सुमति छंद (भारत देश) बासुदेव अग्रवाल
हिंदी कविताहम विकास के पथ-अनुगामी।
सघन राष्ट्र के नित हित-कामी।।
सुमति छंद (भारत देश) बासुदेव अग्रवाल Read More »
हम विकास के पथ-अनुगामी।
सघन राष्ट्र के नित हित-कामी।।
सुमति छंद (भारत देश) बासुदेव अग्रवाल Read More »
श्री रामनवमी के अवसर पर यह रचना मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के प्रति जन जन की आस्था को समर्पित है।
रचना विधा – कविता
शीर्षक – जननायक राम
रचयिता – श्रीमती ज्योत्स्ना मीणा
जननायक राम / श्रीमती ज्योत्स्ना मीणा Read More »
इस कविता में वर्तमान सामाजिक परिदृश्य को समाहित किया गया है |
आज जिंदगी बेमानी हो गई है – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
आज जिंदगी बेमानी हो गई है – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम” Read More »
इस कविता में जीवन के हर एक क्षण को नव वर्ष की तरह उत्सव के रूप में मनाने पर जोर दिया गया है |
हर एक दिन को नए वर्ष की – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
हर एक दिन को नए वर्ष की – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम” Read More »
इस कविता में धरती की पावनता को बनाए रखने के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास किया गया है |
धरती माँ तुम पावन थीं – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
धरती माँ तुम पावन थीं – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम” Read More »
इस रचना में गणेश जी की वंदना की गयी है |
गणेश वंदना – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
गणेश वंदना – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम” Read More »
इस रचना में कवि असमंजस की स्थिति में है | उसे विषय ही नहीं सूझ रहा जिस पर वह अपने विचारों को अपनी कलम के माध्यम से साकार कर सके |
कोरा कागज़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
कोरा कागज़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम” Read More »
वन्दनवार:भारतीय के शत्रु हैं भारतीय ही आज =================गुरु की आज्ञा मानकर, केरल की छवि देख। रहने वालों पर लिखे, सबने सुन्दर लेख। १।सबके लेखों में मिले, जीवन सुखमय गान। शंकर के इस लेख को, मिली अलग पहचान।२। भारतीय हैं मानते, अतिथि देव की रीति ।इसीलिए आगंतुकों, से करते हैं प्रीति ।३।किन्तु परस्पर हैं बँटे, पाने
वन्दनवार:भारतीय के शत्रु हैं भारतीय ही आज Read More »
इस रचना को झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को समर्पित किया गया है इसमें उनकी चारित्रिक विशेषताओं की झलक मिलती है |झाँसी की रानी- एक श्रद्धांजलि – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
झाँसी की रानी- एक श्रद्धांजलि – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम” Read More »