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@चैत्र कृष्ण एकम होली धुलेंड़ी वसंतोत्सव पर हिंदी कविता

चैत्र कृष्ण एकम होली, धुलेंड़ी, वसंतोत्सव : होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है। रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहाँ भी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

होली सम्बन्धी दोहे- हरीश

हृदय-उद्गार--होली सम्बन्धी दोहे holi ----------------------------------------दिया संस्कृति ने हमें,अति उत्तम उपहार,इन्द्रधनुष सपने सजे,रंगों का त्यौहार।1।नव पलाश के फूल ज्यों,सुन्दर गोरे अंग,ढ़ोल-मंजीरा थाप पर,थिरके बाल-अनंग।2।मलयज को ले अंक में,उड़े अबीर-गुलाल,पन्थ नवोढ़ा देखती,हिय में शूल मलाल।3।कसक पिया के मिलन की,सजनी अति बेहाल,सराबोर…
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सरसी छंद विधान – होलिका आई

सरसी छंद विधान - होलिका आई सरसी छंद विधान: --१६ + ११ मात्रा ,पदांत २१(गाल)चौपाई+दोहा का सम चरण हम भी छेडें रागबीत बसंत होलिका आई,अब तो आजा मीत।फाग रमेंगें रंग बिखरेंगे,मिल गायेंगे गीत।खेत फसल सब हुए सुनहरी,कोयल गाये फाग।भँवरे तितली मन भटकाएँ,हम भी छेड़ें राग।घर आजा अब प्रिय परदेशी,मैं करती फरियाद।लिख लिख भेज रही मैं पाती,रैन दिवस करि याद।याद…
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होली पर्व -कुण्डलियाँ

होली पर्व - कुण्डलियाँ होली के इस पर्व पर, मेटे सब मतभेद।भूल गिला शिकवा सभी, खूब जताये खेद।खूब जताये खेद, शिकायत रह क्यों पाये।आपस मे रह प्रेम, उसे भूले कब जाये।मदन कहै समझाय,खुशी की भर दे झोली।जीवन हो मद मस्त, प्यार की खेलें होली।। मदन सिंह शेखावत ढोढसर
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आयो होली को त्यौहार-अर्पित जैन

आयो होली को त्यौहार -अर्पित जैन गली-मोहल्ला घूम घूमके, कंडा-लकड़ी लाए।दे अग्नि होलिका में, और भस्म घरे ले जाए।‌।आयो होली को त्यौहार... पिचकारी किलकारी मारे, गाल पे लाल गुलाल।हरो रंग तो छुटत नाही, रंग लगा दो लाल।।आयो होली को त्यौहार... साफ सुथरो चेहरा लेके, घूम रहो एक लाल।चुपड़-चुपड़ के रंगन से, बना दो हरिया-लाल।।आयो होली रो त्यौहार...…
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होली के रंग हिंदी कविता, आरती सिंह

होली प्रेम और सौहार्द्र का उत्सव है जो कि जीवन के कटु अनुभवों के कारण अंतःकरण में जमे मैल को धोकर उसे स्वच्छ बनाकर, जीवन को सात रंगों में डुबोकर आनंदित कर देती है|
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रंगों की बहार होली कविता

इस कविता में होली के विभिन्न अनछुए पहलुओं को विशेष तौर पर तवज्जो दी गयी है | होली को किस तरह एक पावन त्यौहार के रूप में हम मनाते हैं इसे भी इस रचना में स्थान दिया गया है | रंगों की बहार होली, खुशियों की बहार होली - कविता - मौलिक रचना - अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"
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फाल्गुन की बहार -शची श्रीवास्तव

फागुन की बयार होली का मनभावन त्योहार मन में उमंग और उल्लास जगाता है तो कुछ कसक और मधुर स्मृतियां भी लाता है। आई होली होली के त्योहार पर अनाथ और गरीब बच्चे भी रंग पिचकारी और गुझिया का आनंद उठा सकें, हम सबको उनके लिए अवश्य सोचना ही चाहिए।
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