ में है जहाँ की सुबानी,वही जन्म की भूमि है भूमि-रानी। कहीं जा बसे चाहता किन्तु जी है,रहे

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हिंदी संग्रह कविता-कोटि-कोटि कंठों ने गाया

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कोटि-कोटि कंठों ने गाया कोटि-कोटि कंठों ने गाया, माँ का गौरव गान है,एक रहे हैं एक रहेंगे, भारत की संतान हैं। पंथ विविध चिंतन नाना विधि बहुविधि कला प्रदेश की,अलग वेष भाषा विशेष है, सुन्दरता इस देश की।इनको बाँट-बाँटकर देखें, दुश्मन या नादान हैं। कोटि-कोटि मझायेंगे नादानों को, सोया देश जगायेंगे।दुश्मन के नापाक इरादे, जड़

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हिंदी संग्रह कविता-फिर से नवजीवन का विहान

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फिर से नवजीवन का विहान जग-जीवन में जो चिर-महान्,सौन्दर्य-पूर्ण औ’ सत्य-प्राण मैं उसका प्रेमी बनूँ, नाथ,जो हो मानव के हित समान। जिससे जीवन में मिले शक्ति,छूटे भय, संशय, अंधभक्ति, मैं वह प्रकाश बन सकूँ, नाथ,मिल जाएँ जिसमें अखिल व्यक्ति। पाकर प्रभु, तुमसे अमर दान,करने मानव का परित्राण, ला सकूँ विश्व में एक बार,फिर से नवजीवन

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जाने कैसे मैं ससुराल चली जाऊंगी

हिंदी कविता

जाने कैसे मैं ससुराल चली जाऊंगी कितना मुश्किल होगा ना तुम्हें भूल जानायादों में तुम्हें लेके किसी और का हो जानाएक पल के लिए भी तुझे न भूल पाऊंगीजाने मैं कैसे ससुराल को चली जाऊंगी छोटी छोटी बातों पर मेरा हमेशा रूठ जानायाद आएगा मुझे तुम्हारे साथ यूं घूमने जानातू जो पुकारे एक बार मुझे

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जीवन नहीं मरा करता है – गोपाल दास नीरज

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जीवन नहीं मरा करता है-गोपाल दास नीरज छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालोंकुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है। सपना क्या है, नयन सेज परसोया हुआ आँख का पानीऔर टूटना है उसका ज्योंजागे कच्ची नींद जवानीगीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालोंकुछ पानी के बह जाने से, सावन

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