उसे रूह में समाया है
हिंदी कवितारूह में समाया है माना के उसके जिस्म को भी मैंने चाहा हैमगर उस से ज्यादा उसे रूह में समाया है l ये सावन उसको भुलाने नहीं देता मुझकोबारिश में उसकी यादों के लम्हे ले आया है l जब चाँद की चांदनी में निकलता हूँ घर सेमेरा साया भी लगता मुझे उसका साया है l […]
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