सपनों का दाना /मनीभाई नवरत्न

सपनों का दाना /मनीभाई नवरत्न

किसान खेत जोतते हुए

जमीन में दफन होकर
पसीने से सिंचित
कड़ी देखभाल में
उगता है ,
सपनों का दाना बनके।


लाता है खुशियां;
जगाता है उम्मीद,
कर्ज चुकता करने की।
पर रह नहीं पाता
अपने जन्मदाता के घर।

खेत खलिहान से करता है
मंडे तक की सवारी।
और अपने ही भीड़ में
खो जाती है अनाथ होकर।


डरता है ,
बारदाने की घुटन से।
जाने कब मुक्ति मिलेगी?
किसी का पेट भरेगी
या पौधा बन विकास करेगी ?
या फिर और कुछ…….?

मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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