मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से
हिंदी कवितामैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से,। मैं मरुं नित असहनीय पीडा से, मैं गुजरता नित कठिन परिस्थितियों से, मेरी सुंदरता कोमल शाखाओं से,उमर से पहले ही रहता मानव, मुझे काटने को तैयार, पल भर में करता अपाहिज और लाचार, पीपल, बरगद, नीम और सालकाट दिए मेरे अनगिनत साथी विशाल, शैतानी मानव कर रहा, अपना रेगिस्तानी […]
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