कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

निषादराज के दोहे : जय गणेश 

हिंदी कविता

निषादराज के दोहे जय गणेश  जय गणेश जय गजवदन,कृपा सिंधु भगवान।मूसक वाहन  दीजिये, ज्ञान बुद्धि वरदान।।01।। शिव नंदन गौरी तनय, प्रथम पूज्य गणराज।सकल अमंगल को हरो,पूरण हो हर काज।।02।। हाथ जोड़ विनती करूँ, देवों के सरताज।भव बाधा सब दूर हो,ऋद्धि सिद्धि गणराज।।03।। मंगलकारी देव तुम,मंगल करो गणेश।जग वंदन तुम्हरे करें,काटो सबका क्लेश।।04।। गिरिजा पुत्र गणेश

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वोट -विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

वोट- विनोद सिल्ला तेरा वोट उन्हेंबैठा देगासिंहासन परलगा देगाउनकी गाड़ी परलाल बत्तीवो अपनों कोठेके दिलवाएंगेआला अधिकारियों कीकसरत करवाएंगेलूट-लूट के वतन को खाएंगेपूरे पाँच सालबदले मेंतुझे क्या मिलेगाबस एक बोतल शराबजिसका नशामतदान के तुरंत बादउतर जाएगा. -विनोद सिल्ला©

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सखी रे तीज पर्व आया है( दूजराम साहू)

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सखी रे तीज पर्व आया है सखी रे तीज पर्व आया है,भाई उपहार लाया है !गुँज रहीं सारी गलियाँ,बचपन याद आया है !! बरसों बाद मिलीं सखियाँ ,पुरानी बातें याद आयी !हँसी – ठिठोली कर रही है,देखों फिर बचपन आया है !! ये पावन पर्व आया है,भाई घर मनाना है !सदा सुहागन की आशीषपरमेश्वर से

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हरितालिका तीज – राजेश पान्डेय वत्स

नारी जीवन और संवेदना

हरितालिका तीज!(घनाक्षरी) भाद्रपद शुक्ल पक्ष, पावन तृतीया तिथि,पूजन निर्जला ब्रत,रखें नारी देश के! माता रूप मोहनी सी, श्रृँगारित सोहनी सी,उम्र यश लंबी माँगे,अपने प्राणेश के! दृढ़वती धर्मधारी, सुहागिन या कुँवारी,वर लेती यदि मानें, ग्रंथों के आदेश के! मुदित मधुर मन, शिव गौरी आराधना,श्रद्धा लिये वत्स कल, पूजा फिर गणेश के! –राजेश पान्डेय वत्स!0821(हरितालिका तीज २०७७)

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खुशबु-विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

खुशबु फूलों मेंहोती है खुशबुनहीं होती फूलों में हीहोती हैकुछ व्यक्तियों केव्यवहार में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों केकिरदार में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों केस्वभाव में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों कीप्रवृत्ति में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों कीवाणी में भीलेकिनउपरोक्त खुशबु के स्वामीसभी नहीं होते -विनोद सिल्ला©

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 9

हिंदी कविता

हाइकु अर्द्धशतक भाग 9 ४०१/शम्मी के पेड़धनिष्ठा वसु व्रतमंगल स्वामी ४०२/मंडलाकारसौ तारे शतभिषाराहु की दशा। ४०३/ रोपित करेंपूर्व भाद्रपद मेंआम्र का वृक्ष। ४०४/मांस का दानउत्तरा भाद्रपदपूजा निम्ब के । ४०५/कांसे का दानरेवती पूषा व्रतमहुआ पूजा। ४०६/श्रीराम जन्मअभिजीत जातकहै भाग्यशाली ।   ४०७/ सांध्य का ताराशुक्र बन अगुआलड़े अंधेरा । ४०८/तरू की मुट्ठीधंस चली धरा मेंबचाने

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 8

हिंदी कविता

हाइकु अर्द्धशतक ३५१/ धरा की तापहरते मौन वृक्षतप करते ३५२/ झुलस जायेतन मन जीवनऐसी तपन। ३५३/ है ऐसी धुपनैन चौंधिया जायेतेजस्वरूप । ३५४/   लू की कहरखड़ी दोपहर में  धीमा जहर ३५५/मेघ गरजेबिजली सी चमकेरूष्ट हो जैसे । ३५६/बादल छायाएकाकार हो गयेधरा अंबर। ३५७/मेघ ढाल सा।बिजली की कटारबूंदों की बौछार । ३५८/मेघ घुमड़ेबारिश की चादरधरती

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 7

समाज और यथार्थ

हाइकु अर्द्धशतक ३०१/आज के नेताहै जनप्रतिनिधिनहीं सेवक। ३०२/है तू आजादबचा नहीं बहानातू आगे बढ़। ३०३/.मित्र में खुदाकरे निस्वार्थ प्रेमरिश्ता है जुदा। ३०४/ छाया अकालजल अमृत बिनधरा बेहाल। ३०५/ सांध्य सिताराशुक्र बन अगुआलड़े अंधेरा। ३०६/ स्वाभिमान हीसबसे बड़ी पूंजीजीवन कुंजी। ३०७/ बानी हो मीठीचुम्बकीय खिचावशीतल छांव। ३०८/ प्रेरणा पथखुला पग पग मेंपरख चल। ३०९/अच्छे करमपरलोक संपत्तिजीवन

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 6

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु अर्द्धशतक २५१/ रात की सब्जी~जय वीरू की जोड़ीआलू बैंगन। २५२/ पंचफोरन~बैंगन की कलौंजीप्लेट में सजा। २५३/ बाजार सजा~डलिया में बैंगनइतरा रहा। २५४/ सब्जी का राजा~(बैंगन)ताज भांति सिर मेंडंठल सजा।   २५५/ रात की सब्जी~जय वीरू की जोड़ीआलू बैंगन। २५६/ पंचफोरन~बैंगन की कलौंजीप्लेट में सजा। २५७/ विषम दशा~साहसी नागफनीजीके दिखाता। २५८/ जुदा कुरूप~गमला में सजतामैं

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 5

हिंदी कविता

हाइकु अर्द्धशतक २०१/ प्रभात बेला~   शहर में सजती रंगीन मेला। २०२/ हिलते पात~ दिवस सुधि लेते आई प्रभात। २०३/ खनिज खान~पठार की जमीनचौड़ा सपाट। २०४/रूई बिछौना~पामीर के पठारसंसार छत। २०५/ फंसा पतंगा फूल की लालच में लोभ है जाल। २०६/ पिरो के रखा~   एकता के सूत्र में अंतरजाल।   २०७/ बारिश बूंदें~उगी है

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 4

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु अर्द्धशतक १५१/ शांत तालाबपाहन की चोट सेबिखर चला। १५२/ मुस्कुरा गईनव वधु के लबमैका आते ही। १५३/ बच्चे मायुसबिजली आते उठीखुशी लहर। १५४/ अपनी सीमाकमजोरी तो नहींप्रभाव जमा। १५५/ बाल संवारेदीदी आज भाई कासहज प्रेम १५६/ भूले बिसरेयादों में झिलमिलअसल पूंजी। १५७/ आकाश गंगातारों की टिमटिमतम की आस। १५८/ भीषण शीतलब गुंजित करेशास्त्रीय गीत।

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 3

प्रकृति और पर्यावरण

हाइकु अर्द्धशतक १०१/ विकासशीलजगत का नियमहरेक पल १०२/अनुकूलनअस्तित्व का बचावकर पहल १०३/वातावरणकरता प्रभावितचल संभल १०४/ बच्चों के संगमिल जाती खुशियाँअपरम्पार।   १०५/ जीवन कमसमय फिसलताख्वाब हजार। १०६/ सूक्ष्म शरीरमन की चंचलताचांद के पार। १०७/ सर्वसमतानेकी बदी की छायाहरेक द्वार। १०८/ शहर शोरहो जुदा तू कर लेमौन विहार। १०९/ स्वर्ण बिछौना बिछाये धरा पररवि की रश्मि। ११०/

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