कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

पुरानी यादो पर ग़ज़ल

हिंदी कविता

पुरानी यादो पर ग़ज़ल भुला बैठे थे हम जिनको वो अक्सर याद आते हैंबहारों के हसीं सारे वो मंज़र याद आते हैं रहे कुछ बेरहम से हादसे मेरी कहानी केझटक कर ले गए सबकुछ जो महशर याद आते है दिलों में खींच डाली हैं अजब सी सरहदें सबनेहुए रिश्ते मुहब्बत के जो बेघर याद आते

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नोटबंदी पर कविता

हिंदी कविता

नोटबंदी पर कविता सरकार जी आपने की थी नोटबंदीआठ नवंबरसन् दो हजार सोलह कोनहीं थकेआपके चाहने वालेनोटबंदी केफायदे बताते-बतातेनहीं थकेआपके आलोचकआलोचना करते-करतेलेकिन हुआ क्या?पहाड़ खोदने कीखट-खट सुनकरबिल छोड़कर सुदूरचूहा भी भाग निकलाआज है वर्षगांठनोटबंदी कीफायदे बताने वालेनहीं कर रहेनोटबंदी की याद मेंकोई समारोहमात्र आलोचक हैंक्रियाशीलसोशल मिडिया पर।  -विनोद सिल्ला© कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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छत्तीसगढ़ मैया पर कविता -श्रीमती शशिकला कठोलिया,

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ मैया पर कविता जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मैया,सुन लोग हो जाते स्तंभित,राष्ट्रगान सा स्वर है गुजँता,छत्तीसगढ़ का यह राज गीत,नरेंद्र देव वर्मा की अमर रचना,है उसकी आत्मा की संगीत,छत्तीसगढ़िया को बांधे रखता ,यह पावन सुंदर सा गीत ,धरती का शुभ भावों से सिंगार कर,छत्तीसगढ़ माटी का बढ़ाया गौरव,गीत में साकार हो उठता ,समूचे

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इश्क पर कविता-माधवी गणवीर, छत्तीसगढ़

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इश्क पर कविता यू इस तरह न मुंह मोड़ कर चला करो,है इश्क तो जुबां से भी कहा करो। क्यों हाथ मिलाने पर रहते हो आमादा हर वक्त,अजनबी लोगों से थोड़ा फासले से मिला करो। भूल सकते नहीं तेरे अहसास कभी हम,हर राह पर, हर मोड़ पर तुम ही तुम दिखा करो। हर वक्त यूं

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जन्म लेती है कविता- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

जन्म लेती है कविता-  सूरज-सा चिरती निगाहेंसंवेदनाओं से भरी दूरदर्शी निगाहेंअहर्निश हर पलघूमती रहती है चारों ओर दृश्यमान जगत केदृश्य-भाव अनेकसुंदर-कुरूप,अच्छे-बुरे,अमीरी-गरीबी, और भी रंग सारे भावों की आत्माशब्दों की देह धरकरजन्म लेती है कविता। — नरेन्द्र कुमार कुलमित्र     9755852479कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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पंछी की पुकार नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

पंछी की पुकार एक दिनसुबह-सुबहडरा-सहमा छटपटाता चिचिआता हुआ एक पंछीखुले आसमान सेमेरे घर के आंगन में आ गिरा मैंने उसे सहलायापुचकारा-बहलायादवाई दी-खाना दियाकुछेक दिन में चंगा हो गया वह आसमान की ओर इशारा करते हुएमैंने उसे छोड़ना चाहावह पंछीअपने पंजों से कसकरमुझे पकड़ लियासुनी मैंनेउसकी मूक याचनाकह रहा था वह–‘एक पिंजरा दे दो मुझे।’ — नरेन्द्र कुमार

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बाँके बिहारी बरबीगहीया – छठ पर्व आधारित कविता

प्रकृति और पर्यावरण

छठ पर्व आधारित कविता शुक्ल पक्ष पष्ठी  तिथि कोकार्तिक मास में आती है ।सूर्य की प्रिय बहन प्रकृति छठी मईया कहलाती है ।सूर्योपासना का महान पर्व मेंछठी माँ दिव्य रूप दिखाती है।महान व्रत इस छठ पर्व मेंकरतीं छठवर्ती आदित्य का ध्यानप्रभु सविता और छठी मईया कोजगत आज करें दंड प्रणाम ।।  लोक आस्था का यह महापर्वशुद्ध

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अनेकता में एकता कविता- डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

अनेकता में एकता कविता                           (1)हमे वतन  से प्यार है ,भारत  देश  महान।अनेकता में एकता ,  इसकी है पहचान।।इसकी  है  पहचान ,  ये  है  रंग  रंगीला।मिल जाते सबरंग , गुलाबी नीला पीला।।कहे नवलनवनीत ,महिमा बड़ीअपार है।संस्कृतिहै प्राचीन ,हमको इससे प्यार है।।    

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मोर मया के माटी-राजेश पान्डेय वत्स

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मोर मया के माटी छत्तीसगढ़ के माटीअऊ ओकर धुर्रा। तीन करोड़ मनखेसब्बौ ओकर टुरी टुरा।।  धान के बटकी कहाय,छत्तीसगढ़ महतारी। अड़बड़ भाग हमर संगीजन्में येकरेच दुआरी।।  एकर तरपांव धोवय बरआइन पैरी अरपा। महानदी गंगा जईसनखेत म भरथे करपा।।  मया के बोली सुनबे सुघ्घरछत्तीसगढ़ म जब आबे। अही म जनमबे वत्स तैं, मनखे तन जब पाबे।।  —-राजेश

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प्रेम का मर जाना

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प्रेम का मर जाना डॉ सुशील शर्मा प्रेम का मरना ही आदमी का मरना हैजब प्रेम मरा था तोबलि प्रथा सती प्रथा उगी थींप्रेम के मरने पर हीधरती की सीमायें सिमट जातीं है।महाद्वीप ,देश ,प्रदेश ,भाषाओंजाति समुदाय ,मनुष्य ,जानवर का भेद होता है। प्रेम मरता है तोहिटलर ,मुसोलिनी ,औरंगजेबबगदादी ,ओसामा पैदा होते हैं।प्रेम मरता है

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छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर कविता

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छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर कविता चलो नवा सुरुज परघाना हे छत्तीसगढ़ राज्य पायेहनचलो नवा सुरुज परघाना हे !भारत माता के टिकली सहिक….छत्तीसगढ़ ल चमकाना हे !! जेन सपना ले के राज बने हेसाकार हमला करना हे!दिन -दुगनी ,रात -चौगुनीआगे -आगे बढ़ना हे !सरग असन ये भुईया ल….चक- चक ले चमकाना हे!! मिसरी असन भाखा

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