कविता बहार

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हो मुरलिया रे / केवरा यदु “मीरा”

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हो मुरलिया रे / केवरा यदु “मीरा” हो मुरलिया रे तँय का का  दान पुन करे हस।तँय का का दान पुन करे हस।तोर बिना राहय नहीं कान्हा ओकरे संग धरे हस।तँय का का दान पुन करे हस।। सुन रे मुरलिया तोर भाग जबर हे कान्हा के संग रहिथस।मोहना के हिरदय के बात ला अपने धुन […]

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कृष्ण रासलीला

नारी जीवन और संवेदना

कृष्ण रासलीला लीला राधे कृष्ण सम,आँख उठा के देख।लाख कोटि महा शंख में,लख लीला है एक।। सब देवों की नारियाँ,कर नित साज सिंगार।गमन करें शुचि रास में ,बन ठन हो तैयार।। कृष्णप्रेम विह्वल शम्भु,निज मन कियो विचार।राधे कृष्ण प्रेम परम ,जा देखूँ इक बार।। शिव गौरा से जा तभी,कहने लगे सकुचाय।रास लखन मै भी चलूँ

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हे नटनागर हे गिरधारी – भजन अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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यह एक भजन है जिसमे कान्हा की भक्ति एवं उनकी कृपा प्राप्ति का प्रयास किया गया है |
कंचन कर दो काया मेरी , हे नटनागर हे गिरधारी – भजन – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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गोवर्धन कर धरते हो/ प्रवीण त्रिपाठी

नारी जीवन और संवेदना

गोवर्धन कर धरते हो/ प्रवीण त्रिपाठी नटवर नागर प्यारे कान्हा, गोवर्धन कर धरते हो।इंद्र देव का माधव मोहन, सर्व दर्प तुम हरते हो। ब्रज मंडल के सब नर-नारी, इंद्र पूजते सदियों से।लीलाधारी कृष्ण चन्द्र को, कभी न भाया अँखियों से।उनके कहने पर ब्रजवासी, लगे पूजने गोवर्धन।देवराज का दम्भ तोडने, लीलाएँ नव करते हो।1 गोवर्धन का

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कृष्ण रंग रंगी मीरा /अर्चना पाठक

नारी जीवन और संवेदना

कृष्ण रंग रंगी मीरा/ अर्चना पाठक तज महल अटारी ,कर सितार लिये गली गली श्याम संग घूमी मीरा । वीणा के तार कृष्ण दास हुये भक्ति के रंग में रंगी मीरा । पराधीनता की गहरी टीस लिये। विरक्ति के गीत में रमी मीरा। परिजनों के क्रोध और विद्रोह सहे। सदा कृष्ण भक्ति में लीन मीरा।

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श्री कृष्ण स्तुति

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श्री कृष्ण स्तुति सीता – छंद परिचय – पंचदशाक्षरावृत्ति गण-विन्यास–र त म य र SIS SSI SSS ISS SIS     –साँवरे श्रीकृष्ण मेरे दुर्गुणों को ही हरो।    औरकोई भी कमी को ध्यान में नाही धरो। मैं नवाऊँ माथ गोपीनाथ नैया तार दो। दीनता मेरी मिटाके दोष सारे मार दो।।   मान लो मैं

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राधा पुकारे तोहे श्याम- केवरा यदु मीरा की भजन

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जिसका प्रकार भक्तिकाल में मीरा अपने श्रीकृष्ण के भक्ति में रंग गई थी, वैसे ही आज राजिम की कवयित्री केवरा यदु मीरा अपने श्याम के रंग में रंगकर अपना भजन लिखी जा रही है. उनके भजन संग्रह में से

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गिरिराज गोवर्धन की महिमा

हिंदी कविता

गिरिराज गोवर्धन की महिमा संसार में भक्ति प्रेम अनुरक्ति से मिलता छप्पर फाड़।ब्रज वासियों की रक्षा में उठाये कृष्ण गोवर्धन पहाड़। द्वापर युग की बात,क्यों पूजन करें हम इंद्र देवता को।जब गिरि गोवर्धन चारा दें,सिचिंत करें धरती मात को।जिनसे हम ब्रज वासियों को,मिलता है लाभ साक्षात।पूजन करें गिरि गोवर्धन की,सह लेंगें इंद्र के ताप को।जब

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श्रीकृष्ण पर कविता – रेखराम साहू

हिंदी कविता

श्रीकृष्ण पर कविता – रेखराम साहू महाव्याधि है मानवता पर, धरा-धेनु गुहराते हैं।आरत भारत के जन-गण,हे कान्हा! टेरते लगाते हैं।। चित्त भ्रमित संकीर्ण हुआ है,हृदय हताहत जीर्ण हुआ है।धर्मभूमि च्युतधर्म-कर्म क्यों,अघ अधर्म अवतीर्ण हुआ है ।।संस्कृति के शुभ सुमन सुगंधित शोकाकुल झर जताते हैं।महाव्याधि मानवता पर है,धरा- धेनु गुहराते हैं।। काल,काल-कटु कंस हुआ है,तम-त्रिशूल विध्वंस

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श्रीकृष्ण पर कवितायें- जन्माष्टमी पर्व विशेष

नारी जीवन और संवेदना

श्रीकृष्ण पर कवितायें हठ कर बैठे श्याम, एक दिन मईया से बोले।ला के दे-दे चंद्र खिलौना चाहे तो सब ले-ले।हाथी ले-ले, घोड़ा ले-ले, तब मईया बोली।कैसे ला दूं चंद्र खिलौना, वो तो है बहुत दूरी। दूर गगन में ऐसे चमके, जैसे राधा का मुखड़ा।देख के ऐसा रूप सलोना कान्हा का मन डोला।राधा रानी को आज

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सम्पूर्ण श्री कृष्ण गाथा पर कविता

हिंदी कविता

सम्पूर्ण श्री कृष्ण गाथा कृष्ण लीलाकाली अँधेरी रात थी ,होने वाली कुछ बात थी ,कैद में थे वासुदेव,देवकी भी साथ थीं। कृष्ण का जन्म हुआ,हर्षित मन हुआ,बंधन मुक्त हो गए,द्वारपाल सो गए। एक टोकरी में डाल ,सर पर गोपाल बाल,कहीं हो न जाए भोर,चल दिए गोकुल की और। रास्ते में यमुना रानी,छूने को आतुर बड़ीं

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पृथ्वी माता पर कविता/  विजय कुमार कन्नौजे

हिंदी कविता

पृथ्वी माता पर कविता/  विजय कुमार कन्नौजे मां की गरिमा मां ही जानेंइनकी महिमा कौन बखानेमातृ भूमि को मेरा प्रणामसीना तानें जग को बचाने।। रसातल गगन बीच बैठकरसम भाव खुद में सहेज करपृथ्वी माता तुम्हें है प्रणामरक्षा कीजिए मां पुत्र मानकर हीरा पन्ना और सोना खानतेरी महिमा मां तुम ही जानखुशबू दिए मां तुम फुलों

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