क्षमा के परे
हिंदी कविताक्षमा के परे तुमरंजिश इसलिए रखते होक्योंकितुम चाहते होलोगतुम्हारी कल्पनाओं मेंफिट हों। वे नहीं होते।औरघावइच्छाओं को लगता है। तुम्हारी अपेक्षाएँदूसरों कोतुम परशक्ति दे देती हैं—औरतुम्हेंअसुरक्षित छोड़ जाती हैं। दूसरों कोअपनी अपेक्षाओं सेमुक्त कर दो। दूसरावह नहीं हैजोतुम सोचते हो—वहवही हैजो वह है। जबलोगतुम्हारी चाह केअनुसार नहीं चलते,तोदर्दसिर्फचाह को होता है। यह देख पानाकिअधिकांश लोगसंस्कारों कीमशीनें
