कविता बहार

फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा/ रेखराम साहू

हिंदी कविता

— फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा— फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा।यह तमाशा देखकर फ़रियाद है रोने लगा।। पाप दामन में बहुत हैं,पर उसे परवाह कब?गंग वह उल्टी बहाकर दाग़ है धोने लगा।। इस क़दर उसकी हवस है आसमां को छू रही।पाँव में पर लग गए जब वह ज़मीं खोने लगा।। वक़्त […]

फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा/ रेखराम साहू Read More »

परशुराम की प्रतीक्षा / रामधारी सिंह "दिनकर"

परशुराम की प्रतीक्षा / रामधारी सिंह “दिनकर”

समाज और यथार्थ

परशुराम की प्रतीक्षा ChatGPT said: ChatGPT “परशुराम की प्रतीक्षा” कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की एक प्रसिद्ध कविता है, जिसमें कवि ने समाज में व्याप्त अन्याय, अत्याचार, और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नए परशुराम के अवतरण की प्रतीक्षा का वर्णन किया है। इस कविता में परशुराम का प्रतीक उन सभी शोषित और पीड़ित लोगों की आशाओं

परशुराम की प्रतीक्षा / रामधारी सिंह “दिनकर” Read More »

struggle

बाधाओं से भय न हमें हम तूफानों में चलते हैं

हिंदी कविता

बाधाओं से भय न हमें हम तूफानों में चलते हैं बाधाओं से भय न हमें, हम तूफानों में चलते हैं ।। पथ चाहे घोर अँधेरा हो, दु:ख द्वंद्वों ने जब घेरा हो।हो महा वृष्टि भीषण गर्जन, करता हो महाकाल नर्तन।पर कब किससे डरने वाले, हम संघर्षों में पलते हैं।हम तूफानों में चलते हैं। बाधाओं से

बाधाओं से भय न हमें हम तूफानों में चलते हैं Read More »

Hindi Poem ( KAVITA BAHAR)

वह नूर पहचाना नहीं/ रेखराम साहू

हिंदी कविता

वह नूर पहचाना नहीं/ रेखराम साहू क्या ख़ुदा की बात,अपने आप को जाना नहींं।साँच है महदूद,मेरी सोच तक माना नहीं ।। ज़िंदगी हँसकर,रुलाकर मौत यह समझा गईं।दुश्मनी है ना किसी से और याराना नहीं।। यह हवस की राह राहत से रही अंजान है।दौड़ना-चलना मग़र मंज़िल कभी पाना नहीं।। हाय होती है ग़रीबों की हमेशा आतिशी।राख़

वह नूर पहचाना नहीं/ रेखराम साहू Read More »

radha shyam sri krishna

क्यों? प्रीत बढ़ाई कान्हा से

Uncategorized

क्यों? प्रीत बढ़ाई कान्हा से झलकत, नैनन की गगरियाँ,झलक उठे, अश्रु – धार,क्यों? प्रीत बढ़ाई कान्हा से,बेहिन्तहा, होकर बेकरार! तड़पत – तड़पत हुई मै बावरी,ज्यों तड़पत जल बिन मछली,कब दर्शन दोगे घनश्याम,बिन तेरे अँखियाँ अकुलांई! क्यों? प्रीत बढ़ाई कान्हा से, बेहिन्तहा, होकर बेकरार,! मुझे अपनी बाँसुरियाँ बना लौ,वर्ना, प्रीत मोहे डस लेगी,दरसन मै, तेरे, बाँसुरियाँ

क्यों? प्रीत बढ़ाई कान्हा से Read More »

goverdhan shri krishna

मीत बना कर लो रख हे गिरधारी/गीता द्विवेदी

हिंदी कविता

मीत बना कर लो रख हे गिरधारी (1) आकर देख जरा अब हालत मैं दुखिया बन बाट निहारी।श्यामल रूप रिझा मन मीत बना कर लो रख हे गिरधारी।काजल नैन नहीं टिकता गजरा बिखरे कब कौन सँवारी।चाह घनेर भयो विधि लेखन टारन को अड़ते बनवारी।। (2) कातर भाव पुकार रही हिरणी प्रभु आकर प्राण बचाओ।नाहर घेर

मीत बना कर लो रख हे गिरधारी/गीता द्विवेदी Read More »

goverdhan shri krishna

मेरे गिरधर, मेरे कन्हाई जी / रचयिता:-डी कुमार–अजस्र

हिंदी कविता

प्रस्तुत गीत या गेय कविता/भजन —- मेरे गिरधर, मेरे कन्हाई जी —डी कुमार–अजस्र द्वारा स्वरचित गीत या भजन के रूप में सृजित है ।

मेरे गिरधर, मेरे कन्हाई जी / रचयिता:-डी कुमार–अजस्र Read More »

goverdhan shri krishna

गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव                      जन्म  उत्सव मोहन का,  देखन देव महान।भेष  बदल  यादव  बनें  ,यशोदा के मकान ।। सब  देवों  की नारियाँ ,ले मन  पावन  प्रीत। बनी  रूप  तज  गोपियाँ ,गाती  मंगल गीत।। रमे   मुरारी   प्रेम   में , बैठे   शम्भु   उदास।चलो नाथ गोकुल चलें,कहीं सती आ पास।। शम्भु  मदारी  बन  गये , डमरू लेकर  हाथ।गोकुल 

गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव – बाबूराम सिंह Read More »

radha shyam sri krishna

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा-केवरा यदु “मीरा “

Uncategorized

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा ।आओ कन्हाई आओ कन्हाईतुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा—- कान्हा तूने राधा से प्रीत लगाकरभूले हो कैसे मोहन मथुरा में जाकर ।गोकुल की गलियों में फिरती है बावरी सीतन की सुध बिसराई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा ।।तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा-केवरा यदु “मीरा “ Read More »

shri Krishna

नटखट नंद किशोर- नीरामणी श्रीवास

हिंदी कविता

नटखट नंद किशोर चोरी करके छुप गया , नटखट नंद किशोर ।सभी गोपियाँ ढूँढती , प्यारा माखन चोर ।।प्यारा माखन चोर , शिकायत माँ से करते ।दधि की मटकी फोड़ , चैन हम सबकी हरते ।।नियति कहे कर जोड़ , अनूठी लीला तोरी ।प्रेम भक्ति की मान , बचाने करते चोरी ।। चोरी करते देखकर

नटखट नंद किशोर- नीरामणी श्रीवास Read More »

radha shyam sri krishna

राधा और श्याम की प्रेम कविता

हिंदी कविता

राधा और श्याम की प्रेम कविता तू मेरी राधा मैं तेरा श्याम हूं।तुमसे प्रेम करके मैं बदनाम हूं। तुझे देखें बिन ,मेरी जीवन की बांसुरी में सूर कहां? तू है मेरे साथ तो सुंदर लगता है,यह सारा जहां। बस तेरी ही धुन में रमे रहूं बस दिन रात तेरा नाम लूं। तू मेरी राधा मैं

राधा और श्याम की प्रेम कविता Read More »

Scroll to Top