प्रेम रंग होली हिंदी कविता

नफरतों की होलिका
जलाई जब भी जाएगी
प्रेम रंग उड़ेंगे
होली मनाई जाएगी
हरे-लाल-पीले-
नीले-गुलाबी रंगों से
अंतरमन प्रीत की
दीवार रंगी जाएगी |
घृणा, अहम् -भावों के
हिरण्यकश्यपों के बीच
एक प्रहलाद की ही
भक्ति याद आएगी
तोड़ सारे पाप-बंध
नाम हरि का लिए संग
अनल गोद बैठ के
आंच भी ना आएगी |
एक प्रेम शाश्वत है
सत्ता नहीं पाप की
काल के भी गाल पर
लाली लगाई जाएगी
होलिकादहन में आज
त्याग करें बुरे काज
तभी शुद्ध मानवता
फाग गीत गायेगी |
नफरतों की होलिका
जलाई जब भी जाएगी
प्रेम रंग उड़ेंगे
होली मनाई जाएगी |
– आरती सिंह



