सच बताना
हिंदी कवितासच बताना सच बतानाबातें न बनानान मुंह चिढ़ानाऔर हाँ!मुझे नहीं पसंद तुम्हारा गिडगिडाना कि मेरे मरने के बादतुम्हे मेरी सदा भी आएगीकौन सी बात तुम्हे रुलाएगी मुझे पता हैमेरे मरने के बाद भीमैं थोडा बनी रहूंगी जैसे रह जाती हैखंडहर होते मंदिर मेंकभी गूंजी नूपुरों की झंकार सुबह के चौंधियाते उजाले मेंठिठका चंद्रमा रहूंगी तुम्हारे
