March 2023

star

भोर का तारा एक आशावादी कविता

प्रकृति और पर्यावरण

भोर का तारा पद्ममुख पंडा के द्वारा रचित आशावादी कविता है जिसमें उन्होंने प्रकृति का बेहद सुंदर ढंग से वर्णन किया है। साथ में यह भी बताया है कि किस तरह से रात्रि के बाद दिवस हो रहा है अभिप्राय दुख के बाद सुख का आगमन हो रहा है। भोर का तारा. एक आशावादी कविता […]

भोर का तारा एक आशावादी कविता Read More »

Jai Sri Ram kavitabahar

अखिल विश्व के राम / सुशील शर्मा

हिंदी कविता

राम प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया राम राष्ट्र की जीवन धारा नवगीतसुशील शर्मा अखिल विश्व के राम / सुशील शर्मा राम राष्ट्र की जीवन धाराअखिल विश्व के राम हैं।जन जन के हृदयों में बसतेराम प्रेम के धाम हैं। जीवन की सुरभित

अखिल विश्व के राम / सुशील शर्मा Read More »

Jai Sri Ram kavitabahar

जन-जन के प्रिय राम / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

हिंदी कविता

 उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया जन-जन के प्रिय राम / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ नित सुबह, दोपहर,शाम,तुम्हें ध्याऊॅ आठों याम।हे जन-जन के प्रिय राम-स्वीकारो मेरा प्रणाम।टेक। क्षिति-जल-अम्बर तुम ही तुम हो,सृष्टि-अनश्वर तुम ही तुम हो,तुमसे ही गतिमान धरा है-सौम्य,भयंकर तुम ही

जन-जन के प्रिय राम / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ Read More »

जीवन भर का संचित धन हिंदी कविता

हिंदी कविता

जीवन भर का संचित धन हिंदी कविता सांध्य परिदर्शन गृह का पृष्ठ भाग उपवन है,तरु, लता, वनस्पति सघन है,मेरी यह दिनचर्या में शामिल,जीवन भर का संचित धन है! प्रातः पांच बजे उठकर जब,इधर उधर नज़रें दौड़ाता,मेरा गांव , वहां का जीवन,सहसा याद मुझे अा जाता! मेरे पिता माता को उर में,सजा रखा है, ज्योति जगा

जीवन भर का संचित धन हिंदी कविता Read More »

रानी दुर्गावती पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

रानी दुर्गावती पर कविता- भारत में जब भी महिलाओं के सशक्तिकरण की बात होती है तो महान वीरांगना रानी दुर्गावती की चर्चा ज़रूर होती है। रानी रानी दुर्गावती न सिर्फ़ एक महान नाम है बल्कि वह एक आदर्श हैं उन सभी महिलाओं के लिए जो खुद को बहादुर मानती हैं रानी दुर्गावती पर कविता जब दुर्गावती रण

रानी दुर्गावती पर कविता Read More »

नंदावत हे बिसरावत हे

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता नंदावत हे बिसरावत हे अनिल जांगड़े द्वारा रचित है जिसमें बताया गया है कि किस प्रकार से वक्त के साथ बहुत सारी चीजें अनुपयोगी होकर उनके स्थान पर दूसरी वस्तु ले जाती है। नंदावत हे बिसरावत हे पुरखा मन के बनाये रीति हदेख धीरे धीरे सिरावत हेगाॅंव गॅंवई के हमर चिनहारीनंदावत हे बिसरावत

नंदावत हे बिसरावत हे Read More »

village based Poem

मोर गांव मोर मितान

हिंदी कविता

मोर गांव मोर मितान जिसके रचनाकार अनिल जांगड़े जी हैं । कविता ने ग्रामीण परिवेश का बहुत सुंदर वर्णन किया है। आइए आनंद लें । मोर गांव मोर मितान मोर गाॅंव के तरिया नदिया,नरवा मोर मितानरूख राई म बसे हवय जी,मोर जिंनगी परान। गली खोर के मॅंय हंव राजा,दुखिया के संगवारी हंवदया धरम हे सिख

मोर गांव मोर मितान Read More »

छत्तीसगढ़ कविता

कविता : छत्तीसगढ़ निर्माण में अखण्ड धरना आंदोलन पर दोहा / श्रीमती आशा आजाद

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ निर्माण में अखण्ड धरना आंदोलन नामक हिन्दी कविता छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए किये गये संघर्ष पर आधारित हिंदी दोहावली है. छत्तीसगढ़ निर्माण में अखण्ड धरना आंदोलन राज्य शुभे छत्तीसगढ़, प्रेम अमिट विश्वास ।धरना अखंड जो चला, उसका है इतिहास ।। उन्नीसी पंचानवें, धरना शुरु था जान ।दशम दिसंबर तक चला, अमिट पृथक पहचान

कविता : छत्तीसगढ़ निर्माण में अखण्ड धरना आंदोलन पर दोहा / श्रीमती आशा आजाद Read More »

mother their kids

माँ पर गजल

हिंदी कविता

यहां पर माधुरी डर सेना द्वारा माँ पर बेहतरीन ग़ज़ल लिखा गया है।यहाँ मान पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ पर गजल बड़ी खूबसूरत सी सौगात

माँ पर गजल Read More »

शिवरात्रि पर कविता

हिंदी कविता

शिवरात्रि पर कविता शिव को ध्याने के लिए लो आ गई रात्रि।मौका मिला है शिव की करने को चाकरी। शिव को मनाने के लिए बस श्रद्धा चाहिए।शिव को पाना जो चाहो तो नजरिया चाहिए।हो मुक्कमल सफ़र अपना और जाए यात्री। हम जन्म मरण से मुक्त हों और पाएं मोक्ष को।मंजिल कठिन हो चाहे पर अर्जुन

शिवरात्रि पर कविता Read More »

आज कल अवसाद से गुजर रहा हूं मैं

हिंदी कविता

*ग़ज़ल* आज कल अवसाद से गुज़र रहा हूं मैं। बिना तेरे निबाह! कैसे उमर रहा हूं मैं। एक उम्र तक जिंदगी से गिला न रहा, जिंदगी के साये से अब डर रहा हूं मैं। तू था साथ,तो हसीन थे दिन रात मेरे, अब पशोपेश से दो चार कर रहा हूं मैं। नाकाम आशिक,सौदाई भी नहीं

आज कल अवसाद से गुजर रहा हूं मैं Read More »

शिव महिमा कविता

नारी जीवन और संवेदना

शिव महिमा कविता शिव शिवा शिव शिवा शिव शिवा ।शिव शव हैं……शिवा के सिवा। शिव अपूर्ण हैं शक्ति के बिनाशक्ति कब पूर्ण हैं शिव के बिनाअनुराग का सत इनका है वफ़ा। लोचन मोचन वि..मोचन सबल तुम होकांति चमक दामिनी सकल तुम होकायनात का कण तूने है रचा। वो अर्धनारी वो अर्धपुरुष हैंऋषि मुनि के हर तो

शिव महिमा कविता Read More »

Scroll to Top