कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

goverdhan shri krishna

मेरे गिरधर, मेरे कन्हाई जी / रचयिता:-डी कुमार–अजस्र

हिंदी कविता

प्रस्तुत गीत या गेय कविता/भजन —- मेरे गिरधर, मेरे कन्हाई जी —डी कुमार–अजस्र द्वारा स्वरचित गीत या भजन के रूप में सृजित है ।

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गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव                      जन्म  उत्सव मोहन का,  देखन देव महान।भेष  बदल  यादव  बनें  ,यशोदा के मकान ।। सब  देवों  की नारियाँ ,ले मन  पावन  प्रीत। बनी  रूप  तज  गोपियाँ ,गाती  मंगल गीत।। रमे   मुरारी   प्रेम   में , बैठे   शम्भु   उदास।चलो नाथ गोकुल चलें,कहीं सती आ पास।। शम्भु  मदारी  बन  गये , डमरू लेकर  हाथ।गोकुल 

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radha shyam sri krishna

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा-केवरा यदु “मीरा “

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तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा ।आओ कन्हाई आओ कन्हाईतुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा—- कान्हा तूने राधा से प्रीत लगाकरभूले हो कैसे मोहन मथुरा में जाकर ।गोकुल की गलियों में फिरती है बावरी सीतन की सुध बिसराई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा ।।तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा

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shri Krishna

नटखट नंद किशोर- नीरामणी श्रीवास

हिंदी कविता

नटखट नंद किशोर चोरी करके छुप गया , नटखट नंद किशोर ।सभी गोपियाँ ढूँढती , प्यारा माखन चोर ।।प्यारा माखन चोर , शिकायत माँ से करते ।दधि की मटकी फोड़ , चैन हम सबकी हरते ।।नियति कहे कर जोड़ , अनूठी लीला तोरी ।प्रेम भक्ति की मान , बचाने करते चोरी ।। चोरी करते देखकर

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radha shyam sri krishna

राधा और श्याम की प्रेम कविता

हिंदी कविता

राधा और श्याम की प्रेम कविता तू मेरी राधा मैं तेरा श्याम हूं।तुमसे प्रेम करके मैं बदनाम हूं। तुझे देखें बिन ,मेरी जीवन की बांसुरी में सूर कहां? तू है मेरे साथ तो सुंदर लगता है,यह सारा जहां। बस तेरी ही धुन में रमे रहूं बस दिन रात तेरा नाम लूं। तू मेरी राधा मैं

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shri Krishna

हो मुरलिया रे / केवरा यदु “मीरा”

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हो मुरलिया रे / केवरा यदु “मीरा” हो मुरलिया रे तँय का का  दान पुन करे हस।तँय का का दान पुन करे हस।तोर बिना राहय नहीं कान्हा ओकरे संग धरे हस।तँय का का दान पुन करे हस।। सुन रे मुरलिया तोर भाग जबर हे कान्हा के संग रहिथस।मोहना के हिरदय के बात ला अपने धुन

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shri Krishna

कृष्ण पर आधारित कविता -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

कृष्ण पर आधारित कविता -मनीभाई नवरत्न हे कृष्ण !आप सर्वत्र।फिर भी खोजता हूँ;अगर कहूं आप पूर्ण हो ।तो सत्य भी हो जायेगा असत्य।चूंकि मैं अपूर्ण जो ठहरा । हे द्वारकाधीश !संसार रूपी कुरुक्षेत्र के नायक !संघर्ष में जन्मे ,खतरों में पलेतथापि बाल लीलाएँ,बताती जीवन के मायने।पर्वत उठाना,कालिया मर्दनकंस रूपी काल को पछाड़नाउसी की नगरी में

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shri Krishna

कृष्ण रासलीला

नारी जीवन और संवेदना

कृष्ण रासलीला लीला राधे कृष्ण सम,आँख उठा के देख।लाख कोटि महा शंख में,लख लीला है एक।। सब देवों की नारियाँ,कर नित साज सिंगार।गमन करें शुचि रास में ,बन ठन हो तैयार।। कृष्णप्रेम विह्वल शम्भु,निज मन कियो विचार।राधे कृष्ण प्रेम परम ,जा देखूँ इक बार।। शिव गौरा से जा तभी,कहने लगे सकुचाय।रास लखन मै भी चलूँ

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shri Krishna

हे नटनागर हे गिरधारी – भजन अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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यह एक भजन है जिसमे कान्हा की भक्ति एवं उनकी कृपा प्राप्ति का प्रयास किया गया है |
कंचन कर दो काया मेरी , हे नटनागर हे गिरधारी – भजन – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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गोवर्धन कर धरते हो/ प्रवीण त्रिपाठी

नारी जीवन और संवेदना

गोवर्धन कर धरते हो/ प्रवीण त्रिपाठी नटवर नागर प्यारे कान्हा, गोवर्धन कर धरते हो।इंद्र देव का माधव मोहन, सर्व दर्प तुम हरते हो। ब्रज मंडल के सब नर-नारी, इंद्र पूजते सदियों से।लीलाधारी कृष्ण चन्द्र को, कभी न भाया अँखियों से।उनके कहने पर ब्रजवासी, लगे पूजने गोवर्धन।देवराज का दम्भ तोडने, लीलाएँ नव करते हो।1 गोवर्धन का

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कृष्ण रंग रंगी मीरा /अर्चना पाठक

नारी जीवन और संवेदना

कृष्ण रंग रंगी मीरा/ अर्चना पाठक तज महल अटारी ,कर सितार लिये गली गली श्याम संग घूमी मीरा । वीणा के तार कृष्ण दास हुये भक्ति के रंग में रंगी मीरा । पराधीनता की गहरी टीस लिये। विरक्ति के गीत में रमी मीरा। परिजनों के क्रोध और विद्रोह सहे। सदा कृष्ण भक्ति में लीन मीरा।

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