मदारी-दिलीप कुमार पाठक “सरस”
हिंदी कविता“मदारी” बँदरिया प्यारी, एक मदारी, लेकर आया|तन लटा, कपड़े फटे, पेट धँसा, फिर भी, जबर्दस्ती मुस्कराया||जेठ का महीना, भरी दोपहरी, चूता पसीना, डमरू बजाकर, बँदरिया नचाकर,
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“मदारी” बँदरिया प्यारी, एक मदारी, लेकर आया|तन लटा, कपड़े फटे, पेट धँसा, फिर भी, जबर्दस्ती मुस्कराया||जेठ का महीना, भरी दोपहरी, चूता पसीना, डमरू बजाकर, बँदरिया नचाकर,
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गरीबी का दर्द क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरीसुख गया है आंखों के पानीरिमझिम बारिश की फुहार मेंसमेट रखा है आंचल मेंगरीब तेरी कहानी कोउपहास बनायेगी ये दुनियातू कल भी फुटपाथ पर थाआज भी तेरी यही कहानी हैगरीब था तू गरीब रहेगावंचित तू अपने तकदीर से रहेगासुन गरीब लगा लें जोरअपना अस्तित्व बचा ले अबअब ना
गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी Read More »
हिमा नजर आ रही है हिम्मत तेरे हौसले मेंहिमा नजर आ रही हैदेश के तिरंगे का क्या खूब मान बढ़ा रही है उड़नपरी बन कर क्या खूब दौड़ लगाईचटा के धूल सबकोगोल्ड तू ले आई तेरा कद भी हिमा हिमालय से बडा हैदेश सारा तेरे लियपलके बिछाय खड़ा है बेटियों की हिम्मतनारी का तू मान है देश की उभरती
हिमा नजर आ रही है-सुरेन्द्र सैनी Read More »
तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है समझो इस जीवन को ये तो बहती धारा है। प्यार इजहार के लिए वक्त यूँ जाया न कर वक्त के साथ ये तो डूबता किनारा है।। ये जो रंगीन लम्हे लेके जी रहे हो तुमये तो क्षण भर की
तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है -बाँके बिहारी बरबीगहीया Read More »
रास नहीं क्यों आता है शौचालय का अभियान चला,वंचित घर रह जाता है।बाहर जाते बच्चे उनके,रास नहीं क्यों आता है जाति भेद को करते रहते,जलते रहते बढ़ने सेटाँग अड़ाते फिरते रहते,रोका करते पढ़ने से चाँद पर जा रही है दुनिया,बैरी के मन काले हैंखुले में शौच करने से ही,हत्या कर डाले हैं रंजिश रखते हैं
रास नहीं क्यों आता है-राजकिशोर धिरही Read More »
आसाम प्रदेश पर आधारित दोहे ब्रह्मपुत्र की गोद में,बसा हुआ आसाम। प्रथम किरण रवि की पड़े,वो कामाख्या धाम।। हरे-हरे बागान से,उन्नति करे प्रदेश। खिला प्रकृति सौंदर्य से,आसामी परिवेश।। धरती शंकरदेव की,लाचित का ये देश। कनकलता की वीरता,ऐसा असम प्रदेश।। ऐरी मूंगा पाट का,होता है उद्योग। सबसे उत्तम चाय का,बना हुआ संयोग।। हरित घने बागान में,कोमल-कोमल
आसाम प्रदेश पर आधारित दोहे-सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप” Read More »
प्रीत के रंग में गुनगुनाती हैं हवाएँमहमहाती हैं फ़िजाएँझूम उठता है गगन फिरखुश हुई हैं हर दिशाएँ प्रीत के रंग में मीत के संग में, रुत बदलती है यहाँ फिरफूल खिल उठते अचानकगीत बसते हैं लबों परमीत मिल जाते
प्रीत के रंग में-राजेश पाण्डेय *अब्र* Read More »
क्या होती है निराशा लेती जो छीन जीने की आशापेंचीदा है ,इसकी परिभाषासवालों से घिरे बयां करते चेहरे,बता रहे क्या होती है निराशा।। खो गई मुस्कान कहीं दूर किस्मत में नहीं, वो भी मंजूर आंखो में छाई, काली घटा आंसू भी बरसने को मजबूर।। टूटे सपनों को फिर जोड़ना चाहूंजो
क्या होती है निराशा – धनेश्वर पटेल Read More »
हाँ ये मेरा आँचल आँचल, हाँ ये मेरा आँचलजब ये घूंघट बन जाता सिर परआदर और सम्मान बड़ों काघर की मर्यादा बन जाता है जब साजन खींचें आँचल मेराप्यार, मनुहार और रिश्तों मेंयही सरलता लाता हैप्यार से जब शर्माती हूँ मैंये मेरा गहना बन जाता है मेरा बच्चा जब लड़ियायेआँचल से मेरे उलझा जाएममता का
हाँ ये मेरा आँचल-वर्षा जैन “प्रखर Read More »
बेटी हूँ आपकी कोख मे पल रही , शीघ्र जग में आऊ। नन्ही सी परी बन,जन जन को बतलाऊ। हूं बेटी मैं आपकी,दूध का कर्ज चुकाऊ।एक नही दो-दो कुल की,लाज बचाऊ।बेटी हूं आपकी……………….। पंख नही फिर भी,आसमान उड़ जाऊ। मंगल पर रख कदम,दुनिया को हसाऊ।। बेटा नही बेटी हु इस धरा की,आवाज दे चिल्लाऊ।तू कहे
बेटी हूँ आपकी-भागवत प्रसाद साहू Read More »
गाय गरुवा के हड़ताल हमरो बनय राशन कारड चारा मिलय सरकारी ।सब्बो योजना ल छोड़ भर पेट मिलय थारी।जब तक पूरा न होवय गरुवा घुरुवा अउ बारी ।गाय गरुवा के हड़ताल रही जारी…….। छत्तीसगढ़ के चारो कोती हामर हावय चिन्हारी ।चाहे नेता चाहे बाबा चाहे ओ रास बिहारी।लोटा लोटा गोरस पियय चारा के नइये पुछारी
गाय गरुवा के हड़ताल Read More »
भारत माता रोती है जब-जब सीमा पर अपना,वीर सपूत खोती है ।तब भारत माता रोती है,तब भारत माता रोती है ।। सीने से लगाकर मां जिसको दूध पिलाती ।गोद में बिठाकर मां जिसको रोटी खिलाती ।छाती में लिटाकर मां जिसको लोरी सुनाती। बाहों में झूलाकर मां जिसको रोज सुलाती ।जब कोई मांअपने लाल का,पुण्यतिथि मनाती
भारत माता रोती है -हृषिकेश प्रधान “ऋषि” Read More »