पत्ता, पेट और पृथ्वी / मनीभाई नवरत्न
समाज और यथार्थपत्ता, पेट और पृथ्वी हम खड़े हैं एक ऐसे समय मेंजहाँ सवालरोटी बनाम रोज़गार का नहीं,रोटी बनाम भविष्य का है।तेंदूपत्ता अब केवल पत्ता नहीं रहा—वह नीति है, मजबूरी है,हमारी सामूहिक चुप्पी काहरा दस्तावेज़ है। मनुष्य कहता है—मेरे बच्चे हैं,मेरी भूख है,विकल्प नहीं मेरे पास ।जबकिविकल्प हमेशा होता है,बस हम टालते रहते हैं उसे।जो जलती है […]
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