नारी पर आधारित कविता
नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कवितानारी पर आधारित कविता नारी जगत का सार नारी सृष्टि काआधार जननी वो कहलाती मान उसे दीजिये।। ???नारी ईश्वर का रूप उसकी शक्ति अनूप देती है सबको प्यार उसे खुश कीजिये।।
नारी पर आधारित कविता Read More »
नारी पर आधारित कविता नारी जगत का सार नारी सृष्टि काआधार जननी वो कहलाती मान उसे दीजिये।। ???नारी ईश्वर का रूप उसकी शक्ति अनूप देती है सबको प्यार उसे खुश कीजिये।।
नारी पर आधारित कविता Read More »
ताजमहल पर कविता मौत भी मिटा नहीं सकी ,मन में रहे यादें हर पल ,भारत के आगरा में बना ,भव्य आकर्षक ताजमहल । फैली है इसकी खूबसूरती ,देख सकते जहां तक ,सात आश्चर्य में से एक ,सुंदरता इसकी है आकर्षक, विस्तृत क्षेत्र में
ताजमहल पर कविता -शशिकला कठोलिया Read More »
सेवा पर कविता सेवा वंचित मत रहो,तन मन दीजे झोकसेवा मे सुख पाइए,नहीं लगाओ रोक ।।1।। जो सेवा संपन्न है ,देव अंश तू जान ।इनके दर्शन मात्र से ,मिलते कई निदान ।।2।। सेवा का व्यापार कर ,बनते आज अमीर ।पीड़ित जन सब मूक हैंसाहब तुम बेपीर ।।3।। सेवा कुर्बानी चहैकरे अहं का नाश ।सो अपनाये
माधुरी मंजरी- हिंदी काव्य Read More »
किसे कहूं दर्द मेरा किसे कहूं दर्द मेराओ मेरे साजनलगे सब कुछ सुना सुना सातुम बिन छाई मायूसीकाटने को दौड़ते हैं ये लम्हेहर पल, पल पल भीवीरान खण्डहर की तरहछाया काली जुल्फों सा अंधेरा बिन तेरे ए हमसफ़र ।सताता हैं अकेलापनहर वक़्त क्षण क्षण भीक्यो जुदा हुए तुम तोड़कर दिल मेराक्यो बना विरह वियोगटूटा वो अनुराग प्याराक्यो
किसे कहूं दर्द मेरा Read More »
पाप-कुण्डलियाँ निर्जन पर्वत में अगर , करो छुपाकर पाप ।आज नहीं तो कल कभी , करें कलंकित आप ।।करें कलंकित आप ,
प्रभु ने ऐसी दुनिया बनाई है- प्रभु ने ऐसी दुनिया बनाई है,कही धूप तो कही गम की परछाई है। रात का राजा देता है पहरा,चांदनी छिटककर मन में समाई है। निशा ने हर रूप है बदले,धरा पर जुगनुओं की बारात आई है। सारी फिजाओ को समेटे आगोश में,अंजुमन में आने को जैसे मुस्काई हैं। समीर
प्रभु ने ऐसी दुनिया बनाई है-माधवी गणवीर Read More »
पेरा ल काबर लेसत हो तरसेल होथे पाती – पाती बर, येला काबरा नइ सोचत हो!ये गाय गरुवा के चारा हरे जी , पेरा ल काबरा लेसत हो !! मनखे खाये के किसम-किसम के, गरुवा बर केठन हावे जी !पेरा भुसा कांदी चुनी झोड़ के, गरुवा अउ काय खावे जी !!धान लुआ गे धनहा खेत
पेरा ल काबर लेसत हो Read More »
तांका की महक बेटी चाहतीमाता पिता की खुशीबहू के लिएसास ससुर बोझतनातनी है रोज बेटी हमारीससुराल क्या गईसास ससुरमांगते हैं दहेजचाहिए कार नई मच्छरों को क्यापाप पुण्य से कामचूसेंगे खूनसभी लोगों का यूं हीजीना करें हराम लापरवाहीहोती खतरनाकसतर्क रहेंध्यान रखें सबकानहीं कोई मजाक पद्म मुख पंडाकविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद
तांका की महक- पद्म मुख पंडा स्वार्थी Read More »
रामराज्य पर कविता / बाँके बिहारी बरबीगहीया सप्तपुरी में प्रथम अयोध्या जहाँ रघुवर अवतार लिए।हनुमत, केवट, गुह , शबरीसुग्रीव को हरि जी तार दिए।गौतम की भार्या अहिल्या कोचरण लगा उद्धार किए ।मारीच, खर- दूषण , बालीऔर रावन का संहार किए ।आज अवधपुरी में रघुवरराजा बन कर फिर से आयो।अवधपुरी में बाजी बधाई रामराज्य फिर से आयो ।।
रामराज्य पर कविता / बाँके बिहारी बरबीगहीया Read More »
एक नया ख्वाब सजायें सपने कभी सुनहले कभी धुंधले सेआँखों के रुपहले पर्दे पर चमकते सेबुन कर उम्मीदों के ताने बानेहम सजाते जाते हैं सपने सुहाने कनकनी होती है तासीर इनकीमुक्कमल नहीं होती हर तस्वीर जिनकीसपनों को नही मिल पाता आकारमन के गर्त में रहते हैं वो निराकार टूटते सपनों की तो बात ही छोड़िये
वर्षा जैन “प्रखर- एक नया ख्वाब सजायें Read More »
प्रदूषण पर आधारित कविता यत्र प्रदूषण तत्र प्रदूषण सर्वत्र प्रदूषण फैला हैखानपान भी दूषित हैवातावरण प्रदूषित है जनसंख्या विस्फोट भी एक समस्या भारी हैजिसके कारण भी होतीप्रदूषण की भरमारी है जल, वायु, आकाश प्रदूषितनभ, धरती, पाताल प्रदूषितमिल कर जिम्मेदारी लेंइस समस्या को दूर भगा लें शतायु होती थी पहलेअब पचास में सिमटी हैये आयु भी अब
कवयित्री वर्षा जैन “प्रखर” प्रदूषण पर आधारित कविता Read More »
मच्छर -अजस्र(दुर्गेश मेघवाल) एक हादसा कल रात हो गया, हो बीमार मैं पस्त पड़ा।मच्छर एक ललकारते हुए, तान के सीना समक्ष खड़ा।मच्छर हूँ मैं ,मुझसे तुम सब,
मच्छर -अजस्र(दुर्गेश मेघवाल) Read More »