April 2020

नारी चेतना पर कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी चेतना पर कविता ऐ! नारीतू करती है अराधनाउन अराध्यों कीजो हैं तेरे दोषीकिया शोषण सदैवजिन्होंने तेरा समझा तुझेश्रंगार-रस कीविषय-वस्तुनहीं दिया हकसमानता काकिया सदैव भेदभाव गवाह हैं इस सबकेअनेक धर्म-ग्रंथजो चीख-चीख करकरते हैं ब्यानतेरे शोषण की कहानी -विनोद सिल्ला©

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मीन सिंधु में दहक रही

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मीन सिंधु में दहक रही बड़वानल की लपटों में घिरमीन सिंधु में दहक रही।आग हृदय की कौन बुझाएनदियाँ झीलें धधक रही।। मौन हुई बागों में बुल बुलधुँआ घुली है पुरवाईसन्नाटों के ढोल बजे हैंशोक मनाए शहनाई अमराई में बौर झरे सबबया रुदन मय चहक रही।बड़वानल……………….।। सृष्टा का वरदान बताकरशोषण किया धरोहर काभँवरे ने भी खून

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जल संरक्षण पर कविता

हिंदी कविता

जल संरक्षण पर कविता आओ जल की तलाश करें,जीवों के लिए खास करें ।इसकी महत्ता को पहचानें,जल बचाने की बात करें । आओ नल टोटी को बंद करें,जरूरत तक ही उपयोग करें।जल संरक्षण के बारे में,मिलकर यह संवाद करें। आओ मानव कर्म करें,फल की चिंता न करें ।अपना कर्तव्य चलो निभाएं,जल संरक्षण पर अभियान चलाएं।~~~~~~~~~~~~~~~~~रचनाकार

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कोरोना की मार पर कविता

हिंदी कविता

कोरोना की मार पर कविता गाँव गली सुनसान पड़े हैं।शहर भी तो वीरान पड़े हैं।कोरोना का कहर,आदमी को नाच नचा रहा।हाहाकार मची है दुनिया में,इटली,फ्रांस,ईरान बता रहा।हमारी स्थिति भी कहीं कभी,इटली ईरान सी न हो जाये।पूरी दुनिया हाँ पूरी दुनिया को,ये एकमात्र डर सता रहा।उनकी तुलना में हम भारतकहीं नहीं टिकते हैं।तो अपने लिए हाँ

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नाम पर कविता

हिंदी कविता

नाम पर कविता अक़्सर मुझेमेरे कानों मेंसुनाई दे जाती हैमेरे नाम से पुकारती हुईमेरी दिवंगत माँ की आवाज़और घर के दूसरे कमरे में सो रहेबाबूजी की पुकार माँ की पुकार सुनमहज़ अपना वहम समझकरमौन संतुष्ट हो जाता हूँ पर जब जब बाबूजी केपुकारने की आवाज़ आती हैमेरे कानों में,हड़बड़ाकर चला जाता हूँउनके कमरे मेंऔर पूछता

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महागौरी पर कविता (कुंडलियाँ)

हिंदी कविता

महागौरी पर कविता : हिन्दुओं के शक्ति साम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है (शाक्त साम्प्रदाय ईश्वर को देवी के रूप में मानता है)। वेदों में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु उपनिषद में देवी “उमा हैमवती” (उमा, हिमालय की पुत्री) का वर्णन है। माँ दुर्गा

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पढ़ा-लिखा मूर्ख पर कविता

हिंदी कविता

पढ़ा-लिखा मूर्ख पर कविता मोहम्मद तुगलकतू हर बाररात के अंधेरे मेंकरता है जारीतुगलकी फरमानजो लागू होते हैंरात के अंधेरे में हीतू उजालों से डरता तो नहींअपने फरमान सुनाने से पूर्वकर लिया कर कुछ विचार विगत में भीजारी किए फरमानगलत नहीं थेसोने की जगहतांबे की मुद्रा चलानाउचित निर्णय थाराजधानी बदलना भीउचित निर्णय थाउपयुक्त तैयारी का अभावरहा

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