कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

संवेदना के सुर बजे जब वेदना के तार पर

हिंदी कविता

संवेदना के सुर बजे जब वेदना के तार पर संवेदना के सुर बजे               जब वेदना के तार पर।वाल्मिकी की संवेदना जगी                आहत पक्षी चित्कार पर।।१।।प्रथम कविता प्रकट भयी                  खुला साहित्य द्वार पर।कविता का नव सृजन                  पैनी कलम की धार पर।।२।।भिगी पलके अश्रु अक्षर                  शब्द पिरोये काव्य पर ।रामायण का श्रीगणेश                  साहित्य अमर संसार पर।।३।।मर्म हिय […]

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सही दिशा मिल जाए तो

हिंदी कविता

सही दिशा मिल जाए तो उत्साह से परिपूर्ण होते हैं ये बच्चे,सही दिशा मिले ,तो विश्व को बदलते ये बच्चे, 1- प्यारे-दुलारे सबके सहारे होते हैं ये बच्चे,चहकते, खुशियों से भरपूर होते ये बच्चेसब के दुखों को हर लें ऐसे होते ये बच्चेसही दिशा मिल जाए तो, 2- जीवन जीने की कला सिखाते हैं ये

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नहीँ बताई

हिंदी कविता

नहीँ बताई समाचारों मेंअमितभ बच्चन कीलम्बाई भी बताई अटल बिहारी वाजपेयी कीकविताई भी बताई टाटा, बिड़ला, अम्बानी कीकमाई भी बताई मोदी की लाखों के सूट कीसिलाई भी बताई नेहरु के कपड़ों कीधुलाई भी बताई संजय दत्त की जेल सेरिहाई भी बताई पक्ष-विपक्ष की संसद मेंखिंचाई भी बताई परन्तु गरीबों की भुखमरी सेलड़ाई नहीं बताई -विनोद

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भगवान परशुराम पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण

भगवान परशुराम पर कविता त्रेतायुग के अयाचक ब्राह्मणभगवान विष्णु के छठे अंशावतारतुझे पाकर हे भार्गवधन्य हुआ संसार ।।भृगुवंश की माता रेणुकापिता जिनके जमदग्निसाक्षात प्रभु हे गुरू श्रेष्ठहे हवन कुंड की अग्नि ।।विधुदभि नाम के परशुधारीहे भृगुश्रेष्ठ अमित बलशालीसृष्टि के हरेक जीवों का हे भगवनकरते हो रखवाली ।।भृगुऋषि के महान शिष्यहे पिता के आज्ञाकारीमहाकाल भी जिनके

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परशुराम जयंती पर रचना

हिंदी कविता

परशुराम जयंती पर रचना हे ! विष्णु के छठवें अवतारी, जगदग्नि रेणुका सुत प्यारे ।तुम अजय युद्ध रण योद्धा हो,जिनसे हर क्षत्रिय रण हारे ।।भृगुवंशी हो तुम रामभद्रब्राम्हण कुल में तुम अवतारीतुम मात पिता के परम भक्तजाए तुम पर दुनिया वारीतुम कहलाए शिव परम भक्त,सब काम लोभ तुमसे हारे ।।तुम अजय युद्ध रण योद्धा हो,जिनसे

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पालन अपना कर्म करो

प्रकृति और पर्यावरण

पालन अपना कर्म करो पाया जीवन है मनुष्य का,पालन अपना कर्म करो ।जीव जंतुओं पशु पक्षी पर, व्यहार को अपने नर्म करो ।।जल प्रथ्वी से खत्म हो रहा ।और पारा बढ़ता गर्मी का ।।जीवों पर संकट मंडराए ।रहा अंश ना नरमी का ।।दया नही आती जीवों पार,कुछ तो थोड़ी शर्म करो ।।जीव जंतुओं पशु पक्षी

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हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया

हिंदी कविता

हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।तोर हाँथ जोरत हँव तोर पाँव परत हँव आगी झन बरसा।।चिरई चिरगुन के खोंधरा तिप गे अंड़ा घलो घोलागे।नान्हे चिरई उड़े बर सीखिस ड़ेना ओकर भुंजागे।रूख राई जम्मो झवांगे अतका झन अगिया।हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।बेंदरा भालू पानी पिये बर बस्ती भीतर खुसरगे।हिरन

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मुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता है

हिंदी कविता

मुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता है जिसे चाहो नज़र से वो ही अक्सर दूर होता हैमुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता हैबुलंदी चाहता पाना हरिक इंसान है लेकिनमुकद्दर साथ दे जिसका वही मशहूर होता है । सभी के हाथ उठते हैं इबादत को यहाँ लेकिनख़ुदा को किसका जज़्बा देखिये  मंजूर होता है।उलटते

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गर्दिश में सितारे हों

हिंदी कविता

गर्दिश में सितारे हों गर्दिश में सितारे हों जिसके, दुनिया को भला कब भाता है,वो लाख पटक ले सर अपना, लोगों से सज़ा ही पाता है। मुफ़लिस का भी जीना क्या जीना, जो घूँट लहू के पी जीए,जितना वो झुके जग के आगे, उतनी ही वो ठोकर खाता है। ऐ दर्द चला जा और कहीं,

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प्यार का पहला खत पढ़ने को

हिंदी कविता

प्यार का पहला खत पढ़ने को प्यार का पहला खत पढ़ने को* तड़पी है यारी आँखें,पिया मिलन की* चाह में अक्सर रोती है सारी आँखें। सुधबुध खोकर जीता जिसने प्रीत का* रास्ता अपनायाप्रेम संदेशा पहुँचाये* वो जन – जन तक प्यारी आँखें। कठिन डगर पनघट की जिसने समझा अक्सर दूर रहाहै* लक्ष्य भेदने में सक्षम

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नज़र आता है

हिंदी कविता

नज़र आता है हर अक्स यहाँ बेज़ार नज़र आता है,हर शख्स यहां लाचार नज़र आता है। जीने की आस लिए हर आदमी अब,मौत का करता इंतजार नज़र आता है। काम की तलाश में भटकता रोज यहाँहर युवा ही बेरोजगार नज़र आता है। छाप अँगूठा जब कुर्सी पर बैठा तब,पढ़ना लिखना बेकार नज़र आता है। भूखे

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हर पल मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता है

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मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता है हर पल मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता हैदेखे कितने मंजर हमने तू ही दिल को भाता हैना जानूं क्यूं खुद पे मेरा लगता अब अधिकार नहीआईना अब मैं जब भी देखूं तेरा मुखड़ा आता है ||दिल की वादी में तू रहती या दिल

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