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#विनोद सिल्ला

यहाँ पर हिन्दी कवि/ कवयित्री आदर 0 #विनोद सिल्ला के हिंदी कविताओं का संकलन किया गया है . आप कविता बहार शब्दों का श्रृंगार हिंदी कविताओं का संग्रह में लेखक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा किये हैं .

रोटी पर कविता- विनोद सिल्ला

रोटी पर कविता- विनोद सिल्ला रोटी तू भी गजब है, कर दे काला चाम।देश छोड़ के हैं गए, छूटे आँगन धाम।।रोटी तूने कर दिए, घर से बेघर लोग।रोटी ही ईलाज है, रोटी ही है रोग।।रोटी तेरे ही लिए, बेलें पापड़ रोज।मोहताज तेरे सभी , तेरी ही नित खोज।।रोटी सबसे है बड़ी,…
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शीतल छाया दे रहे – विनोद सिल्ला

शीतल छाया दे रहेशीतल छाया दे रहे, परउपकारी पेड़। हरे पेड़ को काट कर, कुदरत को ना छेड़।।पेड़ दे रहे औषधी, ले के रहो निरोग।पेड़ लगाने चाहिए, काट रहे हैं लोग।।पालन पोषण कर रहे, देकर के फल फूल। पेड़ लगा उपकार कर, पींग डाल कर झूल।।पेड़ सलामत जब तलक, सोओ लंबी तान। पेड़ धरा पर ना रहें, हो जाए सुनसान।।उपयोगी पत्ता तना,…
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स्वास्थ्य पर सजगता – विनोद सिल्ला

स्वास्थ्य पर सजगता hindi doha || हिंदी दोहा सेहत सुविधा कम हुई, बढ़े बहुत से रोग| दाम दवाओं के बढ़े, तड़प रहे हैं लोग||अस्पताल के द्वार पर, बड़ी लगी है भीड़|रोग परीक्षण हो रहे, सब की अपनी पीड़||ऊंचे भवन बना लिए, पैसा किया निवेश|दूर हुआ जब प्रकृति से, पनपे सभी कलेश||खान-पान बदले सभी, फास्ट-फूड…
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चुगली रस – विनोद सिल्ला

चुगली रस hindi doha || हिंदी दोहा मीठा चुगली रस लगे, सुनते देकर ध्यान। छूट बात जाए नहीं, फैला लेते कान।।चुगलखोर सबसे बुरा, कर दे आटोपाट।नारद से आगे निकल, सबकी करता काट।।चुगली सबको मोहती, नर हो चाहे नार।चुगली के फल तीन हैं, फूट द्वेष तकरार।।चुगली निंदा जो करें, सही नहीं वो लोग।चुगल पतन की ओर है, पड़े भोगना सोग।।चुगली…
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आहट पर कविता – विनोद सिल्ला

आहट पर कविता Kavita Bahar || कविता बहार सिंहासन खतरे मेंहो ना होसिंह डरता है हर आहट सेआहट भीप्रतीत होती है जलजलाप्रतीत होती है उसे खतरावह लगा देता हैऐड़ी-चोटी का जोरकरता है हर संभव प्रयासआहटों को रोकने काअंदर से डरा हुआताकतवर हो कर भीडरता है बाहर कीहर आहट सेमान लेता है शत्रुतमाम अहिंसक व शाकाहारी निरिह जानवरों को करता है ताउम्र मारकाटमारता…
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अब तो भर्ती-विनोद सिल्ला

अब तो भर्तीअब तो भर्ती खोलिए, बहुत हुआ सरकार। पढ़-लिखकर हैं घूमते, युवा सभी बेकार।। नयी-नयी नित नीतियां, सत्ता ने दी थोप।रोजगार की खोज में, चले युवा यूरोप।।जितना जो भी है पढ़ा, दे दो वैसा काम।वित पोषण हो देश का, सुखी रहे आवाम।।पढ़-लिखकर भी बन रहे, मजबूरन मजदूर। ठोकर दर-दर खा रहे, पीड़ा है भरपूर।।छाला छाती पर हुआ, बढ़ती जाए…
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नशा नाश करके रहे- विनोद सिल्ला

यहां पर नशा नाश करके रहे , जो कि नशा मुक्ति पर लिखी गई विनोद सिल्ला की कविता है। नशा नाश करके रहे नशा नाश करके रहे,नहीं उबरता कोय।दूर नशे से जो रहे, पावन जीवन होय।।नशा करे हो गत बुरी, बुरे नशे के खेल।बात बड़े कहकर गए,नशा नाश का मेल।।नशा हजारों मेल का, सभी नशे बेकार।जिसे नशे की लत लगी, लुट जाए घर-बार।।काया को जर्जर करे, सदा रहे…
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भाई पर दोहा – विनोद सिल्ला

भाई पर दोहा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा भाई दूज Karthik Shukla Pratipada Bhai Dooj भाई जैसा आसरा, भाई जैसा प्यार।देख जगत सारा भले, भाई है संसार।।भाई तज जोभी करे,सकल कार व्यवहार। आधा वो कमजोर हैं, जग में हो तकरार।।परामर्शदाता सही, भाई जैसा कौन।भाई से मत रूठिए, नहीं साधिए मौन।।रूठे बचपन में बड़े, जाते पल में…
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बेरोजगार पर दोहे – विनोद सिल्ला

बेरोजगार पर दोहे hindi doha || हिंदी दोहा पढ़-पढ़ पोथी हो गए, सभी परीक्षा पास। रोजगार मिलता नहीं, टूटी जीवन आस।।उपाधियां तो मिल गई, नहीं मिला है काम।मिल तो जाती नौकरी, दे पाते गर दाम।।बेकारी सबसे बुरी, हर लेती है मान।सारा जीवन व्यर्थ सा, रहे कष्ट में जान।।रोजगार देंगे तुझे, वादे करते रोज।मतपेटी…
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विनोद सिल्ला की व्यंग्य कवितायेँ

यहाँ पर विनोद सिल्ला की व्यंग्य कवितायेँ प्रकाशित की गयी हैं आपको कौन सी अच्छी लगी कमेंट कर जरुर बताएँगे विनोद सिल्ला की व्यंग्य कवितायेँदो-दो भारतसंवेदनहीन क्यों?अल्लाहदीन का चिरागछोटी मछलीमैं हूँ साक्षीशहीद हो गईचुनाव की तैयारी धर्म की खिचड़ी हवा का रुख मोङने वालेजीत गया चुनावशूरवीरद्रौणों की…
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