सुख से परे
हिंदी कवितासुख से परे जीवन का उद्देश्यसुख नहीं है,सुख पाने कीबेचैनी से मुक्ति है। पैसा?सफलता?खुशी?इतने छोटे लक्ष्यइतने विशाल जीवन के लिए—कितनी अजीब सौदेबाज़ी। जिस सुख कोतुम जानते हो,वह सिखाया गया है,पालित है,क्षणिक उत्तेजना कानाम बदल दिया गया है। और वहदुख के बिनाजी ही नहीं सकता। सुख चाहिएतो पहले दुख चाहिए—गहरा सुख चाहिएतो गहरा दुख चाहिए।यही हैखुशी
