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मानव समानता पर कविता
शादी से पहले
आओ स्कूल चलें हम
कमाए धोती वाला खाए टोपी वाला
राणा की तलवार
इधर-उधर की मिट्टी
नशे में चित
निशा गई दे करके ज्योति
हिन्दी बिन्दी भूल गये सब
कागा की प्यास
धुआँ घिरा विकराल
धरती हमको रही पुकार
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