7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य दिवस पर हिंदी कविता

April 7: विश्व स्वास्थ्य दिवस (World Health Day)

इस दिन के माध्यम से एक स्वस्थ जीवन शैली के बारे में जागरूक करने का प्रयास किया जाता है. WHO इसे सेलिब्रेट करता हैं और स्वास्थ्य और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सर्वोत्तम दिशानिर्देश प्रदान करने के लिए अलग-अलग व्यवस्था करता है.

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योग दिवस पर 3 कवितायेँ

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता,

इन कविताओं में योग के महत्व और उसके द्वारा मिलने वाले शारीरिक और मानसिक लाभों का वर्णन किया गया है। योग को एक सरल और प्रभावी उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करता है। योग दिवस पर 3 […]

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योग दिवस / राजकिशोर धिरही

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता,

राजकिशोर धिरही की कविता “योग दिवस पर” योग के महत्व और उसके द्वारा मिलने वाले शारीरिक और मानसिक लाभों को उजागर करती है। यह कविता शोभन छंद में रची गई है, जो सरल और प्रवाहमयी है, ताकि पाठक इसे आसानी से समझ सकें और इसके संदेश को आत्मसात कर सकें। योग दिवस / राजकिशोर धिरही

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जीवन का पाठ है योग / अरुणा डोगरा शर्मा

समाज और यथार्थ,

अरुणा डोगरा शर्मा की “यह”जीवन का पाठ है योग” कविता सरल, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक भाषा में रची गई है। कविता का उद्देश्य योग के सामूहिक अभ्यास के महत्व को रेखांकित करना और पाठकों को इसे अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। जीवन का पाठ है योग /अरुणा डोगरा शर्मा भौतिक सुखों को

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आओ मिल कर योग करें हम / शिवांगी मिश्रा

समाज और यथार्थ,

शिवांगी मिश्रा की कविता “आओ मिल कर योग करें हम” योग के सामूहिक और सामाजिक महत्व को उजागर करती है। इस कविता में कवयित्री ने योग को न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य और शांति का साधन बताया है, बल्कि इसे एक सामूहिक गतिविधि के रूप में भी प्रस्तुत किया है जो समुदाय और समाज में एकता

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योग बने मुस्कान हमारी / डा० भारती वर्मा बौड़ाई

समाज और यथार्थ,

डा० भारती वर्मा बौड़ाई की यह कविता सरल, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक भाषा में रची गई है। कविता का उद्देश्य योग के लाभों को सरल और सहज रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इसे आसानी से समझ सकें और अपने जीवन में शामिल कर सकें। योग बने मुस्कान हमारी / डा० भारती वर्मा बौड़ाई योग

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योग से दिन है सुहाना / कवि डिजेंद्र कुर्रे “कोहिनूर”

मन और भावनाएँ,

डिजेंद्र कुर्रे “कोहिनूर” की यह कविता सरल, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक भाषा में रची गई है। कविता का उद्देश्य पाठकों को योग के लाभों से अवगत कराना और उन्हें इसे अपने जीवन में शामिल करने के लिए प्रेरित करना है। योग से दिन है सुहाना / कवि डिजेंद्र कुर्रे “कोहिनूर” योग से दिन है सुहाना,  योग को

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योग भगाये रोग / कंचन कृतिका

प्रकृति और पर्यावरण,

कंचन कृतिका की कविता “योग भगाये रोग” योग के शारीरिक और मानसिक लाभों को उजागर करती है। इस कविता में योग के महत्व और उसके द्वारा रोगों के निवारण का वर्णन किया गया है। कवि ने योग को एक चमत्कारी उपाय के रूप में प्रस्तुत किया है, जो न केवल शारीरिक बीमारियों से छुटकारा दिलाता

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सरकारी योग दिवस / विनोद सिल्‍ला

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता,

विनोद सिल्ला की कविता “सरकारी योग दिवस” में योग दिवस के औपचारिक और सरकारी रूप को चित्रित किया गया है। कविता के माध्यम से कवि ने योग दिवस के आयोजन की प्रक्रिया, उसकी तैयारियों और इसके सामाजिक-राजनीतिक महत्व को व्यंग्यात्मक और भावनात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। विनोद सिल्ला की काव्य शैली सरल, प्रवाहमयी और

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बड़ी दौलत सेहत पर कविता

समाज और यथार्थ

सेहत सबसे बड़ी दौलत है ज़िंदगी को जियो, बड़े इत्मीनान से,कटेगी ज़िंदगी, बड़े शान से!हर पल,हर घड़ी, बिना किसी तनाव से,खुशी में, करो काम, बड़े चाव से!अकेलापन महसूस होता है जब,करना चाहिए कोई काम तब,व्यस्तता रहेगी तो, समय का क्या?पता नहीं चलेगा, वक्त गुजरा कब!धन दौलत का नशा, कभी उतरता नहीं,आदमी को चाहिए, जब तक

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7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य दिवस पर कविता पहला सुख निरोगी काया।हमारे पूर्वजो ने भी बताया। अच्छी लागे ना मोह माया,अगर निरोगी ना हो काया। निरोगी जीवन का आधार।सबसे पहले हमारा आहार। रसना को जिसमें रस आये ,तन को वो रास न भी आये। नमक, चीनी और मैदा ।यह तो है रोगों से सौदा। तला भूना

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स्वास्थ्य जीवन है- मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ,

यह कविता 7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना पर विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष ध्यान देकर रचित की गई है।

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शौचालय विशेष छतीसगढ़ी कविता

हिंदी कविता

शौचालय विशेष छतीसगढ़ी कविता सुधारू केहे-“कस रे मितान!तोला सफई के,नईये कछु भान।तोर आस-पास होवथे गंदगीइही च हावे सब्बो बीमारी के खान।” बुधारू कहे-“मय रेहेंव अनजान।लेवो पकड़त हावों मोरो दूनों कान।लेकम येकर सती, का करना चाही संगी ?अहू बात के,  कर दो बखान। सुधारू कहे-“हमर सरकार लमहतारी मोटियारी के चिंता हावे।शौचालय बना लेवो जम्मोये मे अब्बड़

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