August 2021

उसे रूह में समाया है

हिंदी कविता

रूह में समाया है माना के उसके जिस्म को भी मैंने चाहा हैमगर उस से ज्यादा उसे रूह में समाया है l ये सावन उसको भुलाने नहीं देता मुझकोबारिश में उसकी यादों के लम्हे ले आया है l जब चाँद की चांदनी में निकलता हूँ घर सेमेरा साया भी लगता मुझे उसका साया है l […]

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छत्तीसगढ़ दर्शन

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ दर्शन टिकली अस बलरामपुर ,जिंहा सुग्घर ताता पानी।सूरजपुर म कुदरगढ़ी हे,कोरिया ले हसदो पानी। नागलोक जशपुर कुनकुरी,सीताबेंगरा सजे सरगुजा।जामवंत पेंड्रा मरवाही ,कोरबा म कोईला दूजा। कबरा गूफा रायगढ़ वाला,जांजगीर म दमउदहरा।बिलासा माई के बिलासपुर,मुंगेली मदकु दीप हे गहरा। कूशियार अस मीठ कवर्धा,गिधवा ह उड़थे बेमेतरा,चलौ बलौदा गुरु धाम ए,महासमुंद नदी के धारा। राजधानी हे

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भगत सिंह का पुकार

हिंदी कविता

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद भगत सिंह जी का कार्य व देश के लिए योगदान का उल्लेख कविता के माध्यम से किया गया है।

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NATURE

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन- विभा श्रीवास्तव

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन किलकारियाँ, खिलखिलाहट, अठखेलियाँ हवा के संग ….हमे बहुत याद आता है।बादलो का गर्जना ,बिजलियों का कड़कना ,और इन्द्रधनुष के रंग….हमे भी डराता और हसाता है। तितलियों का उड़ना ,भौरो का गुनगुनाना ,ये सब …..तुम्हे भी तो भाता है।सब कुछ था,है ,पर…..रहेगा या नही ,ये नही पता…, बरसो से खड़े रहकर

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क्यों जाति की बात करें

हिंदी कविता,

क्यों जाति की बात करें(१६,१६) जब जगत तरक्की करता हो,देश तभी उन्नति करता है।जब मानव सहज विकास करे,क्यों जाति द्वेष की बात करें। जाति धर्म मे पैदा होना,मनुजों की वश की बात नहीं,फिर जाति वर्ग की बात करेंयह सच्ची अच्छी बात नहीं। माना जो पहले बीत गया,कुछ कर्मी वर्ग अवस्था थी,नवयुग मे नया प्रभात करें,क्यों

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प्रकृति का प्रचंड रूप

प्रकृति का प्रचंड रूप

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

पर्यावरण संरक्षण के लिए पृथ्वी के उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग ही मानव जीवन के लिए उपयुक्त है।

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