कविता बहार

नज़र की नज़र से

हिंदी कविता

नज़र की नज़र से नज़र की नज़र से मुलाक़ात होगीहज़ारों सवालों की बरसात होगीबयाँ हर सबब हिज़्र का वो करेंगेकि हर बेगुनाही की इस्बात होगीसर-ए-राह हमसे जताना न उल्फ़तगिरेंगे जो आँसू तो आफात होगीनज़र फ़ेर ली तुमसे हमने कहीं जोअदब पर ख़ताओं की शह-मात होगीअगर दिल की राहें जुदा हो गईं तोख़लिश सी कहीं दिल […]

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वीर जवान पर कविता

हिंदी कविता, ,

23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है और भारत में मनाया जाता है। इस दिन 1931 को तीन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। महात्मा गांधी की स्मृति में। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी की हत्या कर दी गयी थी। महात्मा गांधी के सम्मान में

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गीत नवगीत लिखें

प्रकृति और पर्यावरण

गीत नवगीत लिखें ग़ज़ल रुबाई या फिर कविता, भले गीत नवगीत लिखें। मन के भाव पिरोते जायें, जैसा करें प्रतीत लिखें। देख बदलते अंबर के रँग, काव्य तूलिका सदा चले।छाया से सागर रँग बदले, लहरें तट से मिलें गले।लाल गुलाबी श्वेत श्याम या, नीला धानी पीत लिखें।ग़ज़ल रुबाई या फिर कविता, भले गीत नवगीत लिखें।

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अंतरात्मा पर कविता

हिंदी कविता

अंतरात्मा पर कविता मेरा संबंध तुमसेअंतरात्मा का है।हाँ बाहृा जगत मेंहम पृथक ही सही,न दिखे ये रिश्ताजग में कहींमन का जुड़ावमन से तो है ।मेरा संबंध तुमनेअंतरात्मा का है।भू से अंबर तकहर जगह तुममेरी नजरों में हो।मेरी हर धडकन में तुमजैसे हवा का संचार,सांसो के लिये है,जल का सिंचन,जीवन के लिये है।वैसे ही एक से

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सरस्वती वन्दना

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सरस्वती वन्दना विनती करता हूँ शारदे माता,विद्या का हमको वरदान दे  दे।हम झुके तेरे चरणों में निशदिन,तेरा आसरा हम सबको दे दे।विनती———हर वाणी में सरगम है तेरा ,तू हमें स्वर का राग सिखा दे।हर गीत बन जाए धड़कन,नृत्य पे सुर लय ताल मिला दे।मन की वीणा के तार बजाकर, सुरमय संगीत हमारा कर दे।विनती——— ।हम

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मेरी तीन माताएँ

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। मेरी तीन माताएँ नौ मास तक जिसने ओद्र में रखकर,,हमें इस संसार में लायी।अपनी स्तन का अमृत पिलाकर,,इस जग

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ओ तरु तात सुन ले

हिंदी कविता

ओ तरु तात सुन ले ओ!तरु तात!सुन लेमेरी वयस और तेरी वयस का अंतर चिह्न लेमैं नव अंकुर,भू से तकतातेरे साये में पलतातू समूल धरा के गर्भ में जम चुका। माना ,तेरी शाखा छूती जलद कोमधुर स्पर्श से पय-नीर पान करतीपर जिस दिन फैलेगी मेरी शाखाएँघनों को पार कर पहुँचेगी अनंत तकऔर चुनेगी स्वर्णिम दीप-तारक।

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चाहत को तुम पलकों में छुपाया न करो

हिंदी कविता

चाहत को तुम पलकों में छुपाया न करो सुनो न सुनो न ऐसे तड़पाया न करोपास बुला के दूर को हटाया न करोआख़िर इतना क्यों इतराते रहते होकितनी बार कहा है भाव खाया न करो गैरों से हंस हंस के तुम क्यों बातें करते होइस तरह से मुझको तुम जलाया न करोकभी कभी चलता है

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सादा जीवन की अभिलाषा

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सादा जीवन की अभिलाषा संयम के संग जीना चाहा,सँकल्प किया था मैने भी!सादा जीवन की अभिलाषा,कभी पाली थी मैने भी! जीवन रथ की चाल बैढँगी,कठिन डगर पर चला गया!मन के मेरे सब वादों को,पल पल मितवा छला गया!रिश्ते नातों की उलझन में,वादे तोड़े  मैने भी!संयम के संग जीना चाहा,सँकल्प किया था मैने भी!……(१) रहा भटकता

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mahatma gandhi

वन्दे मातरम् गाऊँगा

हिंदी कविता

वन्दे मातरम् गाऊँगा बापू जी के चरखे को,मैं भी खूब घुमाऊँगा।सत्य-अहिंसा की बातें,सबको रोज सुनाऊँगा।। चाचा जी के लाल ग़ुलाब,बाग़-बगीचे में लगाउँगा।शीश झुकाकर चरणों में,लाल ग़ुलाब चढ़ाऊँगा।। पर्वत-घाटी ऊँचा चढ़कर,तिरंगा ध्वज फहराउंगा।चाहे दुनिया जो भी करले,    वन्देमातरम् गाऊँगा।।     ||स्वरचित||उमेश श्रीवास”सरल”मु.पो.+थाना-अमलीपदरविकासखण्ड-मैनपुरजिला-गरियाबंद,छत्तीसगढ़

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mahatma gandhi

बापू पर कविता

हिंदी कविता

बापू पर कविता भारत ने थी पहन ली, गुलामियत जंजीर।थी  अंग्रेज़ी  क्रूरता, मरे   वतन  के   वीर।। काले पानी  की सजा, फाँसी हाँसी खेल।गोली  गाली  बरसते, भर  देते  थे  जेल।। याद करे जब देश वह, जलियाँवाला बाग।कायर  डायर  क्रूर  ने, खेला  खूनी फाग।। मोहन, मोहन  दास बन, मानो  जन्मे  देश।पढ़लिख बने वकीलजी,गुजराती परिवेश।। देखे  मोहन दास 

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वाणी वन्दना

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वाणी वन्दना    निर्मल करके तन_ मन सारा,   सकल विकार मिटा दो माँ,    बुरा न कहे माँ किसी को भी    विनय यह स्वीकारो  माँ।      अन्दर  ऐसी ज्योति जगाओ      हर  जन का   उपकार करें,       मुझसे यदि त्रुटि कुछ हो जाय       उनसे मुक्ति दिलाओ  माँ।        प्रज्ञा  रूपी किरण पुँज तुम        हम तो निपट  अज्ञानी है,         हर दो

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