अनुच्छेद 47
हिंदी कविताअनुच्छेद 47 अनुच्छेद संतालिस पढ़, भारतीय संविधान|नशा नियंत्रण सत्ता करे, कर रहा है बखान||कर रहा है बखान, इसे लागू करवाओ|नशों से कर के मुक्त, धरती को स्वर्ग […]
अनुच्छेद 47 अनुच्छेद संतालिस पढ़, भारतीय संविधान|नशा नियंत्रण सत्ता करे, कर रहा है बखान||कर रहा है बखान, इसे लागू करवाओ|नशों से कर के मुक्त, धरती को स्वर्ग […]
भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे।[1] उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। भीमराव अम्बेडकर पर दोहे
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शिक्षक दिवस पर कविता शिक्षक से है ज्ञान प्रकाश ।शिक्षक से बंधती है आस।शिक्षक में करुणा का वास।जिनके कृपा से चमके अपना ताज।चलो मनाएं , शिक्षक दिवस आज। शिक्षक दिलाते हैं पहचान ।शिक्षक से ही बनते महान ।शिक्षक होते गुणों की खान।निभायेंगे हम ये सम्मान का रिवाज।चलो मनाएं , शिक्षक दिवस आज। जग में सुंदर,
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9 नवम्बर राष्ट्रीय क़ानूनी साक्षरता दिवस अन्याय जब हद से बढ़ जाए ,बेईमानी सर पे चढ़ जाए ।समाज में निज मान पाने कोजो अपने हक पे लड़ जाए ।आज है जिसकी आवश्यकता ,वो है, वो है कानूनी साक्षरता ।।न्याय सभी के लिए, चाहे अज्ञानी निर्धन ।बिन इसके कैसे ? हो सुरक्षित जनजीवन ।सही न्याय मिले,शीघ्र
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16 सितंबर विश्व ओजोन दिन विशेष सूरज है आग का गोला ।जलता है ,बनकर शोला । किरणों में है ,पराबैंगनी ।सबके लिए ,घातक बनी। धन्यभाग, हम मानव का।जो कवच है इस धरा का। ओज़ोनपरत वो कहलाए।घातक किरणें आ ना पाए। आज छेद होने का है डर ।भोग विलास का है असर । एसी फ्रिज उर्वरक
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(वीरांगना बिलासा बाई निषाद की वीर गाथा,जिसके नाम से छ.ग. के सुप्रसिद्ध शहर-बिलासपुर का नाम पड़ा)(जनश्रुति के अनुसार) वीरांगना बिलासा बाई वीरगाथा पर दोहे बहुत समय की बात है,वही रतनपुर राज।जहाँ बसे नर नारि वो,करते सुन्दर काज।।1।।केंवट लगरा गाँव के,कुशल परिश्रमदार।कर आखेटन मत्स्य का,पालत स्व परिवार।।2।।तट देखन अरपा नदी,इक दिन पत्नी साथ।पत्नी बैसाखा कही,लिए हाथ
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कब्र की ओर बढ़ते कदम पतझड़ में सूखे पत्ते विदा हो रहे हैंविदा ले रहे हैं, खाँसती आवाज़ें ज़माने सेकुछ पल जी लेने की खुशी सेवृद्धों का झुंड टहलने निकल पड़ा हैदड़बों से पार्क की उदास बेंच की ओरउनकी धीमी चाल और छड़ी से चरमराते पत्ते सिसक पड़े हैं।बेंच पर बैठे हैं कुछ ठूँठ से
कब्र की ओर बढ़ते कदम -रमेशकुमार सोनी Read More »
अब्र की उपासना मेरी यही उपासना, रिश्तों का हो बन्ध।प्रेम जगत व्यापक रहे, कर ऐसा अनुबन्ध।। स्वप्रवंचना मत करिये, करें आत्म सम्मान।दर्प विनाशक है बहुत, ढह जाता अभिमान।। लोक अमंगल ना करें, मंगल करें पुनीत।जन मन भरते भावना, साखी वही सुनीत।। नश्वर इस संसार में, प्रेम बड़े अनमोल।सब कुछ बिक जाता सिवा, प्रीत भरे दो
रक्त दान पर दोहे रक्त दान हम सब करे,तन को चंगा पाय।खुद को होवे लाभ जी,दूसर जान बचाय।। डॉक्टर हर दिन ये कहे,मानव होत महान।पर हितकारी ध्यान में,करे रक्त का दान।। जान बचे है तीन की,दान करे जब एक।भले काम को सब करे,कहते बात हरेक।। नर नारी के देह में,दस यूनिट का रक्त।ए बी सी
आतंक पर कुण्डलिया जल जंगल अरु अवनि पर , नर का है आतंक ।नंगा होकर नाचता , कल का गंगू रंक ।।कल का गंगू रंक ,
वृक्षारोपण पर कविता गिरा पक्षी के मुहं से दानाबस वही हुवा मेरा जनम!चालिस साल पुराना हु मैजरा करना मुझ पे रहम!! आज भी मुझको याद हैवह बिता जमाना कल!पहली किरण लि सुर्य कीथा बहुत ही सुहाना पल!! जब था मै नया-नया तोथा छोटा सा आकार!धिरे-धिरे बड़ा हुआ तोफिर बड़ा हुआ आकार!! झेलनी पड़ी बचपन मे
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जून दुपहरिया में जून दुपहरिया मे देहिया जरेला |सूखल होठवा पियासिया लगेला | सुना मोरे सइया |कईसे बीतिहे गरमिया के दिनवा हमार |सुना मोरे सइया | पेड़वा का छांव नाही ,चले केवनों उपाय नाही |टप-टप चुवेला पसीनवा चैन कही आय नाही |सुना मोरे सइया |ले आई देता एसी कूलर घरवा हमार |सुना मोरे सइया | गउआ
भोजपुरी पर्यावरण लोक गीत -जून दुपहरिया में Read More »