कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

बलात्कार पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

बलात्कार पर कविता हो रहे इन बलात्कारों का सबसे बड़ा जिम्मेदार।फिल्म, सीरियल मीडिया और विज्ञापन बाजार। अर्धनग्न तस्वीरों को मीडिया और इंटरनेट परोसता है।बालमन छुप-छुपकर इसमें ही अपना सुख खोजता है। फिल्मी गानें और नाच बच्चों को उकसाते हैं।विज्ञापन में नारी देह ही बार-बार दिखाते हैं। कमतर कपड़ों में दिखाते अश्लील आईटम डाँस।नैतिकता को छोड़

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अपराधी इंसान पर कविता- R R Sahu

हिंदी कविता

अपराधी इंसान पर कविता सभी चाहते प्यार हैं,राह मगर हैं भिन्न।एक झपटकर,दूसरा तप करके अविछिन्न।। आशय चाल-चरित्र का,हमने माना रूढ़।इसीलिए हम हो गए,किं कर्तव्य विमूढ़।। स्वाभाविक गुण-दोष से,बना हुआ इंसान।वही आग दीपक कहीं,फूँके कहीं मकान।। जन्मजात होता नहीं,अपराधी इंसान।हालातों से देवता या बनता हैवान।। भय से ही संभव नहीं,हम कर सकें सुधार।होता है धिक्कार से,अधिक

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तुम धरा की धुरी -एल आर सेजु थोब ‘प्रिंस’

नारी जीवन और संवेदना

तुम धरा की धुरी नारी तुम धरा की धुरीतुम बिन सृष्टि अधूरीमूरत तुम नेह स्नेह, वात्सल्यतुम ममतामयी, तुम करुणानिधि । माँ, बहन, बेटी और पत्नीतुम हर रूप की अवतारीचली हर कदम पुरुष के साथबन जीवन रथ की धुरी । त्याग व प्रेम की सूरत सीतुम मूरत हो प्यारीतुम से शुरू तुम पर ही खत्मतुम हो

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तदबीर पर कविता – RR Sahu

हिंदी कविता

तदबीर पर कविता रो चुके हालात पे,मुस्कान की तदबीर सोचो,रूह को जकड़ी हुई है कौन सी जंजीर सोचो। मुद्दतें गुजरीं अँधेरों को मुसलसल कोसने में,रौशनी की अब चिरागों में नई तकदीर सोचो। जुल्मतों ने हर कदम पे जंग के अंदाज बदले,तुम फतह के वास्ते क्या हो नई शमसीर सोचो। कामयाबी के लिए हैं कौन से

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कलयुग के पापी -राजेश पान्डेय वत्स

हिंदी कविता

कलयुग के पापी भूखी नजर कलयुग के पापीअसंख्य आँखों में आँसू ले आई! लालची नजर *सूर्पनखा* कीइतिहास में नाक कटा आई!! मैली नजर *जयंत काग* केनयन एक ही बच पाई!!! बिना नजर के *सूरदास* को*कृष्ण-लीला* पड़ी दिखाई!! नजर में श्रद्धा *मीरा* भरकरतभी गले विष उतार पाई!! तीसरी नजर *शिवशंम्भु* की*कामदेव* को पड़ी न दिखाई!! तकती

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रजनी पर कविता- डा. नीलम की कविता

हिंदी कविता

रजनी पर कविता तारा- जड़ित ओढ़े ओढ़नीधीरे धीरे चाँदनी की नदी में ऐसे उतर रहीजैसे कोई सद्य ब्याहताओढ़ चुनरिया सजना कीसाजन की गलियों मेंधीमे धीमे पग रखतीससुराल की दहलीज़ चली खामोशी में झिंगूरों की झिमिर झिमिर का संगीतकानों में यूं रस घोलेजैसे दुल्हनिया के बिछुए-पायल के घूंघर रुनझुन-रुनझुन पिया के हिय मेंप्रेम- रस घोले ।

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नारी की व्यथा पर कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

महिला (स्त्री, औरत या नारी) मानव के मादा स्वरूप को कहते हैं, जो स्त्रीलिंग है। महिला शब्द मुख्यत: वयस्क स्त्रियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। किन्तु कई संदर्भो में यह शब्द संपूर्ण स्त्री वर्ग को दर्शाने के लिए भी प्रयोग मे लाया जाता है, जैसे: नारी-अधिकार।  नारी की व्यथा पर कविता बरसों पहले आजाद हुआ देशपर अब भी बेटी आजाद

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आर आर साहू के दोहे

हिंदी कविता

आर आर साहू के दोहे ईश प्रेम के रूप हैं,ईश सनातन सत्य।अखिल चराचर विश्व ही,उनका लगे अपत्य ।। कवि को कब से सालती,आई है पर पीर।हम निष्ठुर,पाषाण से,फूट पड़ा पर नीर।। क्रूर काल के कृत्य की,क्रीड़ा कठिन कराल।मानव का उच्छ्वास है,या फुँफकारे व्याल।। लेश मात्र करुणा कभी,जाती छाती चीर।अब वो छाती मर गई,मत रो दास

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त्याग और विश्वास जहाँ हो सच्चा प्रेम वही है- डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

सच्चा प्रेम वही प्रेम करो निस्वार्थ भाव सेस्वार्थ प्रेम नही है।त्याग और विश्वास जहाँ होसच्चा प्रेम वही है।। बिना प्रेम के ये जीवन हीलगता सूना सूना ।प्रेम होय यदि जीवन में तोविश्वास बढे दूना।। ईश्वर की स्वाभाविक कृति हैप्रेम कृत्रिम नही है।प्रेम में होती उन्मुक्ततास्वच्छन्दता नही है।। प्रेम बस देना जानता हैनाम नहीं लेने का।आकंठ

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दर्द कागज़ पर बिखरता चला गया

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द कागज़ पर बिखरता चला गया दर्द कागज़ पर बिखरता चला गयारिश्तों की तपिश से झुलसता चला गयाअपनों और बेगानों में उलझता चला गयादर्द कागज़ पर बिखरता चला गया कुछ अपने भी ऐसे थे जो बेगाने हो गए थेसामने फूल और पीछे खंजर लिए खड़े थेमै उनमें खुद को ढूंढता चला गयादर्द कागज़ पर बिखरता

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आधुनिक शिक्षा पर कविता

हिंदी कविता

आधुनिक शिक्षा पर कविता                             सिसक-सिसक कर रोती है बचपन !  आधुनिक शिक्षा की बोझ ढोती है बचपन!!          पढ़ाई की इस अंधाधुंध दौर में ,बचपन ना खिलखिलाता अब भोर में सुबह से लेकर शाम तक,  पढ़ते-पढ़ते जाते हैं थक ,  खिलने से पहले मुरझा

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नारी पर आधारित कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी पर आधारित कविता नारी जगत का सार     नारी सृष्टि काआधार         जननी वो कहलाती              मान उसे दीजिये।।             ???नारी ईश्वर का रूप     उसकी शक्ति अनूप         देती है सबको प्यार              उसे खुश कीजिये।। 

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