भग्नावशेष

हिंदी कविता

भग्नावशेष ये भग्नावशेष है।यहाँ नहीं था कोई मंदिरन थी कोई मस्जिद ।न ही यह किसी राजे महाराजों  कीमुहब्बत का दिखावा था।यहाँ नहीं कोई रंगमहलन ही दीवाने आमदीवाने खास। न ही स्नानागार न स्विमिंग पूल।न खिड़की न झरोखे।न झालरें।न कुर्सियाँ न सोफे।बंदूकें न तोपें।यहाँ कभी गूँजी नहीं घोड़ों की टापें।यहाँ खूँटों में बंधते थे बैल और

भग्नावशेष Read More »

बसंत आया दूल्हा बन

हिंदी कविता

बसंत आया दूल्हा बन      बसंत आया दूल्हा बन,बासंती परिधान पहन।उर्वी उल्लासित हो रही,उस पर छाया है मदन।। पतझड़ ने खूब सताया,विरहा में थी बिन प्रीतम।पर्ण-वसन सब झड़ गये,किये क्षिति ने लाख जतन।। ऋतुराज ने उसे मनाया,नव कोपलें ,नव पल्हव।फिर से बनी नव यौवना ,मही मनमुदित है मगन।। वसुंधरा पर हर्ष छाया ,सभी मना

बसंत आया दूल्हा बन Read More »

ऋतुराज बसंत

प्रकृति और पर्यावरण

ऋतुराज बसंत ऋतुराज बसंत प्यारी-सी आई,पीले पीले फूलों की बहार छाई।प्रकृति में मनोरम सुंदरता आई,हर जीव जगत के मन को भाई। वसुंधरा ने ओढ़ी पीली चुनरिया,मदन उत्सव की मंगल बधाइयाँ ।आँगन रंगोली घर द्वार सजाया,शहनाई ढ़ोल संग मृदंग बजाया । बसंत पंचमी का उत्सव मनाया,माँ शारदे को पुष्पहार पहनाया।पुष्प दीप से पूजा थाल सजाया,माँ की

ऋतुराज बसंत Read More »

ऋतुराज का आगमन

प्रकृति और पर्यावरण

ऋतुराज का आगमन ऋतुराज बसंत लेकर आयेवसंत पंचमी, शिवरात्रि और होलीआ रही पेड़ों के झुरमुट सेकोयल की वो मीठी  बोली । बौरों से लद रहे आम वृक्षहै बिखर रही महुआ की गंधनव कोपल से सज रहे वृक्षचल रही वसंती पवन मंद । पलाश व सेमल के लाल-लाल फूलभँवरे मतवाले का मधुर गानसौन्दर्य बिखेरती मौसम सुहावनाऔर

ऋतुराज का आगमन Read More »

सुंदर पावन धरा भारती

हिंदी कविता

सुंदर पावन धरा भारती सुंदर पावन धरा भारती ।आओ उतारें हम आरती ••२ नवचेतना के द्वार खोल अबसुनें कविता सृजन की आवाजखत्म हो हैवानियत की इन्तहांइंसानियत का ही हो आगाजसुंदर पावन धरा भारती ।आओ उतारें हम आरती ••२ नतमस्तक हो हम सभीअर्पण करें पूजा के फूलन कोई पीड़ा, न कुंठामन में चुभते न कोई शूलसुंदर

सुंदर पावन धरा भारती Read More »

जब याद तुम्हारी आती है

हिंदी कविता

जब याद तुम्हारी आती है जब याद तुम्हारी आती हैमन आकुल व्याकुल हो जाता हैतुम चांद की शीतल छाया होतुम प्रेम की तपती काया हो। तुम आये भर गये उजालेसफल हुए सपने जो पालेद्वार हंसे, आंगन मुसकायेभाग्य हो गये मधु के प्याले । तुम हो सावन की रिमझिम फुहारतुम फागुन के रंग रसियाजिन क्षणों तुम

जब याद तुम्हारी आती है Read More »

नयनों की भाषा

हिंदी कविता

नयनों की भाषा तुमने चाहा थामैं  कुछ सीखूँकुछ  समझूँकुछ  सोचूँपर  जब मैंनेकुछ   सीखाकुछ  समझाकुछ  सोचातब  तक बहुत देरहो चुकी थी,मेरे जीवन केअनेक फासलेतय हो चुके थेजिन्दगी नये राह पर थी । आजजब तुम अचानकमेरे सामने आईमुझे देखकरधीरे से मुस्कायेथोडी सकुचाईथोडी सी शरमाईमैंने तुम्हारे नयनो की भाषा कोपढ़ लियालेकिन तब तकजिन्दगी तोअनेक फैसलेले चुकी थीअब बहुत

नयनों की भाषा Read More »

दौलत की भूख

हिंदी कविता

दौलत की भूख आया कैसा नया ज़मानादौलत आज सभी को पानायह एक ऐसी भूख हैरिश्तों की बेल जाती सूखकिसी की परवाह न करे इंसान झूठ बोलने में माहिर हुआकुत्सित काम है बात आमलालच ने यूं अंधा कियाभ्रष्टाचार  अंदर तक पनपासारे नाते रिश्ते तोड़े  बिना डरे क्षुधा फिर भी नहीं मिटती है।पैसा  मात्र इक  गिनती  हैजोड़े

दौलत की भूख Read More »

सोच सोच के सोचो

नारी जीवन और संवेदना

सोच सोच के सोचो नारी ना होती,श्रृंगार करता कौन?हुस्न की बात चले तो,तेरा नाम लेता कौन? नख-शिख चित्रण ,उभारता कौन?गर ना श्रृंगार होता,कविताएँ लिखता कौन?कवि की लेखनी क्या होती मोन?श्रृंगार देख बिन पिये, नशा चढ़ाता कौन? पल-पल क्षण-क्षण,प्रिय मिलन की आस जगाता कौन?सांझ का आँचल लहराये, मनमद मस्त महकाता कौन?दो दिलों के मिलन का आधार

सोच सोच के सोचो Read More »

सच्ची मुहब्बत पर गजल

हिंदी कविता

सच्ची मुहब्बत पर गजल भला इस दौर में सच्ची मुहब्बत कौन करता हैबिना मतलब जहाँ भर में इबादत कौन करता हैहसीं रंगीन दुनिया के नजारे छोड़ कर पीछेमुहब्बत के सफीनों की जियारत कौन करता हैयह खुदगर्ज़ी भरी दुनिया यहाँ कोई नहीं अपनाकिसी मजबूर पर दिल से इनायत कौन करता हैअमीरी में हज़ारों हाथ बन जाते

सच्ची मुहब्बत पर गजल Read More »

तिरंगा शान- निर्मल नीर

हिंदी कविता

तिरंगा शान   हमारी आन~प्राणों से बढ़करतिरंगा शान     पूजनीय है~माटी का कण-कणवन्दनीय है     भारत माता~बच्चा-बच्चा कुर्बानझुकता माथा     पावन माटी~वीरों के लहू सनीहै हल्दीघाटी     गौरव गाथा~प्यारे हिंदुस्तान कीविश्व है गाता. निर्मल नीर

तिरंगा शान- निर्मल नीर Read More »

झुकेगा सर नहीं अपना

Uncategorized

झुकेगा सर नहीं अपना झुकेगा सर नहीं अपना, किसी तलवार के आगे।अटल होकर खड़े होंगे, बुरे  व्यवहार के आगे। बढ़ायेंगे कदम अपने, न जब तक लक्ष्य  हो हासिल।बढ़ेंगे नित्य हम अविचल, भले ही दूर हो मंज़िल।डरेंगे हम  नहीं अब तो, किसी प्रतिकार के आगे।1झुकेगा सर नहीं…… लगा कर शक्ति हम पूरी, बढ़ाएं नाव  को अपनी।न

झुकेगा सर नहीं अपना Read More »

Scroll to Top