बेख़याल – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
समाज और यथार्थइस रचना में एक “विक्षिप्त व्यक्ति” को चरित्र के रूप में पेश किया गया है जिन्हें हम पागल कह मरने के लिए छोड़ देते हैं | उसके पागल होने की वजह शायद हम जानना नहीं चाहते |
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