बेटा-बेटी में भेद क्यों पर कविता
हिंदी कविताबेटा-बेटी में भेद क्यों पर कविता सागर होते हैं बेटे, तो गंगा होती है बेटियांचांद होते हैं बेटे, तो चांदनी होती हैं बेटियांजग में दोनों ही अनमोल फिर भेद कैसा।।कमल होते बेटे,तो गुलाब होती हैं बेटियांपर्वत होते बेटे, तो चट्टान होती हैं बेटियांजग में दोनों ही अनमोल फिर भेद कैसा।।पेड़ होते हैं बेटे,तो धरा होती
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