कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

आखिर कब आओगे – रश्मि शर्मा

हिंदी कविता

आखिर कब आओगे – रश्मि शर्मा मुझे अकेला छोड़कर कहाँ जाओगे तुम,इन्हीं राहों में खड़ी हुँ कभी तो मिलोगे तुम। छोटी सी बात पर आंख फेर ली तुमने,कब तक यूँ मुझसे रूठे ही रहोगे तुम। रात भर जागती रही आंखे मेरी यहाँ,सपनों में न आकर मुझे सताओगे तुम। मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही […]

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मुसाफिर पर कविता

हिंदी कविता

 चल मुसाफिर चल-केवरा यदु “मीरा “ जिन्दगी  काँटों भरी है चल मुसाफिर चल ।गिर गिर कर उठ संभल मुसाफ़िर चल । लाख तूफाँ आये तुम रूकना नहीं।मंजिलों की चाह  है झुकना नहीं ।मंजिल तुझे मिल जायेगी आज नहीं तो कल। याद रख जो आँधियों से है टकराते ।मंजिल कदम चूमने उनके ही आते।गुनगुनाना कर मुस्कुरा

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साल पर कविता

हिंदी कविता

साल ही तो है कुछ को होगी ख़ुशी, कोई ग़म से भर जाएगान जाने ये नया साल भी, क्या कुछ कर जाएगा कुछ अरमान होंगे पूरी इसमें उम्मीद है हमेंऔर कुछ इस साल कि तरह ख़ुद में मर जाएगा टूटा है गर मोहब्बत तो, हो ही जाएगा दोबाराबस देखो एहतियातन वहाँ तज जहाँ तक नज़र

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धर्म एक धंधा है

समाज और यथार्थ

धर्म एक धंधा है  गंगाधर मनबोध गांगुली “सुलेख “        समाज सुधारक ” युवा कवि “ क्या धर्म है ,क्या अधर्म है ? आज अधर्म को ही धर्म समझ बैठें हैं । धर्म से ही वर्ण व्यवस्था ,                             समाज में आया है ।धर्म ही इंसान को ,               इंसान का दुश्मन बनाया है ।।01।। वर्ण व्यवस्था बाद

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atal bihari bajpei

महामानव अटल बिहारी बाजपेयी पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण

महामानव अटल बिहारी बाजपेयी पर कविता मानवता के प्रेणता थे।            राष्ट के जन नेता थे।भारत माँ के थे तुम लाल।       प्रजातंत्र में किया कमाल।।विरोधी भी कायल थे।         दुश्मन भी घायल थे।।पत्रकार व कवि सुकुमार।        प्रखर वक्ता में थे सुमार।।जीवन की सच्चाई लिखने वाले।     सबके दिलो को जीतने वाले।।तुम्हारे मृत्यु पर दुनिया रोया है।आसमान मे घने कोहरे होया

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मैं हर पत्थर में तुम्हीं को देखता हूँ

हिंदी कविता

मैं हर पत्थर में तुम्हीं को देखता हूँ, मैं हर पत्थर में तुम्हीं को देखता हूँ,जब आँखों से मोहब्बत देखता हूँ।अब जल्दी नहीं कि सामने आओ मेरे,मैं तो तस्वीर भी दूर कर देखता हूँ।जहां में सब उजाले में देखते हैं तुम्हें,मैं तो अंधेरे में तेरा चेहरा देखता हूँ।सब तुझमें, खुद को देखना चाहते थे,मैं चाहता

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नमन करुँ मैं अटल जी

हिंदी कविता

नमन करुँ मैं अटल जी नमन करुँ मैं अटल जी तुमको नत हो बारम्बार,जन्म लिया भारत भूमि पर ,जन नेता अवतार। बन अजातशत्रु तुमने मन मोह लिया जन जन काभारत माँ पे निछावर हो,अर्पण किया तन मन का नमन करुँ हे संघ प्रचारक, कवि हृदय जन नेता।राजनीति के प्ररेक पोषक,राष्ट्र भक्ति प्रणेता। नमन करे ये

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इन गुलमोहरों को देखकर

हिंदी कविता

कविता/निमाई प्रधान’क्षितिज’ इन गुलमोहरों को देखकर दिल के तहखाने में बंद कुछ ख़्वाहिशें…आज क्यों अचानक बुदबुदा रही हैं?महानदी की… इन लहरों को देखकर!! कि ननिहाल याद आता है..इन गुलमोहरों को देखकर!! शाही अपना भी रूतबा थामामाजी के गाँव में!!बचपन में हम भी..हुआ करते थे राजकुमार..सुबहो-शाम घूमा करते थेनाना की पीठ पर होके सवार..हमारे हर तोतले

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चिड़िया पर कविता

हिंदी कविता

थके पंछी थके पंछी आजफिर तूँ उड़ने की धारले,मुक्त गगन है सामनेतूँ अपने पंख पसारले। देख नभ में, नव अरुणोदयहुआ प्रसूनों का भाग्योदय,सृष्टि का नित नूतन वैभवसाथियों का सुन कलरवअब हौंसला संभाल ले । शीतल समीर बह रहासंग-संग चलने की कह रहा,तरु शिखा पर झूमतेफल फूल पल्लव शोभतेत्याग दे आलस्य निद्राअवरुद्ध मग विकास काआज अब

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भ्रूणहत्या-कुण्डलिया छंद

हिंदी कविता

भ्रूणहत्या-कुण्डलिया छंद साधे बेटी मौन को, करती  एक गुहार।जीवन को क्यों छीनते ,मेरे सरजनहार।मेरे सरजनहार,बतायें गलती मेरी।कहँ भू पर गोविंद , करे जो रक्षा  मेरी।“कुसुम”कहे समझाय  , पाप   जीवन भर काँधे। ढोवोगे दिन रैन ,दुःख यह मौनहि  साधे। पुष्पा शर्मा “कुसुम”

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पथ की दीप बनूँगी

हिंदी कविता

पथ की दीप बनूँगी प्रिय तुम न होना उदास तेरे पथ की दीप बनूँगी ।फूल बिछा कर पग पर तेरे काँटे सदा वरण करूँ गी ।।तेरे पथ की दीप बनूँगी। ना  मन  हो  विकल  न उथल पुथल ।मनों भाव अर्पित कर अधर की मुस्कान बनूँगी । तेरे पथ की दीप बनूँगी। जिन्दगी में कभी गम

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भावी पीढ़ी का आगामी भविष्य

समाज और यथार्थ

भावी पीढ़ी का आगामी भविष्य हमें सोचना तो पड़ेगा।परिवार की परंपरासमाज की संस्कृतिमान्यताओं का दर्शनव्यवहारिक कुशलताआदर्शों की स्थापना।निरुद्देश्य तो नहीं!महती भूमिका है इनकीसुन्दर,संतुलित और सफल जीवन जीने में। जो बढता निरंतरप्रगति की ओरदेता स्वस्थ शरीर ,सफल जीवन और सर्वहितकारी चिन्तन।हम रूढियों के संवाहक न बने।कुरीतियों की हामी भी क्यों भरें। बचें छिछले ,गँदले गड्ढों के

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