कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

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कागजी तितली / डी कुमार –अजस्र

हिंदी कविता

कागजी तितली / डी कुमार –अजस्र ठिठुरन सी लगे ,सुबह के हल्के रंग रंग में ।जकड़न भी जैसे लगे ,देह के हर इक अंग में ।। उड़ती सी लगे,धड़कन आज आकाश में।डोर भी है हाथ में,हवा भी है आज साथ में। पर कागजी तितली…..लगी सहमी सीउड़ने की शुरुआत में ।फैलाये नाजुक पंख ,थामा डोर का […]

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राम आएँगे गीत कविता हिंदी में

हिंदी कविता

राम आएँगे गीत कविता हिंदी में (Ram Aayenge Lyrics In Hindi) मेरी झोपड़ी के भाग,आज जाग जाएंगे,राम आएँगे,राम आएँगे आएँगे,राम आएँगे,मेरी झोपडी के भाग,आज जाग जाएंगे,राम आएँगे ॥ राम आएँगे तो,आंगना सजाऊँगी,दिप जलाके,दिवाली मनाऊँगी,मेरे जन्मो के सारे,पाप मिट जाएंगे,राम आएँगे,मेरी झोपडी के भाग,आज जाग जाएंगे,राम आएँगे ॥ राम झूलेंगे तो,पालना झुलाऊँगी,मीठे मीठे मैं,भजन सुनाऊँगी,मेरी जिंदगी

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Jai Sri Ram kavitabahar

अनुराग राम का पाने को/ हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’ हरीश

हिंदी कविता

अनुराग राम का पाने को/ हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’ हरीश; अनुराग राम का पाने को,उर पावन सहज प्रफुल्लित है।कण-कण में उल्लास भरा,जन -जीवन अति आनन्दित है।टेक। बर्बरता की धुली कालिमा,सपनों के अंकुर फूटे,स्वच्छ विचारों के प्रहार से,दुर्दिन के मानक टूटे।नाच रहीं खुशियॉ अम्बर में,पुण्य धरा उत्सर्गित है।अनुराग राम का पाने को,उर पावन सहज प्रफुल्लित है।1। बलिदान दिया

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Jai Sri Ram kavitabahar

श्री राम को प्रणाम है/ डाॅ विजय कुमार कन्नौजे

हिंदी कविता

श्री राम को प्रणाम है/ डाॅ विजय कुमार कन्नौजे धीर वीर श्री राम कोकोटि-कोटि प्रणाम है।कौशल्या के लालदशरथ कुमार है।संत हितकारी परदुष्टों का काल है।। वही प्रभु श्री राम को कोटि-कोटि प्रणाम है ।। निर्गुण निराकार परधरती में अवतार है।दशरथ कुमार है परकण कण में राम है।।धीर वीर संयम शीलश्री राम को प्रणाम है। देखने

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खिचड़ी भाषा त्याग कर / डाॅ विजय कुमार कन्नौजे

हिंदी कविता

खिचड़ी भाषा त्याग कर खिचड़ी भाषा त्याग करसाहित्य कीजिए लेख।निज जननी को नमन करोकहे कवि विजय लेख।। हिन्दी साहित्य इतिहास मेंखिचड़ी भाषा कर परहेज।इंग्लिश शब्द को न डालिएहिन्दी वाणी का है संदेश।। हिन्दी स्वयं में सामर्थ्य हैहर शब्दों का उल्लेख।हर वस्तु का हिन्दी नाम हैहिन्दी शब्दकोश में लेख।। हिन्दी इतना कमजोर नहींजो मिलायें खिचड़ी भाषा।सभी

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रसायन चुर्ण हिन्दी/ डाॅ विजय कुमार कन्नौजे

हिंदी कविता

रसायन चुर्ण हिन्दी हिन्दी शब्दकोश खंगालकरशब्द चयन कर साथ।शब्दकोश का भंडार पड़ा हैज्ञानार्जन दीजिए बाट।। हिन्दी कोष महासागर हैपाते हैं गोता खोर।तैर सको तो तैर सागर को गहरा है अति घोर।। डुबकी लगाये अंदर जावेंगोता लगावें, गोता खोर।आसमान सा ऊपर हिन्दीपताल पुरी सा गहरा छोर।। सृजन साहित्य,नवरस धारारस छंद दोहा अलंकृत है।संधि समास परिपुर्ण हिंन्दीवर्ण

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राम को माने राम का नही/राजकुमार ‘मसखरे’

प्रकृति और पर्यावरण

राम को माने,राम का नही (राम की प्रकृति पूजा) ओ मेरे प्रभु वनवासी रामआ जाओ अपनी धराधाम,चौदह वर्ष तक पितृवचन मेंवन-वन विचरे बिना विराम! निषाद राज गंगा पार करायेकंदमूल खाकर सरिता नहाए,असुरों को राम ख़ूब संहारेऋषिमुनियों को जो थे सताए ! भूमि कन्या थी सीतामाईशेष अवतारी लक्ष्मण भाई ,पर्ण कुटी सङ्ग,घास बिछौनाभील राज सङ्ग करे

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माँ मै आ गया हूँ / कमल कुमार सिंह

हिंदी कविता

माँ मै आ गया हूँ /कमल कुमार सिंह माँ अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी हैना सुन सकती है न बोल सकती है देख कर भी कुछ कह नही सकती काले अंधेर दुनिया मे गुम हो चुकी हैउम्मीद की किरण अब खो चुकी हैदुनिया को अलविदा कह चुकी है.. माँ मै आ गया हूँ जब वो

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रूख राई हे खास/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे

प्रकृति और पर्यावरण

रूख राई हे खास/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे जंगल झाड़ी अउ रूख राईप्राणी जगत के संगवारी हे।काटथे‌ फिटथे जउन संगीओ अंधरा मुरूख अज्ञानी हे। अपने हाथ अउ अपने गोड़मारत हवय जी टंगिया।अपन हाथ मा घाव करयबेबस हवय बनरझिया।। पेट ब्याकुल बनी करत हेठेकेदार के पेट भरत हे।नेता मन के कोठी भरत हेजीव जंतु जंगल के

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हसदेव जंगल पर कविता

हिंदी कविता

हसदेव जंगल पर कविता हसदेव जंगल उजार के रोगहा मन पाप कमा के मरही।बाहिर के मनखे लान केमोर छत्तीसगढ़ म भरही।। कभु सौत बेटा अपन नी होवय,सब झन अइसन कइथे।सौत भल फेर सौत बेटा नहीसौतिया डाह हर रइथे।। हसदेव जंगल दवई खदानसब जंगल ल उजाड़ही।बिन दवई बुटी के ,जन-जन ल रोगहा मन मार ही।। जंगल

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सतनाम पर कविता

हिंदी कविता

सत के रद्दा बताये गुरूसही मारग दिखाये।सहीं मारग बतायें गुरू जय‌‌‌तखाम ल गड़ाये।। चंदा सुरूज ल चिनहायेगुरु,जोड़ा खाम ल गड़ायेविजय पताका ल फहरायेसाहेब, सतनाम ल बताये।। तोरे चरनकुंड के महिमासाहेब, जन-जन ल बताये। सादा के धजा बबा,सादा तिलक तोर माथे में।सादा के लुगरा पहिरे हवयसफुरा दाई साथ में।। मैं घोंडइया देवव बाबा,मैं पईंया लागव तोर।मोर

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हर क्षण नया है

हिंदी कविता

हर क्षण नया है। साल नया आ गया गौर से देखो हर क्षण नया होता है।कुछ मिलता है, कुछ खोना होता है।हर क्षण नया होता है। जीवन के इस सफर में, कोई अपना कोई पराया होता है।सुख, दुःख की दो धार में,हर क्षण नया होता है। लोग मिलते हैं बिछड़ते हैं। जो जिसे दिल से

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