April 2020

परिश्रम पर कविता

हिंदी कविता

परिश्रम पर कविता वो मेहनतकशकरता रहा कड़ा परिश्रमफिर भी रहा अभावग्रस्तउसके श्रमफल परकरते रहे अय्याशीपूंजीपतिधर्म के नाम परकरते रहे शोषणधर्म के ठेकेदारसमानता के नाम परबटोरते रहे वोटकुटिल सियासतदानमेहनतकश के हालातरहे जस के तसजबकि उसके हक मेंलगते रहे नारेबनते रहे संगठनहोती रही राजनीतिआज तलक -विनोद सिल्ला©

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जंगल पर कविता

हिंदी कविता

जंगल पर कविता अब धीरे-धीरे सारा शहरशहर से निकलकर घुसते जा रहा है जंगल मेंआखिर उसे रोकेगा कौन साथी…?शहर पूरे जंगल को निग़ल जाएगा एक दिनआने वाली हमारी पीढ़ी हमसे ही पूछेगीखो चुके उस जंगल का पताहम क्या जवाब देंगे उन्हेंशहर की ओर इशारा करते हुए कहेंगेयही तो है बाकी बचा तुम्हारे हिस्से का जंगलहमारे

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छिपे चंद्रिका से हम बैठे

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छिपे चंद्रिका से हम बैठे छिपे चंद्रिका से हम बैठेकक्षों में पर्दे लटके।धूप सुहाती नही आज क्योंतारों की गिनती खटके। प्राकृत की छवि कानन भूलेदेख रहे तरु चित्रों कोवन्य वनज वन जीव उजाड़ेभूल गये खग मित्रों को विहग नृत्य की करे कल्पनाखग मृग व्याल मनुज गटके।छिपे चंद्रिका……….।। निज संस्कृति के झूले मेलेकिले महल मरु धोरे

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दीया पर कविता

हिंदी कविता

दीया पर कविता आओ मिलकर दीप जलाएं,सब दुखों को दूर भगाएं।अंधकार हमें मिटाना है,दीपक सभी को जलाना है।उम्मीद का दीया जलाना है,रोशन होगा चारों दिशा।दिल से अंधकार मिटाना है,प्रकाश पर्व हमें मनाना है,गरीब अंधकार मे जी रहे,उन्हें भी अब रोशन करना है।कितने घर निराश से घिरे,उन्हें भी प्रकाश फैलाना है।दिल में प्रकाश जगाना है,सबको दीप

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नीम-हकीम खतरा-ए-जान

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नीम-हकीम खतरा-ए-जान आए बिल्ली जबबंद कर लेते हैं आँखेंसभी कबूतरताकि टल जाए संकटआँखें बंद नहींलाइट बंद करने केआदेश हैं साहब केलेकिन साहबहम कबूतर नहींऔर वो भी बिल्ली नहीं नीम-हकीम खतरा-ए-जानपुख्ता इंतजाम कीजिएइसे गंभीरता से लीजिएटौने-टोटके हमबाद में कर लेंगेफिलहाल तोकोई रणनीति बनाइएसंकट से उबरने की –विनोद सिल्ला©

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मन का तामस पर कविता

हिंदी कविता

मन का तामस पर कविता हो तमस का घोर अंधेरा,तो तुम यूँ घबराना ना।गर पग डगमगाए तुम्हारे,तो मिलकर साथ निभाना।हाथ उठाकर प्रण करो तुम,मिलकर बोझ उठाना ना।गर अंतरतम में छाए अंधेरा,विश्वास का दीप जलाना ना।गर गली का दीप बुझा हो,अपने घर का दीप बुझाना ना।गर चुनौती कठिन लगे तो,विपदा को पीठ दिखाना ना।चित चंचल चितवन

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कोरोना में दीप जलाये फिर से यार

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कोरोना में दीप जलाये फिर से यार चलो दीप जलाए फिर से यारकी जगमग दीप जलेकोरोना दूर भगाओ घर से यारकी जगमग द्वार करें…… 5 अप्रैल दिन रविवाररात 9 बजे सब दीप जलाए9 मिनट बीजली बुझाओ मेरे यारकि जगमग दीप जले …… कोरोना योद्धाओं की मनोबल बढ़ाओकोरोना रुपी तम को दूर भगाओसोशल डिस्टेंस का रखो

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वर्दी के सम्मान पर कविता

मन और भावनाएँ

वर्दी के सम्मान पर कविता १बलिदानी पोशाक है, सैन्य पुलिस परिधान।खाकी वर्दी मातृ भू, नमन शहादत मान।।२खाकी वर्दी गर्व से, रखना स्व अभिमान।रक्षण गुरुतर भार है, तुमसे देश महान।।३सत्ता शासन स्थिर नहीं, स्थिर सैनिक शान।देश विकासी स्तंभ है, सेना पुलिस समान।।४देश धरा अरु धर्म हित, मरते वीर सपूत।मातृभूमि मर्याद पर , आजादी के दूत।।५आदि काल

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लोग क्या कहेंगे पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

लोग क्या कहेंगे पर कविता वो नहीं समझ सकतेआजादी का महत्वजो आजाद हैं आजादी का महत्वजानता है बंधुआ मजदूरजिसे जबरनरखा जाता है काम पर या पूछिए अछूतों सेजिन्हें नहीं मिलीआज तलक आजादीजिन्हें धर्मग्रंथआज भी करते हैं प्रताड़ित या फिरबता सकती हैं महिलाएंलगाए गये हैं जिन परकितने अंकुशकहा जाता है बात-बात परलोग क्या कहेंगे? -विनोद सिल्ला©

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कोंपल पर कविता

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कोंपल पर कविता फागुन राह निहारे कब सेआओ भँवरे अमराईपछुआ पवन ताप ले आओहृदय शीत हर पुरवाई कोयल की मृदु तान सुनी तोवसन वृक्ष भी त्याग रहेवन्य जीव मन मीत मनानेआगे पीछे भाग रहे विरहा देख रही आँगन मेंबया युगल की चतुराई।फागुन………………।। बहक रहा यौवन प्राकृत काखड़ी लिए माला चंदनपतझड़ से अंतस कानन मेंमधुमासी सा

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माँ सिद्धिदात्री पर कविता

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माँ सिद्धिदात्री पर कविता माता दुःखनिवारिणी ,सभी सुखों की धाम।सिद्धिदात्री रूप नवम,छविअम्बाअभिराम।।छवि अम्बा अभिराम, करो मात आराधना।करती भव से पार ,शक्ति की करो साधना।।कहता कवि करजोरि, छूटता दुख से नाता।करता है जो भक्ति , मुक्ति देती है माता।।????करता है जो मात की, जप तप पूजा ध्यान।करती देवी भक्त के , कष्टों का अवसान।।कष्टों का अवसान

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लड़कीयों की दशा पर कविता

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लड़कीयों की दशा पर कविता एक लड़की कोदेखा हूँतीन वर्ष की थी वहमाँ की स्तन की दूधकुछ दिन पहले ही छोड़ी थीनाक बह रही थी उसकीचौबीसों घंटे कीदिन मेंवह बहुत सारीरूप धारण करती थीवह खाना पकाईटूटे माटी की हांड़ी मेंपत्थर की चूल्हे परलकड़ी की जलावन सेसब्जी भाजी बनाईलहसुन की छौंक भी लगाईबहुत स्वादिष्टमुँह में पानी

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