एक ही भूल सौ बार
हिंदी कविताएक ही भूल सौ बार क्या सच मेंकोई नई भूल होती है? ध्यान से देखो—जो आज तुम्हें गिरा रहा है,वही तोपाँच साल पहले भीतुम्हें हराकर गया था। नाम बदल गए,चेहरे बदल गए,परप्रवृत्ति?वह वहीं की वहीं है। गिरने की जगह बदली,समय बदला,बहाना बदला—पर गिरनाक्या कभी बदला? तुम कहते हो—इस बार अलग है।पर क्या सच में?या फिरपुराना
