हिंदी कविता

क्षमा के परे

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क्षमा के परे तुमरंजिश इसलिए रखते होक्योंकितुम चाहते होलोगतुम्हारी कल्पनाओं मेंफिट हों। वे नहीं होते।औरघावइच्छाओं को लगता है। तुम्हारी अपेक्षाएँदूसरों कोतुम परशक्ति दे देती हैं—औरतुम्हेंअसुरक्षित छोड़ जाती हैं। दूसरों कोअपनी अपेक्षाओं सेमुक्त कर दो। दूसरावह नहीं हैजोतुम सोचते हो—वहवही हैजो वह है। जबलोगतुम्हारी चाह केअनुसार नहीं चलते,तोदर्दसिर्फचाह को होता है। यह देख पानाकिअधिकांश लोगसंस्कारों कीमशीनें

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छोटे को नज़रअंदाज़ करो

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छोटे को नज़रअंदाज़ करो मैं उसे सबक सिखाऊँगा।मैं उसे तोड़ दूँगी।उसने अपमान किया—सुना तुमने?वह व्यंग्य था या नहीं?इशारा था या दुर्घटना?मैं गलत ठहराई गई—या नहीं? रुको। अपने ऊपरथोड़ी दया करो। इन छोटे युद्धों सेखुद को बचाओ।ये लड़ाइयाँतुम्हारी ऊर्जा खा जाती हैं,तुम्हारे घंटे निगल जाती हैं,तुम्हारी चेतना कोटुकड़ों में बाँट देती हैं—और बदले मेंकुछ भी नहीं

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बिना समझ के धाराप्रवाह बोलना शोर है

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Fluency without Insight Is Noise(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जहाँ शब्दअज्ञान और इच्छा की हड़बड़ी से निकलते हैं,वहाँ भीतरडर छिपा होता है।उसी डर को ढकने के लिएहम confidence पहन लेते हैं। आज की संस्कृति मेंबोलना ही योग्यता बन गया है—जितना तेज़,जितना आत्मविश्वासी,उतना ही “काबिल”। मंच पर खड़ा बच्चाउँगली उठाए,सीखी हुई दृढ़ता के साथ—जैसे सत्य उसकी

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तुम अकेले जन्मे नहीं हो

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तुम अकेले जन्मे नहीं हो तुम अकेले पैदा नहीं हुए।देहतुम्हारे साथ ही आई। एक ही क्षण,एक ही जन्म—फिर भीदोनों का स्वभावएक नहीं। चेतनामुक्ति चाहती है।देहपुरानी आदतों मेंसुरक्षा खोजती है। दोनोंएक ही पते पररहने को विवश हैं। देह के बिनाचेतना काकोई मंच नहीं।चेतना के बिनादेहसिर्फ़एक निर्जीव ढांचा है। परएक छत के नीचे रहनासमानता नहीं होता। किसी

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आप रचनात्मकता नहीं बना सकते

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आप रचनात्मकता नहीं बना सकते रचनात्मकता बनाई नहीं जाती—वह घटती है।जब मनफालतू बोझ से मुक्त होता है। तुम उसे पैदा नहीं करते,तुम बसदरवाज़ा साफ करते हो।वह स्वयं आती है,जहाँ जगह खाली हो। क्या रोकता है रचना को?भरा हुआ मन—चिंताओं से,लालसाओं से,परिणामों की भूख से। जो हर पल पूछता है—“अंत में क्या मिलेगा?”वह नयाकभी नहीं रच

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पिंजरा खिलाता है, आकाश मुक्त करता है

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पिंजरा खिलाता है, आकाश मुक्त करता है हमस्वतंत्रता के गीत गाते हैं।उसकी पूजा करते हैं।उसके सपने देखते हैं। लेकिनजब स्वतंत्रतावास्तव मेंदरवाज़ा खटखटाती है—तोहमदरवाज़ा बंद कर लेते हैं। क्यों? क्योंकिपिंजराखिलाता है। वहरोटी देता है।सुरक्षा देता है।आश्वासन देता है। वह कहता है—यहीं रहो।छोटे बने रहो।मैं सब सँभाल लूँगा। और स्वतंत्रता? स्वतंत्रताकोई वादा नहीं करती। वह कहती है—अब

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कोई भी आदत अच्छी आदत नहीं होती

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No Habit Is a Good Habit(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जीवनआदत और चुनाव के बीचलगातार खींचतान है—और अक्सरआदत जीत जाती है,क्योंकि वहचुपचाप चुनाव काभेष धर लेती है। आदत का अर्थ सरल है—दोहरावऔर अज्ञान।तुम करते हो,पर जानते नहीं क्यों। एक बटन दबता है,एक पैटर्न चल पड़ता है—न प्रश्न,न चेतना।बसएक मृत-प्रतिवर्त। जिस क्षणआदत हावी होती है,तुम मौजूद

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जंजीर नहीं, पंख दो

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जंजीर नहीं, पंख दो यदि प्रेम है,तो बाँधो मत।यदि प्रेम है,तो हल्का करो। जो रिश्तातुम्हारे जीवन मेंनई बेड़ियाँ जोड़ दे,वह प्रेम नहीं—एक जाल है।फूलों और इत्र मेंलिपटा हुआ पिंजरा। ईमानदारी से देखो—इस संबंध कासार क्या है? अपने आप से पूछो—यह व्यक्तितुम्हें क्या देता है? गुलाबयापुस्तकें? भोगयादृष्टि? आनंदयासमझ? उत्तरइतना भीछुपा हुआ नहीं। चेतना कामूल अभिशाप है—देह

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बकवास जिसे हम जीवन कहते हैं

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The Blabber We Call Life(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) हमारा पूरा जीवनखोखले शब्दों कीनींव पर खड़ा है—और फिर भीहम ऐसे चलते हैंजैसे सब समझते हों। तुम कर्म करते होक्योंकि तुम्हें लगता हैयह ज़िम्मेदारी है।तुम चिपके रहते होक्योंकि इसे प्रेम कहते हो। तुम रुक जाते होकर्तव्य के नाम पर,और दौड़ते होएक ऐसे भविष्य के पीछेजिसका अर्थतुम्हें

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दुनिया उसी को हिलाती है, जो हिलने योग्य होता है

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दुनिया उसी को हिलाती है, जो हिलने योग्य होता है यदि तुम स्वयं कोहिलने योग्य मानते हो,तोसब कुछतुम्हें हिला देगा। एक छोटी-सी टिप्पणी,एक मामूली बदलाव,एक तुच्छ घटना—हर चीज़तुम्हारे केंद्र तकपहुंच जाएगी। पर यदि तुमस्वयं कोअडिग मान लो,तो देखो—दुनिया वही रहती है,लोग वही रहते हैं,परउनकी शक्तिखत्म हो जाती है। यदि तुमखुद को छोटा समझते हो,तोसब कुछविशाल

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अनिश्चित रहें, जीवित रहें

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Stay Uncertain, Stay Alive(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) भ्रम में होनामर जाना नहीं है—खोज में होनाजीवित होना है। यह बेहतर हैकि तुम प्रश्नों के साथ चलो,बजाय इसकेकि झूठे विश्वास मेंरुक जाओ। तुम्हें confidence नहीं चाहिए,तुम्हें चाहिएईमानदारीऔर जिज्ञासा। जो बहुत आत्मविश्वासी दिखते हैं,अक्सरअपने डर कोमुस्कान से ढँक लेते हैं।उनका “मैं जानता हूँ”कभी-कभीअज्ञान का शोर होता है।

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नया रास्ता नहीं, नई आँखें

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नया रास्ता नहीं, नई आँखें यदि जीवन एक यात्रा है,तो हम सब चल रहे हैं। पर अधिकतरअँधेरे में चल रहे हैं—आँखों परपट्टी बाँधकर। दुनिया नेचलना सिखा दिया,पर यह नहीं बतायाकिकिधर चलना है,औरक्यों चलना है। विडंबना तो यह है—हम रास्ता ढूँढने की बात करते हैं,जबकिहमें यह भी स्पष्ट नहींकियात्री कौन है। बुद्धिकोई नया मार्ग नहीं बनाती।वहतुम्हारे

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