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हिमा नजर आ रही है-सुरेन्द्र सैनी
तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है -बाँके बिहारी बरबीगहीया
रास नहीं क्यों आता है-राजकिशोर धिरही
आसाम प्रदेश पर आधारित दोहे-सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप”
प्रीत के रंग में-राजेश पाण्डेय *अब्र*
क्या होती है निराशा – धनेश्वर पटेल
हाँ ये मेरा आँचल-वर्षा जैन “प्रखर
बेटी हूँ आपकी-भागवत प्रसाद साहू
गाय गरुवा के हड़ताल
भारत माता रोती है -हृषिकेश प्रधान “ऋषि”
पिता होने की जिम्मेदारी – नरेन्द्र कुमार कुलमित्र
पितृ पक्ष का सच्चा श्राद्ध-धनंजय सिते(राही)
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