कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

एक बार लौट कर आ जाते

हिंदी कविता

अगर वह एक बार लौट कर आ जाते तालाब के जल पर एक अस्पष्ट सा,उन तैरते पत्तों के बीचएक प्रतिबिम्ब दिखाई पड़ा,तभी जाना… मेरा भी तो अस्तित्व है।झुर्रियों ने चेहरे पर पहरा देना शुरू कर दिया था।कुछ गड्ढे थे. जो चेहरे पर अटके पड़े थेंजिस पर आँखों से गिरी कुछ बूंदें अपना बसेरा बनाए हुए […]

एक बार लौट कर आ जाते Read More »

morning

प्रातःकाल पर कविता

हिंदी कविता

प्रातःकाल पर कविता श्याम जलद की ओढचुनरिया प्राची मुस्काई।ऊषा भी अवगुण्ठन मेंरंगों संग नहीं आ पाई। सोई हुई बालरवि किरणेअर्ध निमीलित अलसाई।छितराये बदरा संग खेलेभुवन भास्कर छवि छाई। नीड़ छोड़  चली अब तोपंछियों की सुरमई पाँत।हर मौसम में  रहें कर्मरतसमझा जाती है यह बात। पुष्पा शर्मा “कुसुम”

प्रातःकाल पर कविता Read More »

हम हलचल कर देंगे

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

हम हलचल कर देंगे         (प्रॉज शैली में)             तर्क,      कुछ निकलेंगे..कुछ अंधविश्वास टूटेंगे।  ज्ञान ग्रहण जो सार,    हम तुम खोजते,       ग्रहण जो,         करेंगे।             हर,       पक्ष विपक्ष,     हर पहलु का,  कोई न कोई सार,  निकलता है प्यारे,   अनुसंधान जो,         करेंगे।           भावी,        भूत वर्त,      सब कुछ है,विज्ञान के पहिये में,     बस संग जो,     चक्रण

हम हलचल कर देंगे Read More »

छूकर मुझे बसंत कर दो

हिंदी कविता

छूकर मुझे बसंत कर दो – निमाई प्रधान तुम बिन महज़ एक शून्य-सा मैंजीकर मुझे अनंत कर दो ….। पतझर-पतझर जीवन हैछूकर मुझे बसंत कर दो ।। इन्द्रधनुष एक खिल रहा है, मेरे हृदय के कोने में…..बस जरुरत एक ‘हाँ’ की …शून्य से अनंत होने में ।छू लो ज़रा लबों को मेरे..शंकाओं का अंत कर

छूकर मुझे बसंत कर दो Read More »

दिलीप कुमार पाठक सरस का ग़ज़ल

हिंदी कविता

दिलीप कुमार पाठक सरस का ग़ज़ल जिंदादिली जिसकी बदौलत गीत गाना फिर नया |हँसके ग़ज़ल गाते रहो छेड़ो तराना फिर नया || है जिंदगी जी लो अभी फिर वक्त का कोई भरोसा है नहीं |पल भर ख़ुशी का जो मिले किस्सा सुनाना फिर नया || हँसना हँसाना रूठ जाना फिर मनाना आ गया |अच्छा लगे 

दिलीप कुमार पाठक सरस का ग़ज़ल Read More »

सेवा पर कविता

हिंदी कविता

सेवा पर कविता – मानक छत्तीसगढ़िया ठंडी में गरीब को कपड़े दे दो,गर्मी में प्यासे को पानी।हर मौसम असहाय की सेवा,ऐसे बीते जवानी।। अशिक्षित को शिक्षित बना दो,कमजोर को बलशाली।भटके को सच राह दिखा दो,भीखारी को भी दानी।। दीन दुखियों को खुशियां दे दो,रोते को हंसी सारी।रोगी को आराम दिला दो,हो ऐसा कर्म कहानी।। प्रेम

सेवा पर कविता Read More »

दीपक पर कविता

हिंदी कविता

नव्य आशा के दीप जले – मधु सिंघी नव्य आशा के दीप जले,उत्साह रूपी सुमन खिले।कौतुहल नवनीत जगाकर,नया साल लो फिर आया। मन के भेद मिटा करके,नयी उम्मीद जगा करके।संग नवीन पैगाम लेकर ,नया साल लो फिर आया। सबसे प्रीत जगा करके,सबको मीत बना करके।संग में सद्भावनाएँ लेकर ,नया साल लो फिर आया। मुट्ठी में

दीपक पर कविता Read More »

shri Krishna

श्याम छलबलिया – केवरा यदु

हिंदी कविता

श्याम छलबलिया – केवरा यदु श्याम छलबलिया कइसे भेज दिहे व पाती।तुम्हरे दरस बर तरसथे मोर आँखी।तुम्हरे दरस बर तरसथे मोर आँखी।।कान्हा रे कान्हा रे कान्हा रे कान्हा रे।ऊधो आइस पाती सुनाइस।पाती पढ़ पढ सखी ला सुनाईस।पाती सुन के पाती सुन के धड़कथे मोर छाती।।तुम्हरे दरस बर तरसथे मोर आँखी।।कान्हा रे कान्हा रे कान्हा रे

श्याम छलबलिया – केवरा यदु Read More »

भ्रूण हत्या पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

भ्रूण हत्या पर कविता भ्रूण हत्या का मचा एक नीरव रोर है,चोरी छिपे लिंग जाँच हर दिशा हर ओर है।जाने क्यों बेटी की हत्या का शौक ये चढ़ आया,गर्भ में ही भेदभाव का ये कृत्य सबको भाया। अपने ही कोख के अंश का माँ गला घोंट देती है,लिंग जाँच में बेटा हो तो हत्या रोक

भ्रूण हत्या पर कविता Read More »

जब लेखनी मुँह खोलती है

हिंदी कविता

जब लेखनी मुँह खोलती है जिंदगी में कुछ अपनो के किस्से खास होते हैंछलते हैं वे ही हमें जो दिल के पास होते हैं।वंचना भी करते हैंफिर भी खुशी की आस होते हैंलहरों के नर्तन में नाविक का विश्वास होते हैं। न जाने क्यों फिर भी हम उनके साथ होते हैंवे ही हमारी सुबह शाम

जब लेखनी मुँह खोलती है Read More »

सायली छंद में रचना

हिंदी कविता

सायली छंद में रचना चेहरादेख सकूँनसीब में कहाँबिटिया दूरबसेरा। अहसासबस तुम्हारापल-पल यादसताती रहीआज। यादआते रहेवो पल हरदमजो सुनहरेबीते। तेरीनटखट शैतानियाँमहकता रहता था।घर आँगनमेरा। अर्चना पाठक (निरंतर)अम्बिकापुर

सायली छंद में रचना Read More »

माता शारदे वंदन

हिंदी कविता

माता शारदे वंदन करूँ -भुवन बिष्ट माता शारदे वंदन करूँ।                     मिले अब वरदान।।वाणी में विराजती माता।                       सदा देना ज्ञान।।आलोकित हो हर पथ मेरा।                       लेखनी पहचान।।होवे विनती यह बार बार।                      माता हो महान।।सदा सदा सच पथ पर होता।                     मातु का गुणगान।।वीणावादनी माता सदा।                      मिट जाये अज्ञान।।                     …भुवन बिष्ट             रानीखेत, उत्तराखंड ======================

माता शारदे वंदन Read More »

Scroll to Top