अपने आप को दूसरा जन्म दो
समाज और यथार्थ“अपने आप को दूसरा जन्म दो” पहला जन्ममाँ की कोख से होता है—शरीर मिलता है,नाम मिलता है,पर मैं कौन हूँयह नहीं मिलता। बच्चा रोता है,भूख लगती है,डर लगता है—यह प्रकृति सिखाती है। पर बड़ा होकर भीअगर आदमीसिर्फ़भूख, डर और लालच मेंही जीता रहे—तो जन्म अधूरा है। एक उदाहरण देखो—एक बच्चाखिलौना छिनते हीमारने दौड़ पड़ता है।अगर
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