कविता बहार

बोझ पर कविता

हिंदी कविता

बोझ पर कविता कभी कभीकलम भी बोझ लगने लगती हैजब शब्द नहीं देते साथअंतरभावों काउमड़ती पीड़ायें दफन हो जातीभीतर कहींउबलता है कुछधधकता हैज्वालामुखी सीविचारों के बवंडरभूकंप सा कंपाते हैमन मस्तिष्क कोऔर सारे तत्वों के बावजूदमन अकेला हो जाता हैउस माँ की तरहजो नौ महीने सहर्षभार ढोती ।उस पिता की तरहजो कंधे और झुकती कमर तकजिम्मेदारी […]

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जीवनामृत मेरे श्याम

हिंदी कविता

जीवनामृत  मेरे   श्याम :   — अमृत  कहाँ  ले  पाबे रे  मंथन  करे बगैर ।सद्ज्ञान नई मिले तोला साधन करे बगैर ।। मन  मंदराचल  बना ले  हिरदे  समुंद  कर ,मन  नई बँधावे  देख ले  बंधन करे बगैर ।। गुन  दोष  के सुतरी  ल बने  बांध  खिंच के ,मथ  रात दिन आठो पहर खंडन करे बगैर ।।

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त्रिपदिक

हिंदी कविता

त्रिपदिक      .    अतीत   धरोहर   है ।सुधार  ले  चल  आज  कोतुझे  आता  जौहर   है ।            *जीवन रण हारा अगर ।मत हो निराश बाँकुरेदेगी विजय मंत्र समर ।           *कविता नहीं बोल रहा ।आप बीती है मेरीभेद ये क्यों खोल रहा ।                *कर्म में प्रेम धर्म कर ।समृद्धि घर आती हैबंदे सदा सुकर्म कर ।     .              *क्यों 

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हिन्दी की बिंदी में शान

हिंदी कविता

हिन्दी की बिंदी में शान हिन्दी भाषा की बिंदी  में शान।तिरंगे के गौरव गाथा की आन।।राजभाषा का ये पाती सम्मान।राष्ट्रभाषा से मेरा भारत महान ।। संस्कृत के मस्तक पर चमके।सिंधी,पंजाबी चुनरी में दमके।।बांग्ला,कोंकणी संग में थिरके।राजस्थानी चूड़ियों में खनके ।। लिपि देवनागरी रखती ध्यान।स्वर व्यंजन में है इसकी शान।।मात्राओं का हमें कराती ज्ञान।शब्द भंडार है

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आज का भारत -आर्द्रा छंद

हिंदी कविता

        आज का भारत  हवा  चली  है  अब  देश  में  जो         विकास  गंगा  बहती  मिली  है ।आनंद   वर्षा   चहुँ  ओर   होती        तरंग  से  आज  कली खिली है ।। गरीब   कोई   मिलता   नहीं   है        बेरोजगारी    अब     दूर   भागे ।संसाधनों  की  कमियाँ  नहीं  है         रिकार्ड  उत्पादन  और  आगे ।। बना   रहा   भारत   आशियाना         है  चाँद की भूमि निहाल

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बसंत बहार

हिंदी कविता

बसंत बहार शरद फुहार जाने लगीबसंती बहार आने लगी !कोयल की कूक गुंजे चहुँ ओरधीरे – धीरे धूप तेज कदम नेंबाग में आम बौराने लगी! शाम ढ़ले चहचहाते पक्षियोंघोसला को लौटने झुंड में,पेड़ों को पत्ते पीला होकरएक – एक कर झड़ने लगी!खेत खलिहान मे पुआलगाय बकरी सुबह शाम तकनिश्चिंत हो चरने लगी! आया बसंत बहारलाया

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भोर का दिनकर

हिंदी कविता

” भोर का दिनकर “ पश्चिम के सूर्य की तरहदुनियाँ भी ….मुझे झूठी लगीमानवता काएक भी पदचिन्हअब तो दिखाई नहीं देताजागती आँखों केसपनों की तरहअन्तःस्थल कीभावनाएँ भीखण्डित होती हैंतब ..जीवन काकोई मधुर गानसुनाई नहीं देताफिर भी ….सफेदपोश चेहरों कोबेनकाब करते हुएएक नई उम्मीद कादमखम भरते हुएसुनहले फसलों कोप्राणदान देते हुएइस विश्वरूपी भुवन की ओरधीमे कदमों

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लकड़ियों पर कविता

हिंदी कविता

लकड़ियों पर कविता              चिता की लकड़ियाँ,ठहाके लगा रही थीं,शक्तिशाली मानव को,निःशब्द जला रही थीं!मैं सिसकती रही,जब तू सताता था,कुल्हाड़ी लिए हाथ में,ताकत पर इतराता था!भूल जाता बचपन में,खिलौना बन रिझाती रही,थक जाता जब खेलकर,पालने में झुलाती रही!देख समय का चक्र,कैसे बदलता है,जो जलाता है वो,कभी खुद जलता है!मेरी चेतावनी है,अब मुझे पलने दे,पुष्पित,पल्लवित,होकर फलने

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बोल रहे पाषाण

हिंदी कविता

बोल रहे पाषाण बोल रहे पाषाण अबव्यक्ति खड़ा मौन है,छोड़ा खुद को तराशनापत्थरों पर ही जोर है।कभी घर की दीवारेंकभी आँगन-गलियारे,रखना खुद को सजाकररंग -रौगन का दौर है।घर के महंगे शो पीसबुलाते चारों ओर हैं  ,मनुज को समय नहींअब चुप्पी का दौर है।दिखावे की है दुनियाकलाकारी सब ओर है,असली चेहरा छुपा लेनाअब मुखौटों का दौर

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आया बसंत

हिंदी कविता

“आया बसंत” नव पल्लव नव रंग लिए,नव नवल पुष्प का गंध लिए।सरसों की पीली चुनरी ओढ़े, टेशू के सुन्दर रंग लिए। खेतों और खलिहानों में, बागों और कछारों में। जंगल और पहाड़ों में, रंग बसंती संग लिए। उलट-पुलट चल रही बयारें, दिशा दिशा सब झूम रहे।नव चेतन का गुँजार लिए, चहुंओर निराली सी लगती।नभ में उज्जवल

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doha sangrah

दोहा सप्तक

हिंदी कविता

दोहा सप्तक                          *जो तू तोड़े फूल को , किया बड़ा क्या काम ।फूलों को  मुरदा  करे , खुश हो  कैसे  राम ।।                         *जीवन  के सौन्दर्य से , जब  होगी पहचान ।पायेगा  तब ही  मजा , सचमुच  में इंसान ।।        .                 *समय लगे न चित्र रचे , झटपट रचना होय ।एक चरित्र  निर्माण में ,

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जिन्दगी पर कविता

हिंदी कविता

जिन्दगी पर कविता जिन्दगी तो प्रेम की एक गाथा है,जिन्दगी भावुक प्रणय की छाँव है,जिन्दगी है वेदना की वीथिका सीजिन्दगी तो कल्पना की छुवन भर है। जिन्दगी है चन्द सपनों की कहानी,जिन्दगी विश्वास के प्रति सावधानी,जिन्दगी इतिहास है निर्मम् समय का जिन्दगी तो आँसुओं की राजधानी। जिन्दगी तो लहलहाती फसल सी हैजिन्दगी कल्पनाओं के सुनहरे

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