सबसे ख़तरनाक घाव
हिंदी कवितासबसे ख़तरनाक घाव कोई भीजानबूझकरखुद को नहीं तोड़ता।हम जो भी करते हैं,राहत के नाम पर करते हैं,खुशी के भ्रम में,भागने की चाह में। हम कहते हैं—यह प्रेम है,यह स्वतंत्रता है,यह उपचार है।पर अज्ञाननए नाम पहन लेता है। खुद को चोट पहुँचानाकेवल दवाइयों या धारदार चीज़ों से नहीं होता।यह तब भी होता हैजब हम ज़हर कोआत्मा
