हिंदी कविता

Bhagat_Singh

भगत सिंह तुम्हारा नाम अमर / मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

भगत सिंह तुम्हारा नाम अमर (Intro)देश की माटी का सपूत था वो,अंग्रेज़ों के लिए काल था।कभी डरते ना, कभी ना झुकते थे,आजादी का मिसाल था । (Chorus)भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमरतुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर। भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमर ,तुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर।

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खुदीराम बोस

खुदीराम के नाम का गान /मनीभाई नवरत्न

देशभक्ति, हिंदी कविता

खुदीराम बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी थे, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनके साहस, बलिदान और देशप्रेम को समर्पित एक गीत प्रस्तुत है: खुदीराम के नाम का गान (Verse 1)वो नन्हा वीर था, पर दिल में जोश था, नादान नहीं था , उसे होश था जिसके बलिदान से,

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भारत छोडो आन्दोलन

भारत छोड़ो का जयघोष (भारत छोड़ो आंदोलन पर एक कविता)

देशभक्ति,

यहां भारत छोड़ो आंदोलन पर एक कविता प्रस्तुत है: भारत छोड़ो का जयघोष सुनो कहानी वीरों की, जब भारत हुआ बेखौफ,आजादी का बिगुल बजा, उठा स्वतंत्रता का शोर।नव जागरण की लहर चली, एकता का उठा संकल्प ,भारत छोड़ो का नारा गूंजा, देश की हुई कायाकल्प । अंग्रेजों की हुकूमत से, तंग हो गया था आमजन,तोड़नी

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विश्व आदिवासी दिवस पर एक कविता

आदिवासी गाथा ( विश्व आदिवासी दिवस पर एक कविता )

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

यहां विश्व आदिवासी दिवस पर एक कविता प्रस्तुत है: आदिवासी गाथा जंगलों की गोद में बसा,एक अद्भुत संसार है।संस्कृति जिसकी अनोखी,वह आदिवासी परिवार है। धरती से गहरा नाता,और पेड़ों से प्यार है।पर्वतों की ऊंचाई में बसी ,उनका विशाल संसार है। त्योहारों की रंगीन छटा,और नृत्य की बात निराली।गीतों में छुपा है जीवन,कहानी उनकी कभी न

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Dahi Handi festival

दही हाण्डी का उत्सव

मन और भावनाएँ

दही हाण्डी भारतीय त्योहारों का एक उल्लासपूर्ण हिस्सा है, खासकर महाराष्ट्र में, जहां इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रस्तुत है एक कविता जो दही हाण्डी के उत्साह, आनंद और सामाजिक एकता को दर्शाती है: दही हाण्डी का उत्सव मधुर मिलन का पर्व आया,दही हाण्डी का उल्लास लाया,हर गली, हर चौक

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Raksha Panchami's company (Poem on brother-sister relationship)

रक्षा पंचमी का संग ( भाई-बहन के रिश्ते पर कविता )

मन और भावनाएँ

रक्षा पंचमी एक विशेष हिन्दू त्योहार है जो भैया दूज के समय आता है और इसे विशेष रूप से भाई-बहन के रिश्ते की रक्षा और सुरक्षा के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर एक कविता प्रस्तुत है जो भाई-बहन के रिश्ते की रक्षा और स्नेह को दर्शाती है: रक्षा पंचमी का संग रक्षा

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Poem on Slave Trade Abolition Day

स्वतंत्रता की पुकार (दास व्यापार उन्मूलन दिवस)

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

दास व्यापार उन्मूलन दिवस का उद्देश्य दासता के खिलाफ संघर्ष और इसके उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस हमें मानव अधिकारों और समानता के लिए किए गए प्रयासों की याद दिलाता है। इस अवसर पर एक कविता प्रस्तुत है: स्वतंत्रता की पुकार दासता की जंजीरों को तोड़ें,मानवता को करें आजाद,हर इंसान का हक

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ANGDAN

अंगदान: जीवन का दान ( विश्व अंग दान दिवस पर कविता )

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

विश्व अंग दान दिवस पर कविता अंगदान के महत्व और इससे होने वाले जीवनदायिनी कार्य को उजागर करती है। अंगदान एक महान कार्य है, जो जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी देता है। आइए इस अवसर पर एक कविता प्रस्तुत करते हैं: अंगदान: जीवन का दान जीवन की राह में बढ़ते हम,हर कदम पर सीखते हैं

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मुहर्रम की याद

मन और भावनाएँ

मुहर्रम इस्लामी वर्ष का पहला महीना होता है और यह इस्लामी समुदाय के लिए एक विशेष महत्व रखता है, खासकर शिया मुसलमानों के लिए। यह महीना कर्बला के शहीदों की याद में मनाया जाता है, जिसमें इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का विशेष रूप से जिक्र होता है। मुहर्रम के समाप्त होने पर

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hasdeo river

हसदेव बचाव अभियान पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण

हसदेव बचाव अभियान पर कविता हसदेव को बचाना है पेड़ काटोगे तो हवा घटेगी,जल हो जायेगा गुम,मानव तेरे पतन का,चहूंँ ओर होगा धूम ही धूम। कहीं लुप्त हो जाएगा,यह प्रकृति का सुंदर चित्र,मनुष्य मारे पैर में कुल्हाड़ी,यह कार्य है विचित्र।वक्त की यही है आवाज,विश्व को भी बताना है,जग के अस्तित्व के लिए,हसदेव को बचाना है।

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moon

ठंडी का मौसम -अंजनी कुमार शर्मा

हिंदी कविता

ठंडी का मौसम –अंजनी कुमार शर्मा आया है ठंडी का मौसमसूरज का बल हुआ है कमओढे़ कोहरे की चादरगाँव-गाँव और नगर-नगरस्वेटर पहने जन पडे़ दिखाईओढे़ कंबल और रजाईकाँप रहा है कलुआ कुत्ताखलिहान में पडा़ है दुबकाठंडी के आगे सब हारेछिप गये हैं चाँद और तारेबर्फीली हवाएँ जब चलतीतन-मन में तब सिहरन उठतीऔर फिर कूछ नहीं

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