फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा/ रेखराम साहू
हिंदी कविता— फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा— फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा।यह तमाशा देखकर फ़रियाद है रोने लगा।। पाप दामन में बहुत हैं,पर उसे परवाह कब?गंग वह उल्टी बहाकर दाग़ है धोने लगा।। इस क़दर उसकी हवस है आसमां को छू रही।पाँव में पर लग गए जब वह ज़मीं खोने लगा।। वक़्त […]
फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा/ रेखराम साहू Read More »






