मनुष्य पर कविता
मनुष्य रचना के आधार से मानवीय जीवन मूल्य तथा दो मनुष्यों के बीच मनुष्यता का बोध उठाने का विचार मनुष्य शीर्षक द्वारा प्रकट करना चाहती हूं।
मनुष्य रचना के आधार से मानवीय जीवन मूल्य तथा दो मनुष्यों के बीच मनुष्यता का बोध उठाने का विचार मनुष्य शीर्षक द्वारा प्रकट करना चाहती हूं।
नारियल एक बहुवर्षी एवं एकबीजपत्री पौधा है। इसका तना लम्बा तथा शाखा रहित होता है। मुख्य तने के ऊपरी सिरे पर लम्बी पत्तियों का मुकुट होता है। ये वृक्ष समुद्र के किनारे या नमकीन जगह पर पाये जाते हैं। इसके फल हिन्दु | हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होता है। बांग्ला में इसे नारिकेल … Read more
मेरा भारत देश महान (16-15 मापनी नवगीत) पाटी पर खड़िया से लिख दूँमेरा भारत देश महान।पढ़ लिख कर मैं कवि बन गाऊँभारत माता के गुणगान।। बाबा चिन्ता मत कर मेरीलौटेंगे बीते दिन रीतदिनकर बनकर गीत लिखूँगाछंद लिखूँगा माँ की प्रीत गाएँगे सब शाम सवेरेऐसी लिखूँ तिरंगा तान।पाटी……………….,..।। पोथी कलम दिलाना मुझकोकुछ ही दिन बस सहने … Read more
मन पर कविता (१६,१६) मानव तन में मन होता है,जागृत मन चेतन होता है,अर्द्धचेतना मन सपनों मे,शेष बचे अवचेतन जाने,मन की गति मन ही पहचाने। मन के भिन्न भिन्न भागों में,इड़, ईगो अरु सुपर इगो में।मन मस्तिष्क प्रकार्य होता,मन ही भटके मन की माने,मन की गति मन ही पहचाने। मन करता मन की ही बातें,जागत … Read more
दर्द न जाने कोय….. बाल भिक्षु पर कविता(विधाता छंद मुक्तक) झुकी पलकें निहारें ये,रुपैये को प्रदाता को।जुबानें बन्द दोनो की,करें यों याद माता को। अनाथों ने, भिखारी नें,तुम्हारा क्या बिगाड़ा है,दया आती नहीं देखो,निठुर देवों विधाता को। बना लाचार जीवन को,अकेला छोड़ कर इनको।गये माँ बाप जाने क्यों,गरीबी खा गई जिनको। सुने अब कौन जो … Read more