कविता बहार

यादों के झरोखे से

हिंदी कविता

यादों के झरोखे से ख़तमिल गयातुम्हारा कोरा देखा, पढ़ा, चूमाऔरकलेजे से लगाकररख लिया अनकही थी जो बातसब खुल गयीकालिमा भरी थी मन मेंसब धुल गयी हृदय की वीणा बज उठीछेड़ दी सरगमचाहते थे तुम कितनामगर वक़्त था कम और तुमनेकुछ नहीं लिखकर भीजैसेसब कुछ लिख दिया मैंनेदेखा, पढ़ा, चूमाफिरकलेजे से लगाकररख लिया राजेश पाण्डेय*अब्र*  अम्बिकापुर

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प्रभात हो गया

हिंदी कविता

प्रभात हो गया उठोप्रात हो गयाआँखें खोलोमन की गठानें खोलो आदित्य सर चढ़करबोल रहा हैऊर्जा संग मिश्रीघोल रहा है नवल ध्वज लेकरअब तुम्हेंजन मन धन के निमित्तलक्ष्य की ओरजाना हैगंतव्य के छोर परपताका फहराना है असीम शक्ति तरंगेंतुम्हारे इंतज़ार में हैं उठो !मेघनाद की तरहहुंकार भरोघन गर्जन करो बढो!हासिल करोविजयी बनोइतिहास रचोसमर तुम्हारा है भाग्य

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doha sangrah

दोहा पंचक

हिंदी कविता

दोहा पंचक -रामनाथ साहू ननकी किन्नर  खूब  मचा  रहे ,  रेलयान  में   लूट ।कैसी है  ये  मान्यता , दी  है किसने  छूट ।। जल थल नीले गगन पर ,, मानव का आतंक ।दोहन जो  करता  मिले , सागर को ही पंक ।। हिंसा  हुई  बढ़ोतरी , होत   अहिंसा    छोट ।सबके  मन  को भा  गई ,

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ये है मेरा वतन

नारी जीवन और संवेदना

ये है मेरा वतन ये है मेरा वतन मेरा गंगा जमन ।ये देश है गौतम गांधी काये देश है नेहरू शास्त्री कायहाँ तिरंगा प्यारा है।यहाँ गंग यमुन की धारा है ।ये मेरा तन मन मेरा जीवन । ये है मेरा वतन मेरा गंगा जमनयहाँ तुलसी और कबीर हैयहाँ प्रीत का रंग अबीर हैयहाँ राम और

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हे मां शारदे रोशनी दे ज्ञान की

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हे मां शारदे रोशनी दे ज्ञान की हे मां शारदेरोशनी  दे ज्ञान कीतू  तो ज्ञान का भंडार हैहाथों में वीणा पुस्तकहंस वाहनी ,कमल धारणीओ ममतामयी मांइतनी कृपा मुझ पर करनामैं सदाचारी बनूंसत्य पथ पर ही चलूंविरोध क्यूं अन्याय कामुस्किलों में भी न घबराओ हे मां शारदेदूर कर अज्ञानताउर में दया का वास होज्योति से भर दे

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mahatma gandhi

बापू जी तुम्हें नही भूले

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बापू जी तुम्हें नही भूले हम भूल गये रे हर बात,बापू जी तुम्हें नही भूले।सब कुछ किया देश के नामतुम्हारे सब काम नही भूले।।हम भूल गये रे……………। संघर्ष करके जीना सिखाया,अपनें वतन को बचाया।सब कुछ हमनें पाया मगर,तेरे साथ ना झूला कभी झूले।।हम भूल गये रे……………..। उठाके अपनें गोद में हमकोसबको गले से लगाया।खेलें हैं

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देखो न मुझे बुखार है

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देखो न मुझे बुखार है देखो न मुझे बुखार हैया ये तेरा ही खुमार हैदिल को तेरा रोग लग गयादिल बेचारा बीमार है धड़कने बढ़ें और कभी थमेदेखूँ जो तुम्हें तो बोलो क्या हुआ हमेंहर जगह ही तुम दिखते हो मुझेदिल मेरा पुकारता है हर घड़ी तुझेक्या ये सच है या है ये भरमक्या तुझे

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वतन का नमक

हिंदी कविता

वतन का नमक इस जहां से सुकून,हमने कभी पाया तो हैचमन का कोई गुल,हिस्से मेरे आया तो है लफ़्ज मेरे लड़खड़ाये,सामने तूफां पाकरफिर भी तरन्नुम में , गीत कोई गाया तो हैतख़्त पर बैठे हमने,तपन के दिन बितायेजरा-सा प्रेम का,बादल कभी छाया तो है मंजिलों रोज ही बनते,गमों के आशियानेदरकते खण्डहरों को,हमनेभी ढाया तो हैइस

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ओ मोरे घनश्याम साँवरे

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ओ मोरे घनश्याम साँवरे ओ मोरे घनश्याम साँवरेओ मोरे घनश्याम साँवरेबिन दर्शन हम हो गए बावरेबिन दर्शन हम हो गए बावरेमोरे घनश्याम ओ मोरे श्यामओ मेरे….दूखन लागे हमरे नैनातुम बिन कान्हा अब नहीं चैनादिन गुज़रे न कटती रैनासुबह से हो गई अब तो शाम रेओ मोरे…..गलियन गलियन ढूँढत आईओ मोरे मोहन रट है लगाईबेचैनी तुमने

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सूनापन पर गीत

हिंदी कविता

सूनापन पर गीत आजाओ न तुम बिन सूना सूना लगता हैन जाओ न तुम बिन सूना सूना लगता हैजिसकी डाली पे हम दोनों झूला करते थेवो झूला वो बरगद सूना सूना लगता हैदिन में तुम्हारा साथ रात में ख़्वाब होते थेबिना तुम्हारे सावन सूना सूना लगता हैजिन आँखों में सदा तुम्हारा अक्स समाया थाउन आँखों

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मोहब्बत पर गीत

मन और भावनाएँ

मोहब्बत पर गीत मोहब्बत जन्म से कुदरत के कण कण में समाई है।मोहब्बत  पीर  पैगम्बर  सूफियों  की  बनाई  है।।कोई  शक्ति  मिटा  पायी  नहीं जड़ से मोहब्बत को,मोहब्बत  देवताओं  से  अमर  वरदान  पाई  है।।        मोहब्बत बहनों की राखी भाइयों की कलाई है।       मोहब्बत बाप के आँगन से बेटी की विदाई है।।       मोहब्बत आमिना मरियम यशोदा

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हम कहाँ गुम हो गये

हिंदी कविता

हम कहाँ गुम हो गये हम कहाँ गुम हो गयेमोह पाश में हम बंधे,नयनों मे ऐसे खो गये।रही नहीं हमको खबर,हम कहाँ गुम हो गये।।इंद्र धनुष था आँखों में,रंगीन सपनों में खो गये।प्रेम की मूक भाषा में,हम कहाँ गुम हो गये।।कशिश उनमें थी ऐसी,बेबस हम तो हो  गये।कुछ रहा ना भान हमें,हम कहाँ गुम हो

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