#दिलीप गुप्ता

यहाँ पर हिन्दी कवि/ कवयित्री आदर०डॉ0 दिलीप गुप्ता’प्रेरणा के हिंदी कविताओं का संकलन किया गया है . आप कविता बहार शब्दों का श्रृंगार हिंदी कविताओं का संग्रह में लेखक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा किये हैं .

Barsat-ya-Varsha-Ritu

बरसा आगे छत्तीसगढ़ी गीत

बरसा आगे छत्तीसगढ़ी गीत गरजे बादर घनघोर,होगे करिया अंधियार…बादर छा गे–बिजुरी चमके अकास,बुझ गे भुंइया के प्यास…बरसा आगे—।।–।। नाचें रुख राई बन…..कूदें गर्रा घाटा…सूखा मर गेदेवी देवंता आशीष..गिरे सूपा के धार…तरिया भर गे–।।–।। पीपर होंगे मतवार…भीजे डोली औ खार…पिंयरा परगे–कोयली कुहू कुहू…भवरा भूँउ..भूँउ….भुंइया तरगे—।।–।। खेते नांगर बईला…किसान होंगे हरवार… बीजा बिछ गे—ठंडा जीवरा परान…ठीना.फसल फरवार… …

बरसा आगे छत्तीसगढ़ी गीत Read More »

World-Nature-Conservation-Day

पेड़ भाई पर कविता -डॉ दिलीप गुप्ता

पेड़ भाई पर कविता धरती में जन्मे ….आदमीधरती में उगे ….पेड़सगे भाई हुए न…..! धरती ने माँ का फर्ज निभाया…पेड़ों ने भी न रखा बकाया…पर आदमी..औकात पर उतार आयामाँ का दामन बाँट दिया..भाई का सर काट दिया…धरा की छाती छलनी कर् दी..जंगलों को जहर बांटे…इंसानी फितूर ने…सदा भाइयों के हाथ -पैर काटे….!!!! दरअसल गलती आदमी …

पेड़ भाई पर कविता -डॉ दिलीप गुप्ता Read More »

सखी के लिए कविता

सखी के लिए कविता -डॉ0 दिलीप गुप्ता

सखी के लिए कविता – डॉ0 दिलीप गुप्ता रिमझिम बरसे.मन है हरसेप्रणय को ब्याकुल हिरदय होवे,सात समंदर पार है सजनीबिरह में बदरा-मेघा रोवे…..तप्त हृदय की अगन बुझाने—–आओ न सखी.. आओ न सखी।।–।।00नीला अम्बर,हरी-भरी धरतीनाचत मोर रिझावत सजनी,उपवन डार-पात लदे फूलनमहकी रातरानी यहां रजनी,सुने आंगन को महकाने—-आओ न सखी…आओ न सखी।।–।।00धरती भीगी मन मोरा लथपथप्रेम का …

सखी के लिए कविता -डॉ0 दिलीप गुप्ता Read More »

You cannot copy content of this page