कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

कलम से वार कर

हिंदी कविता

कलम से वार कर परिणाम अच्छे हो या बुरे,,उसे सहर्ष स्वीकार कर,,किसी को दोषी मत ठहरा,,अपने आप का तिरस्कार कर,,समीक्षा कर अंतःकरण का,,और फिर कलम से वार कर ।।        जहाँ तुम्हें लगे मैं गलत हूँ,,       वहाँ बेझिझक अपनी हार कर,,       अपने चिंतन शक्ति को बढ़ाकर,,        तुम ज्ञान का प्रसार कर,,        अपने अन्दर अटूट विश्वास

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सखी वो मुझसे कह कर जाते

हिंदी कविता

सखी वो मुझसे कह कर जाते नैनन मेरे नीर भर गयेहृदय किया आशंकित हैगये होगें जिस मार्ग पे चलकेउस पथ उनके पग अंकित हैजाना ही था जब प्रियतम कोथोडी देर तो रह कर जाते !!१!!*सखी वो मुझसे*…………….. भोर भयी जब देखा मुडकरप्रियतम सेज दिखे ना हमेंहृदय हुआ जो पीडित उस क्षणकहूँ वो कैसे व्यथा तुम्हेंसह

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पहचान पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

पहचान पर कविता कैद न करो बस पिंजरे मेंहमें नही चाहिए पूरा जहान ।अपने को मानते हो श्रेष्ठ तोहमें भी बनने दो नारी महान ।।जहाँ कोई मालिक न होऔर न हो यहाँ कोई गुलाम ।दोस्ती का रिश्ता हो बसदोस्ती ही हो हमारी पहचान ।।आजादी नहीं चाहिए तुमसेबस बनी रहे मेरी भी शान ।जहाँ कोई छोटा-

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माता पिता पर कविता

हिंदी कविता

माता पिता पर कविता धन्य – धन्य माता -पिता ,धन्य आपका प्यार Iतन देकर ‘माधव’ किया ,बहुत बड़ा उपकार ll ब्रह्मा , विष्णू   बाद   में , नन्दी  के  असवार I‘माधव’   पहले  मात -पितु , बन्दउँ बारम्बार ll कोरे कागज पर लिखा , तुमने भला  सुलेख I‘माधव’ जैसा आज हूँ , अपनी ही छवि देख Il

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woman-day

आह्वान गीत – नारी शक्ति को समर्पित

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

आह्वान गीत अभी और लड़ाई लड़नी है,तुमको  अपने अधिकार की |चुप होकर मत बैठो तुम,भेरी भरो हुंकार की || कितनी सदियां बीत गईं,पर तुम्हें न वो सम्मान मिला |चिंतन करना होगा तुम्हें,अपने निरादर हार की || अभी और… आज भी तुम अपवित्र हो,मंदिर(सबरीमाला) में प्रवेश वर्जित है |कितनी कुत्सित-घृणित सोच है देखो इस संसार की

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हाइकु

साँझ के हाइकु

हिंदी कविता

साँझ के हाइकु 1 साँझ महके प्रिया जूड़े में फँसापिया को ताके ।। 2 साँझ पुकारे सूर्य शर्म से लाल चाँद जो झाँके ।। 3 साँझ का सूर्य बूढ़े की सुनो कोई देर क्यों हुई ? 4 रातें डराती प्रभू भजने लगी संध्या की ज्योति ।। 5 साँझ का मन थका , बुझा, रूठा सा

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virah viyog bewafa sad women

कैसे जीना भा गया

हिंदी कविता

कैसे जीना भा गया दिल में जब तेरा खयाल आता है,बस एक ही सवाल आता है,न तुम्हें सोच पाती हूँ,और न लिख पाती हूँ,तुम्हारी यादें अब भी आती हैं,दर्द के लहरों से टकरा लौट जाती हैं,महसूस करना चाहता है तुम्हें दिल,पर पहले ही तड़प उठता है,उस दर्द की सिहरन से,जिसे दिल ने महसूस किया है,काश

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bajrang hanumaan

दुनिया में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे

हिंदी कविता

दुनिया में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे दुनिया में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे ।नाम बड़े हे दुनिया में  काम बड़े हे।दुनिया में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे । राम नाम दिन रात जपत हे करे राम के काम ।भरत सही पिरोहिल राम के ह्रदय लगाये राम ।सूरज को लीलने  वाला के नाम बड़े

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chandani raat

आओ प्रिय कोई नवगीत गाएँ

हिंदी कविता

आओ प्रिय कोई नवगीत गाएँ चलो जीवन में कुछ परिवर्तन लाएँकुछ अच्छा याद रखें कुछ बुरा भूल जाएँआओ प्रिय मैं से हम हो जाएँ। यादों का पुलिंदा जीवन मेंजाने कब से सिसक रहा हैआओ प्रिय कुछ गिले-शिकवे मिटाएँ। शिद्दत से चाहा था कभी हमेंमुद्दत से वो दौर नहीं आयाअनकही सी पहेली है जीवनआओ प्रिय कुछ

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हाइकु

गीत अब कैसे लिखूं

हिंदी कविता

गीत अब कैसे लिखूं स्वप्न आंखों    में  मरे  हैं,पुहुप खुशियों के झरे  हैं,गीत  अब   कैसे   लिखूं।। सूखती सरिता नयन की,दिन फिरे चिंतन मनन की।अब  निभाता  कौन  रिश्ता,सात  जन्मों  के वचन की।।प्रिय जनों  के  साथ   छूटे,शेष   अपने    वही   रूठे।गीत  अब   कैसे    लिखूं।। हसरतों   के     झरे   पत्ते,वृक्ष  से   उघरे  हुए   हम।कर तिरोहित पुण्य पथ को,धूल  से  बिखरे 

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virah viyog bewafa sad women

श्याम चौपाई-पुष्पा शर्मा “कुसुम”

हिंदी कविता

श्याम चौपाई श्याम भक्ति मीरा मन भाई।दीन्हे सकल काज बिसराई ।।करहि भजन सेवा अरु पूजा।एक देव और नहीं दूजा।। नाचहि गावहि धरियहि  ध्याना ।प्रेम सहित गिरधर पति माना ।।सतत करहि सन्तन सन्माना।रचना कर गावहि पद नाना । राणा का जब कहा न मानाकुपित भये दीन्हे दुख नाना ।।चरणामृत कह विष भिजवाया ।पीवत मुदित परम सुख

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सरस्वती माता

सुप्रभात वंदन -नमन वंदन वीणावादनी

हिंदी कविता

सुप्रभात वंदन -नमन वंदन वीणावादनी नमन वंदन वीणावादनी,                 सुर नर मुनि जन पूजे ज्ञानी। वाणी में विराजती माता,                  माँ  शारदे  बड़ी  वरदानी।। राह सच जो चलता हमेशा,                  ज्ञान मातु नित नित वह पाया। मिले नित साहस लेखनी को,                  मातु शरण मैं तेरे आया।।                       …….भुवन बिष्ट

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