नाराज़- डॉ० ऋचा शर्मा
समाज और यथार्थनाराज़- डॉ० ऋचा शर्मा माँ बेटे से अक्सर रहती है नाराज़नहीं करता बेटा कोई भी काजयही समझाना चाहती है माँजीवन का गहरा राज़बस इसीलिए रहती है बेचारी नाराज़बेटे को पहनाना चाहती हैकामयाबी का ताज़समाज को मुँह दिखा पाऊँरख ले बेटा इतनी लाजमैं हार चुकी, थक चुकी हूँसुन ले एक बात मेरी आजसबकी तरह कर पाऊँमैं
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