कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

bhawani prasad tivari

जीत मरण को वीर / भवानी प्रसाद तिवारी

हिंदी कविता

जीत मरण को वीर / भवानी प्रसाद तिवारी जीत मरण को वीर, राष्ट्र को जीवन दान करो, समर-खेत के बीच अभय हो मंगल-गान करो। भारत-माँ के मुकुट छीनने आया दस्यु विदेशी, ब्रह्मपुत्र के तीर पछाड़ो, उघड़ जाए छल वेशी। जन्मसिद्ध अधिकार बचाओ, सह-अभियान करो, समर-खेत के बीच, अभय हो, मंगल-गान करो। क्या विवाद में उलझ […]

जीत मरण को वीर / भवानी प्रसाद तिवारी Read More »

atal bihari bajpei

आज सिंधु में ज्वार उठा है / अटल बिहारी वाजपेयी

मन और भावनाएँ

“अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध कविता ‘आज सिंधु में ज्वार उठा है’ में राष्ट्रीयता, साहस और भारतीय संस्कृति की महत्ता को दर्शाया गया है। यह कविता हमें प्रेरित करती है कि हम अपने देश की अखंडता और गरिमा के लिए सदा तत्पर रहें। पढ़ें और जानें इस अद्भुत रचना के गूढ़ अर्थ।” आज सिंधु में

आज सिंधु में ज्वार उठा है / अटल बिहारी वाजपेयी Read More »

मर्द का दर्द / डॉ विजय कुमार कन्नौजे

विरह और दर्द

मर्द का दर्द / डॉ विजय कुमार कन्नौजे नारी बिना ना मर्द हैंमर्द का एक दर्द है।एक अनजाने कन्या लाकरपालने पोसने का कर्ज है। सिर झुका विनती नार कोहाथ जोड़ अर्ज है।जन्म दाता माता पिता का जिंदगी भरे कर्ज है। मर्द का एक दर्द है।। पाप कर्म किया है मर्दबच्चन पालना फर्ज है माता पिता

मर्द का दर्द / डॉ विजय कुमार कन्नौजे Read More »

mask

चेहरे पे कई चेहरे / राजकुमार मसखरे

हिंदी कविता

चेहरे पे कई चेहरे / राजकुमार मसखरे चेहरे पे लगे हैं कई चेहरेइन्हें पढ़ना आसान नही,जो दिखती है मुस्कुराहटेंवो नजरें हैं दूर और कहीं ! इतने सीधे-सादे लगते हैंजो मुखौटा लगाए बैठे हैं,ये निर्बलों व असहायों केजज़्बातों के गला ऐठें हैं ! मासूम चेहरा,इरादे खिन्नभीतर राज छुपा रखते हैं,जब भी मौका मिले इन्हें गरल वमन

चेहरे पे कई चेहरे / राजकुमार मसखरे Read More »

गणेश वंदना

गणेश वंदना / डॉ विजय कुमार कन्नौजे

हिंदी कविता

गणेश वंदना / डॉ विजय कुमार कन्नौजे मै हव अड़हा निच्चट नदानदया करबे ग गणेश भगवानगौरी गौरा आथे सुरतातुंहर संग नंदी मेहरबान। मुसुवा सवारी लड्डू खवइयामुल बाधा तै दुख दुर करइयातोर घर परिवार आथे सुरतादया करबे ज्ञान देवइया।। कवि विजय के बिनती मानबेरिद्धि सिद्धि तै संग मा लानबेमोर अंगना बढा़दे शोभाकारज घलो मोर सुधारदे।। जय

गणेश वंदना / डॉ विजय कुमार कन्नौजे Read More »

Jai Sri Ram kavitabahar

रामजी विराजेंगे / रमेश कुमार सोनी

नारी जीवन और संवेदना

रामजी विराजेंगे / रमेश कुमार सोनी रामजी आए हैं संग ख़ुशियाँ लाए हैं सज-धज चमक रही हैं गलियाँपलक-पाँवड़े बिछे हैं सबकेरंगोलियाँ लगी दमकने हो गए हैं सबके वारे-न्यारे जन्मों के सोये भाग लगे मुस्काने। अभागे चीखते रहेये बनाओ,वो बनाओ-बनेगा वही जो‘होइहैं वही जो राम रुचि राखा’,जगमग हैं घर-घरौंदेंसजधज लौटी है दीवालीआनंद मगन नाच रहे हैं

रामजी विराजेंगे / रमेश कुमार सोनी Read More »

Hindi Poem ( KAVITA BAHAR)

छत्तीसगढ़ में रिश्ता राम के/ विजय कुमार कन्नौजे

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ में रिस्ता राम के / विजय कुमार कन्नौजे छत्तीसगढ़ के मैं रहइयाअड़हा निच्चट नदान।छत्तीसगढ़ में भाॅंचा लामानथन सच्चा भगवान। बहिनी बर घातेच मयामिलथे गजब दुलारदाई के बदला मा बहिनी देथे गा मया भरमार। कौशल्या दीदी बड़ मयारू छत्तीसगढ़ के शानजेकर गोदी म जनम धरिसश्री राम चंद्र भगवान । बारा बच्छर बन मा काटिसछत्तीसगढ़ के

छत्तीसगढ़ में रिश्ता राम के/ विजय कुमार कन्नौजे Read More »

shabri

शबरी पर कविता/ सौदामिनी खरे दामिनी

Uncategorized

शबरी पर कविता/ सौदामिनी खरे दामिनी शबरी सी भक्ति मिले,जीवन सुगम चले,प्रभु के आशीष तले,होवे नवल विहान। यह भीलनी साधना,रही निष्काम भावना,कठिनाई से सामना,गुरु वचनों को मान। लोभ मोह छोड़कर,भक्ति भाव जोड़ कर,राम नाम बोल कर,लगाया प्रभु से ध्यान। मीठे बेरों को तोड़ती,वो कुटिया बुहारती,फूल राहों में डालती,ढलता है अवशान।।

शबरी पर कविता/ सौदामिनी खरे दामिनी Read More »

विकलांग नहीं दिव्यांग है हम

प्रकृति और पर्यावरण

3 दिसम्बर दिव्यांग दिवस :- पर सभी दिव्यांग जनों को सादर समर्पित विकलांग नहीं दिव्यांग है हम आँखे अँधी है, कान है बहरे ,हाथ पांव भी भले विकल ।वाणी-बुद्धि में बनी दुर्बलता ,विश्वास-हौसला सदा अटल । अक्षमताओं से क्षमता पैदा कर ,विकलांग से हम दिव्यांग कहाए ।परिस्थितियों से लोहा लेकर ही ,काँटो-पथ पर फूल खिलाए

विकलांग नहीं दिव्यांग है हम Read More »

purane geet old song kavita bahar

लागी छूटे ना अब तो सनम लिरिक्स

हिंदी कविता

Song Credits:Song Title/गाना: लागी छूटे ना अब तो सनम Laagi Chhute Na Ab To SanamMovie/चित्रपट: काली टोपी लाल रुमाल Kali Topi Lal Rumal (Year-1959)Singer/गायक: मुहम्मद रफ़ी Mohammed Rafi, लता मंगेशकर Lata MangeshkarMusic Director/संगीतकार: चित्रगुप्त श्रीवास्तवा Chitragupta ShrivastavaLyrics Writer/गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी Majrooh SultanpuriStar casts/अभिनीत किरदार: Shakeela, Chandrasekhar Vaidya, Agha, Mukri, Naina, Kamal Mahra, Bedi, K.N. Singh लागी

लागी छूटे ना अब तो सनम लिरिक्स Read More »

Jai Sri Ram kavitabahar

राम अयोध्या आते है /डॉ एन के सेठी

नारी जीवन और संवेदना

राम/श्रीराम/श्रीरामचन्द्र, रामायण के अनुसार,रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त है। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया। राम अयोध्या आते है /डॉ एन के सेठी पूरा कर वनवास सिय संग,राम अयोध्या आते है।भ्राता लखन

राम अयोध्या आते है /डॉ एन के सेठी Read More »

patang subh makar sankranti

महापर्व संक्रांति / रवि रश्मि ‘ अनुभूति ‘

हिंदी कविता

महापर्व संक्रांति / रवि रश्मि ‘ अनुभूति ‘ मधुर – मृदु बोल संक्रांति पर , तिल – गुड़ – लड्डू के खाओमिलजुलकर सभी प्रेम – प्यार , समता , सौहार्द बढ़ाओमहापर्व संक्रांति लाए सदा , खुशहाली चहुँ ओर ,पतंग उड़ाओ , शुभकामनाएँ लेते – देते जाओ । आया – आया करो स्वागत , पर्व संक्रांति

महापर्व संक्रांति / रवि रश्मि ‘ अनुभूति ‘ Read More »

Scroll to Top