जाने तुम कहां गए
हिंदी कविताजाने तुम कहां गए – मेरी रचना अरमानों से सींच बगिया,जाने तुम कहां गए।अंगुली पकड़ चलना सीखाकर,जाने तुम कहां गए।। सच्चाई के पथ हमको चलाकर,जाने तुम कहां गए।हमारे दिलों में घर बनाकर,जाने तुम कहां गए।। तुम क्या जानो क्या क्या बीती,तुम्हारे बनाए उसूलों पर।। वृद्धाश्रम में मां को छोड़ा,बेमेल विवाह मेरा कराया।छोटे की पढ़ाई छुड़ाकर,फैक्ट्री […]

