हिंदी कविता

वीरांगना बिलासा बाई वीरगाथा पर दोहे

समाज और यथार्थ

(वीरांगना बिलासा बाई निषाद की वीर गाथा,जिसके नाम से छ.ग. के सुप्रसिद्ध शहर-बिलासपुर का नाम पड़ा)(जनश्रुति के अनुसार) वीरांगना बिलासा बाई वीरगाथा पर दोहे बहुत समय की बात है,वही रतनपुर राज।जहाँ बसे नर नारि वो,करते सुन्दर काज।।1।।केंवट लगरा गाँव के,कुशल परिश्रमदार।कर आखेटन मत्स्य का,पालत स्व परिवार।।2।।तट देखन अरपा नदी,इक दिन पत्नी साथ।पत्नी बैसाखा कही,लिए हाथ

वीरांगना बिलासा बाई वीरगाथा पर दोहे Read More »

कब्र की ओर बढ़ते कदम -रमेशकुमार सोनी

हिंदी कविता

कब्र की ओर बढ़ते कदम पतझड़ में सूखे पत्ते विदा हो रहे हैंविदा ले रहे हैं, खाँसती आवाज़ें ज़माने सेकुछ पल जी लेने की खुशी सेवृद्धों का झुंड टहलने निकल पड़ा हैदड़बों से पार्क की उदास बेंच की ओरउनकी धीमी चाल और छड़ी से चरमराते पत्ते सिसक पड़े हैं।बेंच पर बैठे हैं कुछ ठूँठ से

कब्र की ओर बढ़ते कदम -रमेशकुमार सोनी Read More »

अब्र की उपासना

हिंदी कविता

अब्र की उपासना मेरी यही उपासना, रिश्तों का हो बन्ध।प्रेम जगत व्यापक रहे, कर ऐसा अनुबन्ध।। स्वप्रवंचना मत करिये, करें आत्म सम्मान।दर्प विनाशक है बहुत, ढह जाता अभिमान।। लोक अमंगल ना करें, मंगल करें पुनीत।जन मन भरते भावना, साखी वही सुनीत।। नश्वर इस संसार में, प्रेम बड़े अनमोल।सब कुछ बिक जाता सिवा, प्रीत भरे दो

अब्र की उपासना Read More »

रक्त दान पर दोहे

नारी जीवन और संवेदना

रक्त दान पर दोहे रक्त दान हम सब करे,तन को चंगा पाय।खुद को होवे लाभ जी,दूसर जान बचाय।। डॉक्टर हर दिन ये कहे,मानव होत महान।पर हितकारी ध्यान में,करे रक्त का दान।। जान बचे है तीन की,दान करे जब एक।भले काम को सब करे,कहते बात हरेक।। नर नारी के देह में,दस यूनिट का रक्त।ए बी सी

रक्त दान पर दोहे Read More »

आतंक पर कुण्डलिया

हिंदी कविता

आतंक पर कुण्डलिया जल जंगल अरु अवनि पर ,                            नर का है आतंक ।नंगा   होकर   नाचता ,                            कल का गंगू रंक ।।कल  का  गंगू  रंक ,       

आतंक पर कुण्डलिया Read More »

वृक्षारोपण पर कविता

हिंदी कविता

वृक्षारोपण पर कविता गिरा पक्षी के मुहं से दानाबस वही हुवा मेरा जनम!चालिस साल पुराना हु मैजरा करना मुझ पे रहम!! आज भी मुझको याद हैवह बिता जमाना कल!पहली किरण लि  सुर्य कीथा बहुत ही सुहाना पल!! जब था मै नया-नया तोथा छोटा सा आकार!धिरे-धिरे बड़ा हुआ तोफिर बड़ा हुआ आकार!! झेलनी पड़ी बचपन मे

वृक्षारोपण पर कविता Read More »

मै भी एक पेड़ हूं मत काटो

हिंदी कविता

मै भी एक पेड़ हूं मत काटो   (१)गली गली में मै हूं, छाया तुम्हे देता हूं।खेतों की पार में हूं, वर्षा भी कराता हूं।शीतल हवा देता हूं ,चुपचाप मै रहता हूं।देखो भाई मत काटो,मै भी एक पेड़ हूं।।                  (2)मीठा फल देता हूं , खट्टा फल देता

मै भी एक पेड़ हूं मत काटो Read More »

summer sea

भोजपुरी पर्यावरण लोक गीत -जून दुपहरिया में

समाज और यथार्थ

जून दुपहरिया में जून दुपहरिया मे देहिया जरेला |सूखल होठवा पियासिया लगेला | सुना मोरे सइया |कईसे बीतिहे गरमिया के दिनवा हमार |सुना मोरे सइया | पेड़वा का छांव नाही ,चले केवनों उपाय नाही |टप-टप चुवेला पसीनवा चैन कही आय नाही |सुना मोरे सइया |ले आई देता एसी कूलर घरवा हमार |सुना मोरे सइया | गउआ

भोजपुरी पर्यावरण लोक गीत -जून दुपहरिया में Read More »

मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से

हिंदी कविता

मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से,। मैं मरुं नित असहनीय पीडा से, मैं गुजरता नित कठिन परिस्थितियों से, मेरी सुंदरता कोमल शाखाओं से,उमर से पहले ही रहता मानव, मुझे काटने को तैयार, पल भर में करता अपाहिज और लाचार, पीपल, बरगद, नीम और सालकाट दिए मेरे अनगिनत साथी विशाल, शैतानी मानव कर रहा, अपना रेगिस्तानी

मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से Read More »

सुलगता हुआ शहर देखता हूँ

हिंदी कविता

सुलगता हुआ शहर देखता हूँ   इधर भी उधर भी जिधर देखता हूँ,सुलगता हुआ हर शहर देखता हूँ, कहीं लड़ रहे हैं कहीं मर रहे हैं,झगड़ता हुआ हर नगर देखता हूँ, कहीं आग में जल न जाए यहाँ सब,झुलसता हुआ हर बसर देखता हूँ, सियासत बहुत है घिनौना यहाँ पर,छिड़कता हुआ अब जहर देखता हूँ,

सुलगता हुआ शहर देखता हूँ Read More »

माँ गंगा का अवतरण दिवस

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ गंगा का अवतरण दिवस अवतरण दिवस माँ गंगा का दशमी  तिथि थी जेष्ठ मास इसके पावन तट पर मनुज ने किया 

माँ गंगा का अवतरण दिवस Read More »

तुम पर लगे इल्जामातमुझे दे दो

हिंदी कविता

तुम पर लगे इल्जामातमुझे दे दो तुम अपने अश्कों की सौगातमुझे दे दोअश्कों में डूबी अपनी हयातमुझे दे दो जिस रोशनाई ने लिखेनसीब में आंसूखैरात में तुम वो दवातमुझे दे दो स्याही चूस बन कर चूस लूंगाहरफ  सारेरसाले में लिखी हर इक बातमुझे दे दो जमाने से तेरी खातिर टकरा जाऊँगाजो तुम पर लगे इल्जामातमुझे दे

तुम पर लगे इल्जामातमुझे दे दो Read More »

Scroll to Top