कविता बहार

जब भी दीप जलाना साथी/ हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश

हिंदी कविता

जब भी दीप जलाना साथी जब भी दीप जलाना साथी,उर के तमस मिटाना साथी।1। भेद-भाव सब भूल प्यार से,सबको गले लगाना साथी।2। दो दिन का यह मेला जीवन,हॅसना साथ हॅसाना साथी।3। महल-दुमहले और झोपड़ी,सबको खूब सजाना साथी।4। घर-आंगन खलिहान हमारे,दीप-ज्योति बिखराना साथी।5। वीर-शहीदों की सुधियों में,मन्दिर दीप सजाना साथी।6। धर्म सनातन को पहचानो,संस्कार अपनाना साथी।7। […]

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दीपावली मुबारक /शिवराज सिंह चौहान

हिंदी कविता

दीपावली मुबारक सबको  बारम्बार  मुबारक।दीपावली त्यौहार मुबारक।।🪔मेरे राम पधारे जब अयोध्या,उस दिन की यादगार मुबारक।🪔तिमिर भगाए जो जीवन का,खुशियों का उजियार मुबारक।🪔इक दूजे को जो करते रोशन,दीपों की वो कतार मुबारक।🪔बम्ब, पटाखे, फूल-झड़ी  संग,चकरी, राकेट, अनार मुबारक।🪔कर महा लक्ष्मी पूजन, वंदन,धन, दौलत अम्बार मुबारक।🪔‘शिव’ की मंगल कामना वाला प्यार  भरा  उपहार  मुबारक। दीपावली की शुभ

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गोवर्धन पूजा /  डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा

हिंदी कविता

गोवर्धन पूजा मात देवकी लाल की, लीला है अनमोल।बचपन से मोहित किए, उनकी मीठी बोल।। राधे के प्रियतम हुए , मीरा के हैं नाथ।ग्वाल बाल के बन सखा, देते भक्तों साथ।। मात पिता रक्षक बने, वासुदेव के लाल।दुष्ट कंस संहार कर, बने भक्त प्रतिपाल।। सेवक बनके गाय का, रूप धरे प्रभु ग्वाल।गोवर्धन पर्वत उठा, काट

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शिक्षा संसार / शिवराज सिंह चौहान

हिंदी कविता

शिक्षा संसार मात शारदे को नमन,                कर दिया मुझे निहाल।हंसी खुशी पूरे हुए,                    साढ़े अट्ठाइस साल।। भुला कभी ना पाऊंगा                      वो आदर सत्कार।मिला मान सम्मान मुझे,                  और सभी का प्यार।। जाने अंजाने में कोई,                     हरकत हुई फिजूल।गर गलती मुझसे हुई,                   जाना सब कुछ भूल।। मुझे बहुत कुछ दे दिया,                      तूने शिक्षा संसार।कभी चुका ना पाऊंगा,                    

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शुभ दीपावली / स्वपन बोस,, बेगाना,,

हिंदी कविता

शुभ दीपावली दीपावली की शुभ दिन आज आया है।जगमग, जगमग हर घर द्वार सजा है।दीपावली की शुभ दिन आया है। दूर हो दुःखों का अंधेरा सबने अपने आंगन में उम्मीद की दीपक जलाया है।सच्चा दीपावली उसी का है, जिसके हृदय में प्रेम समाया है।दीपावली का शुभ दिन आया है। चौदह वर्ष की‌ वनवास काटकर सिया

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शुभ दीपावली / डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा

हिंदी कविता

शुभ दीपावली शुभ दीपावली आई है,मिलकर दीप जलाएँ।सजे द्वार हरदम चमके,घर आँगन महकाएँ।। अंतर्मन भरे रोशनी, छल, द्वेष, अहम मिट जाए। आत्मसात कर सद्गुणों का, तन-मन शुद्ध बनाएँ।। रघुवर जैसे चरित बने,हम शीलवान बन जाएँ।सदा निश्चल भाव भरे मन, श्री राम की महिमा गाएँ।। प्रीत बंध मर्यादा से,जीवन को चलो सजाएँ।दीपों का उत्सव मनभावन,खुशियाँ बाँटें,

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करवा चौथ पर कविता

सुहागिनों का प्रेम और आस्था का त्यौहार /  डॉ एन के सेठी

मन और भावनाएँ

इस दोहों की श्रृंखला में करवा चौथ के त्यौहार का सुंदर चित्रण किया गया है, जिसमें सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। दिनभर की पूजा-अर्चना के बाद, वे चंद्रमा का दर्शन कर व्रत खोलती हैं और अपने पति के प्रति अमिट प्रेम और समर्पण को प्रकट

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शरद पूर्णिमा पर कविता

शरद पूर्णिमा / स्वपन बोस बेगाना

हिंदी कविता

इस कविता में शरद पूर्णिमा की चांदनी रात को अद्वितीय सौंदर्य और गहरे भावनात्मक जुड़ाव से जोड़ा गया है। चंद्रमा की रोशनी प्रियसी के मिलन की प्रतीक्षा को दर्शाती है, जबकि मानव जीवन में भगवान से दूर होने की पीड़ा और अनिश्चितता की झलक दिखाई देती है। कविता में नायक शरद पूर्णिमा की रात को

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करवा चौथ पर कविता

करवा चौथ का दिन / राकेश राज़ भाटिया

हिंदी कविता

करवा चौथ भारतीय संस्कृति में सुहागिनों के प्रेम और आस्था का प्रतीक पर्व है, जहां हर सुहागन सोलह श्रृंगार कर अपने पति की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए व्रत रखती है। इस दिन का विशेष महत्व चांद के दीदार से जुड़ा होता है, जो जीवनसाथी के प्रति समर्पण और प्रेम का प्रतीक माना जाता

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करवा चौथ पर कविता

पति-व्रता की प्रार्थना / शिवराज सिंह चौहान

मन और भावनाएँ

यह कविता एक पतिव्रता स्त्री की भावनाओं और समर्पण को दर्शाती है, जो करवा चौथ के व्रत के दौरान अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है। वह पूरे दिन व्रत रखती है, सोलह श्रृंगार करती है, मां पार्वती की कथा सुनती है और अपने सुहाग की सलामती की प्रार्थना करती है।

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शरद पूर्णिमा पर कविता

शरद पूर्णिमा / डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, जिसे भारत के विभिन्न भागों में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा अश्विन महीने  की पूर्णिमा को मनाई जाती है और इसे विशेष रूप से चंद्रमा से जुड़े धार्मिक और

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dashhara par kavita

रावन मारे बर बड़ हुसियार / राजकुमार ‘मसखरे’

समाज और यथार्थ

इस कविता में समाज के उन लोगों या नेताओं की आलोचना करता है जो जनता के अधिकारों और संसाधनों का दुरुपयोग करते हैं। “बहुरूपिया” का मतलब ऐसे लोग जो अपनी असली पहचान छिपाकर छल करते हैं। इसे समाज में जागरूकता फैलाने या भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठाने  में अपना रंग दिखाते हैं ।

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