हिंदी कविता

दहेज दानव

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दहेज दानव ये दहेज दानव हजारों कन्याएं खा गया।ये बदलता माहौल भी रंग दिखा  गया।। हर  रोज  अखबारों  में  ये   समाचार  है,ससुराल  जाने  से  कन्या  का इंकार  है,क्यों नवविवाहितों को स्टोव जला गया।। बिकने  को  तैयार  लड़के हर  तरह  से,मांगें  मोटर  कार   अड़के  हर  तरह  से,हर  नौजवान अपना  मोल लिखा  गया।। चाहिए  माल  साथ  में 

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पुलिस मेरे शहर की

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पुलिस मेरे शहर की अपनी पर  आ  जाए तोमुर्दों से भी उगलवाती हैजटिल से जटिल मामलायूं मिनटों में  निपटाती हैपुलिस मेरे शहर की|| सुस्ती और लापरवाही मेंकितने  मामले  दबाती हैचाय – पानी  के  बगैर  येमहीनों  भर  लटकाती  हैपुलिस मेरे शहर की|| मामला   कुछ   और  होएउसे और कुछ ही बनाती हैसीधे -साधे मामलों को भीबे वजह

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नहीं लेता सीख इंसान इनसे जाने क्‍यों?

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नहीं लेता सीख इंसान इनसे जाने क्‍यों? एक क्‍यारी मेंअनेक हैं पेड़-पौधेअलग-अलग हैंजिनकी नस्‍लअलग-अलग हैं गुणअलग-अलग हैं रंग-रूपफिर भीनहीं करते नफरतएक-दूसरे सेनहीं है इनमेंभेदभाव की भावनानहीं मानते किसी कोछोटा या बड़ानहीं है इनमें रंग-भेद हवा की धुन परथिरकते हैं सबएक लय मेंएक ताल मेंखिल जाते हैंसबके चेहरेबरसात मेंकितना है सदभावनहीं लेता सीखइंसान इनसेजाने क्‍यों? -विनोद

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कमाल का हुनर- विनोद सिल्ला

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कमाल का हुनर कमाल का हुनररखती हैं पूरे परिवार का ख्याल सभी परिजनों की पसंद-नापसंदका ख्याल सबकी इच्छा-अनिच्छा का ख्याल इतना सुनियोजित प्रबन्धन कमाल का हुनररखती हैं गृहिणियाँइनके हुनर कासमूचा मूल्यांकन अभी बाकी है   -विनोद सिल्ला© विनोद सिल्‍ला 771/14, गीता कॉलोनी, नज. धर्मशालाडांगरा रोड़, टोहानाजिला फतेहाबाद  (हरियाणा)पिन कोड 125120संपर्क +919728398500  इस पोस्ट को like करें (function(d,e,s){if(d.getElementById(“likebtn_wjs”))return;a=d.createElement(e);m=d.getElementsByTagName(e)[0];a.async=1;a.id=”likebtn_wjs”;a.src=s;m.parentNode.insertBefore(a, m)})(document,”script”,”//w.likebtn.com/js/w/widget.js”);कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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बहुत कठिन है वास्‍तविक होना

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बहुत कठिन है वास्‍तविक होना बहुत कठिन हैवास्‍तविक होनाकठिन ही नहींअसंभव हैवास्‍तविक होनावास्‍तविक हमया तो बचपन में होते हैंया अपने जीवनसाथीके पास होते हैंअसल मेंजीवनसाथी के पास भीवास्‍तविक होने मेंबहुत से पहलूरह जाते हैंअपने बच्चोंव माता-पिता के समक्षपूरी तरह सेबनावटी हो जाते हैंएक आदर्श काआडम्‍बरपूर्वकओड लेते हैं आवरणहो जाते हैंवास्‍तविकता सेबहुत दूरहमारे मन-मस्‍तिष्‍क मेंचल रहे

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कवि होना नहीं है साधारण

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कवि होना नहीं है साधारण   नहीं है साधारण कवि होनानहीं है साधारणअपेक्षित हैं उसमेंअसाधारण विशेषताएंमात्र कवि होना हीबहुत बड़ी बात हैलेकिन फिर भीआत्मश्लाघा के मारेलगते हैं नवाजनेखुद को हीराष्ट्रीय कविवरिष्ठ साहित्यकार केखिताबों सेनाम के आगे-पीछेलगा लेते हैंऐसे उपनामजिन पर स्वयंनहीं उतरते खरेसम्मानित होने वकरने का कारोबारले जाता हैपतन के रसातल मेंउनसे जनकल्याण केसृजन कीअपेक्षा

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हाइकु

माधुरी डड़सेना के हाइकु

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माधुरी डड़सेना के हाइकु 1मौसमी ज्वर-फंदे में झूल रहेप्रेमी युगल 2जलतरंग-सर्प के मुख आतीटर्र ध्वनि 3तांडव नृत्य-घर में तैर रहेसारा सामान 4फटा बादल-घर मे दुबका हैमगरमच्छ 5व्यस्त सड़के-बैठे हैं सड़क मेंभैसों का झुंड 6उत्तराषाढा-अरबी में चमकेपानी की बूंदे 7 पहली वर्षा-नाग जोड़े करतेप्रणय लीला 8 मावस रात-बूढ़ी गाय झेलतीमक्खियाँ दँश 9 गुड्डी का फोटो-चौराहे में

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अनुच्छेद 47

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अनुच्छेद 47 अनुच्छेद संतालिस पढ़,                  भारतीय   संविधान|नशा नियंत्रण सत्ता करे,                  कर  रहा है बखान||कर रहा है बखान,                इसे   लागू  करवाओ|नशों से कर के मुक्त,             धरती को स्वर्ग

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dr bhimrao ambedkar

भीमराव अम्बेडकर पर दोहे

समाज और यथार्थ

भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे।[1] उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। भीमराव अम्बेडकर पर दोहे

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शिक्षक दिवस पर कविता

समाज और यथार्थ

शिक्षक दिवस पर कविता शिक्षक से है ज्ञान प्रकाश ।शिक्षक  से बंधती है आस।शिक्षक में करुणा का वास।जिनके कृपा से चमके अपना ताज।चलो मनाएं , शिक्षक दिवस आज। शिक्षक दिलाते हैं पहचान ।शिक्षक से ही बनते  महान ।शिक्षक होते गुणों की खान।निभायेंगे हम ये सम्मान का रिवाज।चलो मनाएं , शिक्षक दिवस आज। जग में सुंदर, 

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9 नवम्बर राष्ट्रीय क़ानूनी साक्षरता दिवस पर कविता

समाज और यथार्थ,

9 नवम्बर राष्ट्रीय क़ानूनी साक्षरता दिवस अन्याय जब हद से बढ़ जाए ,बेईमानी सर पे चढ़ जाए ।समाज में निज मान पाने कोजो अपने हक पे लड़ जाए ।आज है जिसकी आवश्यकता ,वो है, वो है कानूनी साक्षरता ।।न्याय सभी के लिए, चाहे अज्ञानी निर्धन ।बिन इसके कैसे ? हो सुरक्षित जनजीवन ।सही न्याय मिले,शीघ्र

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16 सितंबर विश्व ओजोन दिन विशेष

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16 सितंबर विश्व ओजोन दिन विशेष सूरज है आग का गोला ।जलता है ,बनकर शोला । किरणों में है ,पराबैंगनी ।सबके लिए ,घातक बनी। धन्यभाग, हम मानव का।जो कवच है इस धरा का। ओज़ोनपरत वो कहलाए।घातक किरणें आ ना पाए। आज छेद होने का है डर ।भोग विलास का है असर । एसी फ्रिज उर्वरक

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