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सुंदर पावन धरा भारती
जब याद तुम्हारी आती है
नयनों की भाषा
दौलत की भूख
सोच सोच के सोचो
सच्ची मुहब्बत पर गजल
तिरंगा शान- निर्मल नीर
अंतर्द्वंद्व बड़ा अलबेला
रूह की बस्ती में बसा लिया
मिलते हैं हमसफर
आज मैं बोलूंगा
बंद का समीकरण -रमेश कुमार सोनी
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